देश के इतिहास में पहली बार नीट यूजी का पेपर बनाने वाली टीम को बाहरी दुनिया से अलग आइसोलेशन में रखने और प्रश्न पत्रों को सेंटर्स तक पहुंचाने के लिए वायु सेना की मदद लेने का फैसला किया गया है। सूत्रों की मानें तो प्रश्न पत्र पहुंचाने की पूरी जिम्मेदारी के लिए उच्चस्तरीय समिति बनाई गई है। इसमें शिक्षा मंत्रालय, संचार मंत्रालय के अधीनस्थ डाक विभाग, रक्षा मंत्रालय, नागरिक उड्डयन मंत्रालय व केंद्रीय गृहमंत्रालय के साथ वरिष्ठ अफसर हैं। यह समिति पीएमओ और कैबिनेट सचिवालय को सीधे रिपोर्ट करेगी। परीक्षा केंद्रों पर भी सुरक्षा इस बार काफी सख्त रहेगी। AI कैमरे, मोबाइल जैमर के अलावा बायोमेट्रिक कराने की भी बात सामने आई है।
एग्जाम सेंटर्स तक पेपर पहुंचाने वाले डाक विभाग और सेना के वाहनों में जीपीएस के साथ लाइव कैमरे जोड़े जा रहे हैं। परीक्षा शुरू होने तक बॉक्स की निगरानी भी सेना के जवान करेंगे। दिल्ली हेडक्वार्टर से कमांड मिलने के बाद पासवर्ड के जरिए बॉक्स खोले जाएंगे। इस वीडियो में हम बात करेंगे कि नीट यूजी री एग्जाम को लेकर सरकार क्या बड़े बदलाव करने जा रही है। साथ ही सीबीएसई 12वीं के रिजल्ट और नई मार्किंग स्कीम को लेकर सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट ने क्या कहा है, इस पर भी चर्चा करेंगे।
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देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET UG के लिए 21 जून को एक बार फिर छात्र अपनी किस्मत आजमाएंगे। नेशनल टेस्टिंग एजेंसी यानी NTA की ओर से 3 मई को आयोजित की गई यह परीक्षा 13 मई को पेपर लीक के आरोपों के बाद रद्द कर दी गई थी। 565 शहरों में लगभग 5,400 परीक्षा केंद्रों पर आयोजित की गई इस परीक्षा को लीक-प्रूफ तरीके से दोबारा कराने की चुनौती अब सरकार के सामने है, क्योंकि बात सिर्फ पेपर लीक की नहीं बल्कि 22 लाख 80 हजार छात्रों के भविष्य की है। यही कारण है कि शिक्षा मंत्रालय ने इस परीक्षा को कराने के लिए एक अभेद्य किला तैयार किया है, जिसमें किसी भी तरह की सेंधमारी आसान नहीं होगी।
जानकारी के अनुसार शिक्षा मंत्रालय और NTA ने परीक्षा की सुरक्षा व्यवस्था में अब तक के सबसे बड़े बदलाव किए हैं। नीट यूजी री एग्जाम के लिए प्रश्नपत्र तैयार करने वाले विशेषज्ञों को पूरी तरह से बाहरी दुनिया से अलग कर दिया गया है। सूत्रों के अनुसार परीक्षा की गोपनीयता बनाए रखने के लिए प्रश्नपत्र तैयार करने वाले सभी विशेषज्ञों को आइसोलेशन में रखा गया है। पेपर सेट करने वाली टीम को फोन, इंटरनेट और सोशल मीडिया से दूर रखा गया है। 21 जून तक उन्हें अपने परिवार से भी बात करने की अनुमति नहीं दी जाएगी।
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देश के इतिहास में पहली बार किसी एंटरेंस एग्जाम में सेना की मदद ली जाएगी। नीट यूजी की सुरक्षा व्यवस्था को अभूतपूर्व स्तर तक मजबूत करने के लिए भारतीय वायुसेना की मदद ली जा रही है। वायुसेना के Mi-17 हेलीकॉप्टर्स और विमानों के जरिए देश के 18 संवेदनशील स्थानों पर प्रश्न पत्रों को सुरक्षित पहुंचाने का जिम्मा वायु सेना को दिया गया है। बीते दिनों रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के आवास पर हुई बैठक में यह प्रस्ताव रखा गया था और अब इसे मंजूरी मिल गई है।
आपको बता दें कि देश की किसी भी राष्ट्रीय प्रवेश परीक्षा के इतिहास में यह पहली बार होगा जब सैन्य बलों को इसके लॉजिस्टिक्स से जोड़ा जाएगा। शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का कहना है कि अब पेपर लीक या गड़बड़ी की कोई गुंजाइश नहीं छोड़ी जाएगी। सिर्फ सेना ही नहीं बल्कि गृह मंत्रालय, राज्य सरकारें, सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय, डाक विभाग, नागरिक उड्डयन मंत्रालय और विदेश मंत्रालय भी नीट री-परीक्षा को सुचारू रूप से संपन्न कराने में मदद करेंगे।
हर तरफ से हो रही निगरानी
इसके अलावा डिजिटल मोर्चे पर भी सरकार पूरी तरह सतर्क है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म, मैसेजिंग एप्स और ऑनलाइन फोरम्स पर 24 घंटे निगरानी रखी जा रही है। फर्जी प्रश्नपत्र, अफवाहें और भ्रामक सूचनाएं फैलाने वालों पर विशेष नजर रखी जा रही है। दरअसल पिछले कुछ समय से NEET परीक्षा को लेकर छात्रों और पैरेंट्स में भारी नाराजगी देखने को मिली है। पेपर लीक, गड़बड़ी और धांधली के आरोपों ने लाखों मेहनती छात्रों का भरोसा तोड़ा है। कई छात्र ऐसे हैं जिन्होंने दिन-रात मेहनत करके परीक्षा की तैयारी की, लेकिन विवादों के कारण उनका मनोबल टूट गया।
यही कारण है कि सरकार इस बार कोई रिस्क नहीं लेना चाहती। एक्सपर्ट्स को गुप्त जगह रखने और एयरफोर्स की मदद लेने का फैसला इसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। सरकार चाहती है कि छात्रों के मन में यह भरोसा वापस आए कि परीक्षा पूरी तरह निष्पक्ष और सुरक्षित होगी। हालांकि विपक्ष ने इस परीक्षा में सेना की मदद लिए जाने पर सरकार को घेरने की कोशिश की है। विपक्षी दलों का कहना है कि सेना देश की रक्षा के लिए होती है, न कि परीक्षाएं कराने के लिए।
चीन में भी होता है सेना का इस्तेमाल
आपको बता दें कि चीन में कॉलेज एडमिशन के लिए आयोजित की जाने वाली गाओकाओ परीक्षा और अमेरिका में होने वाले Medical College Admission Test भी इसी तरह के सुरक्षा प्रोटोकॉल में आयोजित किए जाते हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक चीन में गाओकाओ परीक्षा के प्रश्न पत्र शिक्षा मंत्रालय और National Administration of State Secrets Protection की निगरानी में जेलों के भीतर प्रिंट किए जाते हैं। जहां पेपर छपते हैं वहां 24 घंटे कैमरों और सुरक्षा एजेंसियों की निगरानी रहती है। यहां काम करने वाले कर्मचारियों को अलग-अलग स्थानों पर रखा जाता है और उनकी हर गतिविधि पर नजर रखी जाती है। यहां तक कहा जाता है कि गाओकाओ के प्रश्न पत्रों की सुरक्षा चीन में करेंसी से भी ज्यादा सख्त होती है।
प्रश्न पत्रों को एक जगह से दूसरी जगह ले जाया जाता है तो उनके साथ हथियारों से लैस गार्ड मौजूद रहते हैं। जिन वाहनों से पेपर परीक्षा केंद्रों तक पहुंचाए जाते हैं उनमें सैटेलाइट नेविगेशन और रिमोट मॉनिटरिंग सिस्टम लगे होते हैं। सबसे खास बात यह है कि इन वाहनों को चलाने वाले ड्राइवर भी आम लोग नहीं होते। इनमें एग्जाम अथॉरिटी के अधिकारी, पुलिस या मिलिट्री के लोग शामिल रहते हैं।
नीट यूजी फुलप्रूफ क्यों जरूरी
बता दें कि नीट यूजी छात्रों के लिए सिर्फ एक परीक्षा नहीं है। यह उनके सपनों, परिवार की उम्मीदों और कई साल की मेहनत से जुड़ा मामला है। देशभर में लाखों छात्र डॉक्टर बनने का सपना लेकर NEET की तैयारी करते हैं। कई छात्र छोटे शहरों और गांवों से आते हैं, जहां परिवार अपनी बचत खर्च करके, जमीन बेचकर और पाई-पाई जोड़कर अपने बच्चों को कोचिंग दिलाते हैं। ऐसे में जब परीक्षा पर सवाल उठते हैं तो सिर्फ एक एग्जाम नहीं बल्कि लाखों परिवारों का भरोसा भी टूटता है।
फिलहाल 21 जून को होने वाले NEET UG री-एग्जाम पर पूरे देश की नजर है। लाखों छात्र उम्मीद कर रहे हैं कि इस बार उनकी मेहनत के साथ कोई खिलवाड़ नहीं होगा। सरकार के लिए भी यह परीक्षा सिर्फ एक एग्जाम नहीं बल्कि भरोसा बचाने की सबसे बड़ी चुनौती बन चुकी है। दूध का जला छाछ भी फूंक-फूंक कर पीता है। सरकार भी इस री-एग्जाम में किसी भी स्तर पर गड़बड़ी की कोई गुंजाइश छोड़ना नहीं चाहती। यही वजह है कि नीट परीक्षा को लेकर हर मोर्चे पर मजबूत किलेबंदी की जा रही है।
CBSE की नई मार्किंग स्कीम का मामला हाईकोर्ट पहुंचा
NEET UG री-एग्जाम के अलावा केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड यानी CBSE की नई मार्किंग स्कीम OSM को लेकर विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। दिल्ली हाईकोर्ट ने सोमवार को CBSE और केंद्र सरकार को नोटिस जारी कर कक्षा 12 की उत्तर पुस्तिकाओं के ऑन-स्क्रीन मार्किंग सिस्टम में गड़बड़ी और तकनीकी खामियों का मामला उठाते हुए जवाब मांगा है। न्यायमूर्ति नीना बंसल और न्यायमूर्ति मधु जैन की खंडपीठ ने नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ इंडिया यानी NSUI की जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए नोटिस जारी किया।
कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 12 जून तय की है। बता दें कि NSUI ने याचिका दायर कर मांग की है कि जिन छात्रों की उत्तर पुस्तिकाएं गायब, धुंधली या गलत चेक हुई हैं, उन्हें ग्रेस मार्क्स दिए जाएं। OSM सिस्टम में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी, तकनीकी खामियों और शिकायतों की स्वतंत्र जांच हो। जहां छात्र स्कैन की गई कॉपियों या मूल्यांकन पर आपत्ति जताएं, वहां मैनुअल री-चेकिंग और फिजिकल वेरिफिकेशन हो। इसके अलावा NSUI की मांग है कि वेरिफिकेशन और री-इवैल्यूएशन पोर्टल को एक महीने के लिए और खुला रखा जाए।
सुप्रीम कोर्ट पहुंचा इंप्रूवमेंट परीक्षा का विषय
वहीं दूसरी ओर सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को सऊदी अरब में रहने वाले कक्षा 12 के एक छात्र की याचिका पर CBSE और उसके दुबई स्थित क्षेत्रीय अधिकारी को नोटिस जारी किया है। सऊदी अरब में रहने वाले भारतीय छात्र प्रणसू कुमार पटेल की याचिका पर सुनवाई करते हुए देश की सर्वोच्च अदालत ने CBSE को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। छात्र का आरोप था कि 12वीं की इंप्रूवमेंट परीक्षा में शामिल होने के बावजूद बोर्ड ने उसका रिजल्ट जारी नहीं किया। रिजल्ट चेक करने पर उसे बिना अंकों वाली खाली मार्कशीट दे दी गई। अब कोर्ट ने छात्र के भविष्य और इस मामले की गंभीरता को देखते हुए बोर्ड को तत्काल कदम उठाने के निर्देश दिए हैं।
CBSE को नोटिस जारी करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले की अगली सुनवाई की तारीख 12 जून 2026 तय की है। इस दिन CBSE को कोर्ट के सामने बताना होगा कि उसने छात्र के रिजल्ट को लेकर क्या कदम उठाए हैं, क्यों रिजल्ट में छात्रों को खाली मार्कशीट दी गई है और इन खामियों को सुधारने के लिए उसका क्या प्लान है।