NCERT Includes Northeast History: देश के अलग-अलग हिस्सों की संस्कृति, परंपरा और इतिहास को बच्चों तक पहुंचाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया गया है। केंद्र सरकार ने राज्यसभा में जानकारी दी है कि कक्षा 1 से 8 तक की नई NCERT की किताबों में अब पूर्वोत्तर भारत के राज्यों का इतिहास, संस्कृति, कला, विरासत और उनके योगदान को भी शामिल किया गया है। सरकार का कहना है कि इस बदलाव का मकसद देशभर के बच्चों को पूर्वोत्तर भारत के बारे में सही और पूरी जानकारी देना है, ताकि वे इस क्षेत्र की पहचान, परंपराओं और लोगों को बेहतर तरीके से समझ सकें। यह बदलाव राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 और राष्ट्रीय पाठ्यचर्या रूपरेखा (NCF) 2023 के तहत किया गया है।
Northeast History in NCERT (image - chatGPT)
अब तक कई छात्र पूर्वोत्तर भारत के इतिहास और संस्कृति के बारे में बहुत कम जानते थे। नई किताबों में इस क्षेत्र की जानकारी शामिल होने से बच्चों को भारत की विविधता को करीब से समझने का मौका मिलेगा। सरकार का मानना है कि शिक्षा केवल कुछ राज्यों तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि देश के हर हिस्से की संस्कृति, इतिहास और परंपरा को भी बराबर जगह मिलनी चाहिए।
नई किताबों में बच्चों को पूर्वोत्तर राज्यों की कला, लोक परंपराएं, जनजातीय ज्ञान, स्थानीय इतिहास और वहां के समाज के बारे में भी जानकारी मिलेगी। इससे छात्रों में देश के अलग-अलग हिस्सों के प्रति सम्मान और समझ बढ़ेगी।
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भाषा और संस्कृति पर भी दिया गया जोर
सरकार ने बताया कि NCERT ने भाषाई विविधता को भी ध्यान में रखते हुए कई नई अध्ययन सामग्री तैयार की है। कक्षा 6 और कक्षा 9 के लिए 22 भारतीय भाषाओं में सामग्री तैयार की गई है। इसमें असमिया, बोडो और मणिपुरी जैसी भाषाओं को भी शामिल किया गया है।
इसके अलावा नई Curriculum तैयार करने से पहले देशभर के राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों, खासकर पूर्वोत्तर राज्यों के शिक्षकों और विशेषज्ञों से सुझाव लिए गए। इस क्षेत्र के शिक्षा विशेषज्ञों और विद्वानों को भी पाठ्यक्रम तैयार करने वाली समितियों में शामिल किया गया।
छात्रों को क्या होगा फायदा?
इस पहल से छात्रों को भारत की सांस्कृतिक विविधता को समझने का बेहतर अवसर मिलेगा। वे सिर्फ किताबों में पढ़ाई तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि देश के अलग-अलग हिस्सों की परंपराओं, भाषाओं और जीवनशैली के बारे में भी जान सकेंगे। इससे बच्चों में एकता, आपसी सम्मान और भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को समझने की सोच और मजबूत होगी।
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