राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) ने जून-जुलाई 2026 के दौरान आयोजित की गई UGC NET, CSIR-NET और ICAR की परीक्षाओं के संबंध में बड़ा अपडेट जारी किया है। एजेंसी ने 17 अगस्त को कुल 184 विषयों में से 181 विषयों की प्रोविजनल आंसर-की जारी की थी। यूजीसी-नेट के 3 प्रमुख विषयों समाजशास्त्र, अंग्रेजी और कॉमर्स के पेपर में कई खामियां सामने आने के बाद उनकी आंसर की को रोक दिया गया है। इसके बाद NTA ने परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता और उम्मीदवारों के हितों की रक्षा का हवाला देते हुए इन तीनों विषयों की परीक्षा को रद्द करने का ऐलान किया और री-एग्जाम कराने का महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। इस संबंध में एजेंसी द्वारा नया शेड्यूल भी जारी कर दिया गया है।
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कितने लाख छात्रों ने दी थी परीक्षा
NTA द्वारा तीनों प्रमुख परीक्षाओं का आयोजन विशाल स्तर पर किया गया था, जिसमें अभ्यर्थियों की व्यापक भागीदारी देखने को मिली। जानकारी के अनुसार, इसमें 184 विषय और पेपर शामिल थे, जिसमें 24,700 प्रश्न पूछे गए थे। इस परीक्षा के लिए 10 लाख से अधिक छात्रों ने रजिस्ट्रेशन किया था और परीक्षा में बैठने वाले छात्रों की संख्या 7.96 लाख थी।
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दोबारा परीक्षा का फैसला क्यों?
NTA के अनुसार, समाजशास्त्र, अंग्रेजी और कॉमर्स के पेपर में विषय विशेषज्ञों की जांच के दौरान गलतियां और पिछले वर्षों के प्रश्नों का अत्यधिक दोहराव पाया गया। ईमानदार छात्रों का हित को देखते हुए एजेंसी का मानना है कि खामियों वाले पेपर को जारी रखने से अपनी मेहनत के दम पर तैयारी करने वाले अभ्यर्थियों को नुकसान हो सकता था। इसलिए दोबारा पेपर कराने का फैसला लिया गया है। एनटीए ने यह भी कहा है कि प्रभावित अभ्यर्थियों से दोबारा परीक्षा के लिए कोई अतिरिक्त फीस नहीं देनी है और इसका सीटों पर भी कोई असर नहीं होगा। इसका अर्थ यह है कि री-एग्जाम की वजह से विषयवार सीटों के आवंटन या क्वालीफाइंग उम्मीदवारों की संख्या में कोई कटौती नहीं की जाएगी।
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पेपर सेटिंग प्रक्रिया में बड़े बदलाव की तैयारी
इस घटनाक्रम के बाद NTA ने अपनी आंतरिक कार्यप्रणाली को और अधिक मजबूत करने का संकल्प लिया है। आने वाले समय में पेपर सेटिंग, ट्रांसलेशन, कंपोजिंग और मॉडरेशन के प्रोटोकॉल को सख्त बनाया जाएगा ताकि भविष्य में ऐसी मानवीय या तकनीकी गलतियों को शुरुआती स्तर पर ही रोका जा सके। साथ ही, लापरवाही बरतने वालों के खिलाफ जवाबदेही भी तय की जाएगी।
