Punjab Board Exam Tie Breaker Rule: पंजाब सरकार ने बोर्ड परीक्षाओं में मेरिट सूची तैयार करने के नियमों में बड़ा बदलाव किया है। अब यदि दो या अधिक विद्यार्थियों के अंक समान होंगे तो उन्हें समान रैंक प्रदान की जाएगी। अधिकारियों ने मंगलवार को बताया कि पंजाब सरकार ने फैसला किया है कि बोर्ड परीक्षाओं में एक जैसे मार्क्स पाने वाले छात्रों को अब एक ही रैंक दी जाएगी। इसके साथ ही, टाई-ब्रेकर के तौर पर जन्म तिथि का इस्तेमाल करने की पुरानी परंपरा को खत्म कर दिया गया है।
Punjab Board Exam Tie Breaker Rule: पंजाब बोर्ड एग्जाम में टाइ ब्रेकर नियम खत्म
राज्य-स्तरीय सम्मान समारोह में लिया गया फैसला
एक आधिकारिक बयान के मुताबिक, शिक्षा मंत्री हरजोत सिंह बैंस ने यहां पंजाब स्कूल शिक्षा बोर्ड (PSEB) की बैठक के बाद इस फैसले की घोषणा की। यह फैसला 31 मई को हुए राज्य-स्तरीय सम्मान समारोह 'सितारे ज़मीन ते' के बाद लिया गया, जिसमें मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने 8वीं, 10वीं और 12वीं कक्षा के ज़िला टॉपर्स को सम्मानित किया था।
समारोह के दौरान छात्रों से बातचीत में कुछ छात्रों ने बताया कि टॉप रैंक पाने वाले छात्र के बराबर मार्क्स होने के बावजूद, सिर्फ़ उम्र की वजह से उन्हें मेरिट लिस्ट में नीचे रखा गया, जिससे उनकी रैंक पर असर पड़ा। इस मामले का संज्ञान लेते हुए, मान ने PSEB को यह परंपरा खत्म करने और बराबर मार्क्स पाने वाले सभी छात्रों के लिए संयुक्त रैंक सिस्टम लागू करने का निर्देश दिया।
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छात्रों के लिए ऐतिहासिक कदम
बयान के अनुसार, बैंस ने कहा कि यह छात्र-केंद्रित शिक्षा की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है। उन्होंने कहा, "टॉपर्स के बराबर मार्क्स पाने वाले छात्र को उम्र की वजह से कम रैंक नहीं दी जा सकती। मान के दूरदर्शी नेतृत्व में, अब बराबर मार्क्स का मतलब बराबर रैंक होगा। अधिकारियों ने बताया कि रैंकिंग में सुधार के अलावा, PSEB ने प्रश्न पत्र के डिज़ाइन में भी बड़े बदलावों को मंज़ूरी दी है, जिसका मकसद नकल रोकना और रटने की आदत को खत्म करना है।
यह कदम तब उठाया गया जब समारोह के दौरान छात्रों ने मुख्यमंत्री को बताया कि मौजूदा प्रश्न पत्रों में समझने के बजाय रटने को ज़्यादा महत्व दिया जाता है। बैंस ने कहा, "हम विषय विशेषज्ञों द्वारा तैयार किए गए योग्यता-आधारित प्रश्न पत्रों की ओर बढ़ रहे हैं। हमारा ध्यान छात्र की समझ, विश्लेषणात्मक क्षमता और तर्कशक्ति को परखने पर है, न कि इस बात पर कि वे कितनी अच्छी तरह रट सकते हैं। बेहतर प्रश्न पत्रों का मतलब है नकल की कम गुंजाइश। जब सवाल सोचने की क्षमता को परखते हैं, न कि याददाश्त को, तो पेपर लीक और नकल का कोई मतलब नहीं रह जाता।
इनपुट: पीटीआई
