क्या NEET परीक्षा का पूरा सिस्टम बदलने वाला है? क्या आने वाले समय में NEET-UG एक ही दिन नहीं, बल्कि कई चरणों में आयोजित होगी? क्या परीक्षा कराने वाली एजेंसी NTA को नए अधिकार और कानूनी ताकत मिलने वाली है? और क्या पेपर लीक विवाद के बाद अब देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा में बड़े सुधारों की शुरुआत हो चुकी है? संसद की एक महत्वपूर्ण समिति ने ऐसे सुझाव दिए हैं, जो NEET परीक्षा के स्वरूप, आयोजन और भविष्य की दिशा को पूरी तरह बदल सकते हैं। अगर ये सिफारिशें लागू होती हैं तो संभव है कि आने वाले वर्षों में NEET देशभर में एक ही दिन नहीं, बल्कि कई चरणों में आयोजित हो। साथ ही परीक्षा कराने वाली एजेंसी NTA को भी नए अधिकार और कानूनी दर्जा मिल सकता है।
गुरुवार को संसद भवन में नीट यूजी परीक्षा के भविष्य को लेकर एक हाईप्रोफाइल बैठक हुई। इस दौरान नीट परीक्षा के पूरे सिस्टम को सुधारने पर चर्चा की गई। जिस परीक्षा पर हर साल लाखों मेडिकल छात्रों का भविष्य टिका होता है, उसकी पूरी व्यवस्था आने वाले समय में बदल सकती है। संसद भवन में शिक्षा, महिला एवं बाल विकास से जुड़ी संसदीय स्थायी समिति की अहम बैठक हुई। कांग्रेस सांसद मुकुल वासनिक की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में शिक्षा मंत्रालय और नेशनल टेस्टिंग एजेंसी यानी NTA के वरिष्ठ अधिकारियों ने हिस्सा लिया। बैठक में NTA के महानिदेशक अभिषेक सिंह, उच्च शिक्षा सचिव विनीत जोशी और परीक्षा सुधारों के लिए गठित हाई-पावर्ड कमेटी के अध्यक्ष और पूर्व इसरो प्रमुख डॉ. के. राधाकृष्णन भी मौजूद रहे।
बैठक का सबसे बड़ा मुद्दा था NEET-UG परीक्षा व्यवस्था में सुधार। समिति के कई सदस्यों ने सुझाव दिया कि देशभर में एक ही दिन परीक्षा कराने के बजाय इसे कई चरणों में आयोजित करने पर विचार किया जाना चाहिए। उनका तर्क था कि UPSC समेत कई बड़ी परीक्षाएं अलग-अलग चरणों में होती हैं। ऐसे में NEET जैसी विशाल परीक्षा को भी चरणबद्ध तरीके से आयोजित किया जा सकता है। इससे एक ही दिन करोड़ों अभ्यर्थियों के लिए परीक्षा कराने का दबाव कम होगा और सुरक्षा व्यवस्था को भी बेहतर बनाया जा सकेगा।
हालांकि NTA ने इस सुझाव पर अपनी सीमाएं भी बताईं। अधिकारियों ने कहा कि NEET परीक्षा का नोडल मंत्रालय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय है। इसलिए परीक्षा के प्रारूप में किसी भी बड़े बदलाव का अंतिम फैसला उसी मंत्रालय को करना होगा। लेकिन इतना साफ है कि अब NEET के मौजूदा स्वरूप पर गंभीर स्तर पर चर्चा शुरू हो चुकी है।
NTA के ढांचे को लेकर सवाल
समिति के कई सदस्यों ने NTA का जो ढांचा है और उसके अधिकारों पर भी सवाल उठाए। भविष्य में इतनी बड़ी परीक्षाओं को पूरी तरह सुरक्षित और पारदर्शी तरीके से कराने के लिए NTA को और मजबूत कैसे बनाया जाएगा, इस पर भी चर्चा की गई। बैठक में यह सुझाव दिया गया कि NTA को वैधानिक यानी कानूनी दर्जा दिया जाए ताकि उसे ज्यादा अधिकार मिल सकें। फिलहाल NTA एक स्वायत्त संस्था के रूप में काम करती है और उसका संचालन सोसायटी पंजीकरण अधिनियम 1860 के तहत होता है। लेकिन समिति का मानना है कि भविष्य की चुनौतियों को देखते हुए एजेंसी को और सशक्त बनाने की जरूरत है।
अलग अलग एग्जाम का सुझाव
बैठक में एक और महत्वपूर्ण सुझाव सामने आया। कुछ सांसदों ने कहा कि MBBS, AYUSH और नर्सिंग जैसे अलग-अलग पाठ्यक्रमों के लिए अलग-अलग प्रवेश परीक्षाएं आयोजित कराने पर विचार होना चाहिए। उनका मानना था कि एक ही परीक्षा में सभी को शामिल करने से उम्मीदवारों की संख्या बहुत अधिक हो जाती है और व्यवस्था पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है। हालांकि NTA ने इस प्रस्ताव को फिलहाल व्यावहारिक नहीं माना। एजेंसी का कहना था कि वर्तमान व्यवस्था में सभी पाठ्यक्रमों में प्रवेश NEET स्कोर के आधार पर होता है, इसलिए अलग-अलग परीक्षाएं आयोजित करना आसान नहीं होगा।
21 जून को हुई परीक्षा की समीक्षा
इस दौरान 21 जून को आयोजित NEET-UG 2026 री-एग्जाम की भी समीक्षा की गई। समिति ने परीक्षा के दौरान अपनाई गई सुरक्षा व्यवस्थाओं की भी सराहना की। NTA ने बताया कि परीक्षा को सुरक्षित बनाने के लिए कई विशेष कदम उठाए गए थे। टेलीग्राम पर अस्थायी रोक लगाई गई। वॉट्सऐप की निगरानी की गई। सर्विलांस को मजबूत किया गया। सेना से लेकर देश के अलग-अलग मंत्रालयों की मदद ली गई। प्रश्नपत्र के डिजाइन में बदलाव किए गए और पेपर लीक एवं नकल रोकने के लिए AI कैमरे और जैमर का इस्तेमाल किया गया। समिति के सदस्यों ने माना कि हालिया परीक्षा में सुरक्षा व्यवस्था पहले की तुलना में काफी मजबूत दिखाई दी। लेकिन इसके साथ ही भविष्य की चुनौतियों को लेकर भी कई सवाल उठाए गए।
CBT मोड लागू करने पर हुई चर्चा
इस पूरी चर्चा के बीच परीक्षा सुधारों के लिए गठित हाई-पावर्ड कमेटी के अध्यक्ष डॉ. के. राधाकृष्णन ने महत्वपूर्ण जानकारी दी। उन्होंने बताया कि कमेटी की सिफारिशों को स्टेप बाय स्टेप लागू किया जा रहा है। हालांकि अभी इसके लिए कोई निश्चित समयसीमा तय नहीं की गई है। लेकिन आने वाले समय में NEET और अन्य राष्ट्रीय परीक्षाओं में कई और बदलाव देखने को मिल सकते हैं। इसी क्रम में अगले साल से प्रस्तावित कंप्यूटर आधारित परीक्षा यानी CBT मोड पर भी चर्चा हुई। समिति के कई सदस्यों ने चिंता जताई कि अभी देश के सभी हिस्सों में समान डिजिटल ढांचा उपलब्ध नहीं है। खासकर ग्रामीण और वंचित वर्ग के छात्रों को तकनीकी सुविधाओं की कमी का सामना करना पड़ सकता है। इसलिए CBT लागू करने से पहले पूरे देश में पर्याप्त तैयारी और संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित करनी होगी।
बैठक में छात्रों की व्यावहारिक समस्याओं पर भी बात हुई। कई सदस्यों ने उन घटनाओं का जिक्र किया, जिनमें कुछ छात्र परीक्षा केंद्र पर कुछ मिनट देर से पहुंचने के कारण परीक्षा देने से वंचित रह गए। समिति ने सुझाव दिया कि ऐसे मामलों में मानवीय दृष्टिकोण अपनाने की संभावनाओं पर भी विचार किया जाना चाहिए। छात्र एक परीक्षा के लिए कई साल मेहनत करते हैं, ऐसे में 5 या 10 मिनट की देरी की वजह से परीक्षा छूट जाना दुखद है। अब लाखों छात्रों की नजर सरकार के अगले फैसले पर टिकी हुई है। क्या NEET कई चरणों में होगी? क्या NTA को कानूनी दर्जा मिलेगा? क्या CBT मोड लागू होगा? और क्या पेपर लीक जैसी घटनाओं को रोकने के लिए नए नियम बनाए जाएंगे?
देखना होगा कि संसदीय समिति की इन सिफारिशों पर सरकार क्या फैसला लेती है। क्योंकि जो निर्णय यहां से निकलेंगे, उनका असर सिर्फ लाखों मेडिकल अभ्यर्थियों पर नहीं, बल्कि देश की पूरी परीक्षा व्यवस्था और शिक्षा व्यवस्था के भविष्य पर पड़ने वाला है।