NEET UG Exam 2026: नीट यूजी परीक्षा कराने वाली संस्था एनटीए यानी नेशनल टेस्टिंग एजेंसी ने भारत सरकार से सलाह के बाद इसे रद्द कर दिया है। मेडिकल कॉलेजों में एडमिशन के लिए दी जाने वाली यह प्रवेश परीक्षा 3 मई को देश के 551 शहरों और 14 देशों में आयोजित की गई थी। पेन पेपर मोड में हुई इस परीक्षा में तकरीबन 22 लाख 80 हजार छात्र शामिल हुए थे। शुक्रवार सुबह NTA ने नीट यूजी परीक्षा की नई डेट भी जारी कर दी। 21 जून को अब यह परीक्षा दोबारा आयोजित की जाएगी। 21 जून को प्रस्तावित परीक्षा को लेकर लाखों छात्रों और अभिभावकों के बीच चिंता और दबाव का माहौल बना हुआ है। पिछले वर्षों में पेपर लीक और परीक्षा में गड़बड़ियों के आरोपों के बाद इस बार राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) के सामने सबसे बड़ी चुनौती परीक्षा को पूरी तरह “लीक प्रूफ” और पारदर्शी तरीके से आयोजित कराने की है।
Neet UG 2026 Leak Proof exam: नीट यूजी
परीक्षा की नई तारीख घोषित होने के बाद छात्रों पर दोबारा तैयारी का मानसिक दबाव भी बढ़ गया है। कई अभ्यर्थियों का कहना है कि उन्होंने पहले की परीक्षा के अनुसार अपनी तैयारी पूरी कर ली थी, लेकिन अब अतिरिक्त दिनों तक लगातार पढ़ाई और तनाव झेलना आसान नहीं है। खासकर वे छात्र जो कोचिंग हब से दूर ग्रामीण क्षेत्रों में रहकर तैयारी कर रहे हैं, उनके लिए यह स्थिति और चुनौतीपूर्ण बन गई है। छात्रों और अभिभावकों की सबसे बड़ी मांग यही है कि इस बार परीक्षा प्रक्रिया पूरी तरह सुरक्षित और निष्पक्ष हो। Times Now Navbharat से बातचीत में पटना की छात्रा ज्योत्सना कुमारी ने बताया कि उनका नीट यूजी का एग्जाम काफी अच्छा गया था। पैरेंट्स खुश थे लेकिन जब पता चला कि पेपर रद्द हो गया है कि पूरे परिवार को जैसे सदमा लगा। हालांकि पैरेंट्स ने समझाया कि कोई बात नहीं, क्लास स्टार्ट फिर से करो और तैयारी में जुट जाओ। हालांकि ज्योत्सना कुमारी का कहना है कि दोबारा तैयारी अब उस मोटिवेशन के साथ नहीं हो पा रही है जिसके साथ पहली बार नीट यूजी का एग्जाम दिया गया था। मन में एक सवाल बार बार आ रहा है कि क्या गारंटी है कि फिर से एनटीए लीक प्रूफ एग्जाम करा पाएगा? क्या फिर नीट परीक्षा लीक नहीं होगी?
नीट यूजी री एग्जाम को लेकर क्या बोले छात्र
दोबारा पेपर कराने को लेकर क्या बोले छात्र
वहीं एक नोएडा की एक दूसरी छात्रा खुशी का कहना है पेपर काफी अच्छा गया था लेकिन लीक होने और रद्द होने से मनोबल गिर गया है। छात्र का कहना है कि वह तैयारी तो कर रहे हैं लेकिन मन में काफी निराशा है। वहीं पेपर रद्द होने से एक बार की मेहनत तो पानी में चली गई। छात्रा ने बातचीत में अपना दुख बताया। उसने कहा कि खेलना, कूदना, घूमना, फिर ना सब छूट गया था, बस आंखों में सपना था कि सरकारी मेडिकल कॉलेज में दाखिला मिल जाए लेकिन अब दोबारा एग्जाम देना होगा। छात्रा ने सवाल उठाया कि दोबारा पेपर लीक नहीं होगा, क्या गारंटी है?
क्या कहते हैं शिक्षा जगत के विशेषज्ञ
विशेषज्ञों का मानना है कि केवल परीक्षा केंद्रों पर सख्ती बढ़ाने से समस्या का समाधान नहीं होगा, बल्कि प्रश्नपत्र प्रिंटिंग, ट्रांसपोर्टेशन और डिजिटल सुरक्षा तक हर स्तर पर निगरानी मजबूत करनी होगी। 20 वर्षों से IIT, NEET और बोर्ड परीक्षा के छात्रों को कोचिंग दे रहे अमित दीक्षित (M-tech, IIT-DELHI/GATE- AIR 1) ने टाइम्स नाउ नवभारत से बातचीत करते हुए बताया कि दोबारा लीक प्रूफ पेपर कराने में कई चुनौतियां हैं। अगर एनटीए चाहता है कि दोबारा पेपर लीक ना हो तो कई उपाय अपनाने होंगे। इसके लिए पेपर के लिफाफे पर सील लगने से लेकर सील खुलने तक की वीडियोग्राफी जरूरी है। इसके अलावा सेंटर्स के सीसीटीवी कैमरो की एक कंट्रोल रूम से मॉनीटिरंग होनी चाहिए।
शिक्षा विशेषज्ञों का क्या कहना है?
उन्होंने Times Now Navbharat को बताया कि पेपर लीक होने की संभावना कहां से सर्वाधिक होती है। उनके अनुसार, पेपर जहां तैयार होता है उसमें वरिष्ठ प्रोफेसर्स एक टीम होती है। यह प्रोफेसर अपने अपने प्रश्न देते हैं और उन प्रश्नों को मिला जुलाकर पेपर के सेट तैयार होते हैं। प्रोफेसर्स द्वारा दिए गए सवालों में से कितने सवाल पेपर में आएंगे इसकी जानकारी किसी को नहीं होती है। कई बार यहां से उन प्रश्नों को बाहर बताने की संभावना रहती है। वहीं पेपर लीक करने की जो सबसे ज्यादा संभावना रहती है वो हैं सेंटर्स। दरअसल, पेन पेपर मोड में होने वाले एग्जाम्स के लिए पेपर की कॉपीज 24 से 48 घंटे पहले सेंटर पर पहुंचानी होती है। यहां से पेपर लीक की गुंजाइश ज्यादा होती है। एनटीए को चाहिए इन प्वाइंट्स पर सर्विलांस और सिक्योरिटी टाइट की जाए।
एग्जाम की फुल प्रूफ सिक्योरिटी
शिक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि NEET जैसी राष्ट्रीय परीक्षा में पारदर्शिता बनाए रखना बेहद जरूरी है, क्योंकि इसका सीधा असर लाखों छात्रों के भविष्य पर पड़ता है। यदि परीक्षा प्रक्रिया पर भरोसा कमजोर होता है तो छात्रों का मनोबल भी प्रभावित होता है। जानकारी के अनुसार, NTA इस बार कई नए सुरक्षा उपाय लागू कर सकता है। परीक्षा केंद्रों पर बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन, AI आधारित निगरानी, लाइव मॉनिटरिंग और प्रश्नपत्र वितरण की डिजिटल ट्रैकिंग जैसे कदमों पर काम किया जा रहा है। इसके अलावा संवेदनशील जिलों में अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात किए जाने की भी संभावना है।
NEET UG परीक्षा देशभर के मेडिकल कॉलेजों में MBBS, BDS और अन्य मेडिकल कोर्सों में प्रवेश के लिए आयोजित की जाती है। हर साल लाखों छात्र इस परीक्षा में शामिल होते हैं। लेकिन हाल के वर्षों में पेपर लीक और अनियमितताओं के आरोपों ने परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। यही वजह है कि इस बार परीक्षा को लेकर सरकार, एजेंसियों और छात्रों की नजरें बेहद संवेदनशील बनी हुई हैं।
अब 21 जून की परीक्षा केवल मेडिकल प्रवेश परीक्षा नहीं रह गई है, बल्कि यह NTA की विश्वसनीयता और परीक्षा प्रणाली पर जनता के भरोसे की भी बड़ी परीक्षा बन गई है। बता दें कि एनटीए भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय के तहत एक स्वायत्त, स्वतंत्र और आत्मनिर्भर परीक्षा आयोजित करने वाली संस्था है। इसकी स्थापना नवंबर 2017 में हुई थी। यह नीट-यूजी, जेईई-मेन्स और यूजीसी-नेट जैसी राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाएं आयोजित करती है। इसकी स्थापना सोसाइटी पंजीकरण अधिनियम 1860 के तहत की गई थी। इस एजेंसी में चेयरपर्सन, महानिदेशक के साथ कई अन्य लोग भी होते हैं। इसके अलावा कई संस्थानों के निदेशक और कुछ यूनिवर्सिटीज के कुलपति भी एनटीए की गवर्निंग बॉडी में आते हैं। इस समय जेएनयू की वाइस चांसलर भी एनटीए की गवर्निंग बॉडी में है।
