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BIMCC 2026: बेनेट यूनिवर्सिटी में 'ग्लोबल ट्रेड डिप्लोमेसी' पर मंथन, जस्टिस राजेश बिंदल ने छात्रों को दिया सफलता का मंत्र

Bennett University BIMCC 2026: CTIL– बेनेट इंटरनेशनल मूट कोर्ट कॉम्पिटिशन (BIMCC) 2026 का थर्ड एडिशन का उद्घाटन किया गया और कार्यक्रम 6 से 8 फरवरी तक चला, जिसमें जस्टिस मुख्य अतिथि के तौर पर भारत के सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश माननीय श्री न्यायमूर्ति राजेश बिंदल आमंत्रित किया गया था। उनका भाषण कार्यक्रमा का मुख्य आकर्षण बना।

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बेनेट यूनिवर्सिटी में 'ग्लोबल ट्रेड डिप्लोमेसी' पर मंथन

Bennett University BIMCC 2026: इस सप्ताह बेनेट यूनिवर्सिटी में ग्लोबल ट्रेड डिप्लोमेसी का भविष्य चर्चा का मुख्य विषय रहा। और यहां CTIL– बेनेट इंटरनेशनल मूट कोर्ट कॉम्पिटिशन (BIMCC) 2026 के तीसरे संस्करण यानी थर्ड एडिशन का औपचारिक उद्घाटन हुआ। 6 से 8 फरवरी तक आयोजित इस प्रतिष्ठित कार्यक्रम में, इंटरनेशनल ट्रेड लॉ की जटिलताओं को समझने और उनमें दक्षता प्राप्त करने के इच्छुक लॉ छात्रों के लिए एक महत्वपूर्ण मंच बन चुकी है। आयोजित हुए इस उद्घाटन समारोह में देश विदेश से आए लॉ क्षेत्र के प्रतिष्ठित कानूनी दिग्गजों, अकादमिक विद्वानों तथा महत्वाकांक्षी लॉ स्टूडेंट्स का जमावड़ा देखने को मिला।

सर्वोच्च न्यायालय का दृष्टिकोण - “अधिकारों से पहले कर्तव्य”

उद्घाटन समारोह का मुख्य आकर्षण कार्यक्रम के मुख्य अतिथि भारत के सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश माननीय श्री न्यायमूर्ति राजेश बिंदल का मुख्य भाषण रहा। ऐसी दुनिया में, जहां अक्सर व्यक्तिगत अधिकारों पर लोगों का ध्यान केंद्रित रहता है, वहां जस्टिस बिंदल ने एक गहन दार्शनिक दृष्टिकोण छात्रों के सामने पेश किया।

जस्टिस बिंदल ने कहा, “जब कर्तव्यों का ईमानदारी से पालन किया जाता है, तो अधिकार अपने आप मिल जाते हैं।” उन्होंने वकीलों की अगली पीढ़ी से आग्रह किया कि वे अपने प्रैक्टिस को मौलिक कर्तव्यों पर आधारित रखें।

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बेनेट यूनिवर्सिटी में 'ग्लोबल ट्रेड डिप्लोमेसी' पर मंथन

महत्वपूर्ण विषयों पर की चर्चा

न्यायमूर्ति बिंदल का संबोधन पारंपरिक कानूनी सलाह से कहीं आगे था। इसमें उन्होंने डिजिटल न्याय क्रांति, वकालत की नैतिकता जैसे कई महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा की:

डिजिटल न्यायिक क्रांति: भारतीय न्याय प्रणाली में ई कोर्ट्स, वर्चुअल सुनवाई तथा कागज़ रहित कार्यप्रणाली के तीव्र समावेशन पर उनके विचार।

क्लिनिकल उत्कृष्टता: “क्लिनिकल विधिक शिक्षा” की आवश्यकता पर बल, जिसमें छात्र केवल पुस्तकीय ज्ञान तक सीमित न रहकर व्यावहारिक अनुभव के माध्यम से सीखते हैं।

अधिवक्ता नैतिकता: निरर्थक वाद विवाद पर अंकुश लगाने तथा न्याय व्यवस्था में जनता के विश्वास को पुनर्स्थापित करने हेतु “सामाजिक रूप से प्रासंगिक विधिक कार्य” को प्राथमिकता देने का स्पष्ट और आशावादी आह्वान।

एक सशक्त अकादमिक सहयोग

BIMCC 2026 केवल एक यूनिवर्सिटी इवेंट नहीं है, बल्कि यह एक ग्लोबल अकादमिक मंच के रूप में उभर चुका है। इस साल कॉम्पिटिशन का आयोजन स्कूल ऑफ लॉ, बेनेट यूनिवर्सिटी द्वारा निम्नलिखित प्रतिष्ठित संस्थानों के रणनीतिक सहयोग से किया गया है:

· सेंटर फॉर ट्रेड एंड इन्वेस्टमेंट लॉ (CTIL)

· इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ फॉरेन ट्रेड (IIFT)

· इंडिया चेयर – WTO चेयर्स प्रोग्राम

इस अवसर पर अजय बंसल (पूर्व अतिरिक्त महाधिवक्ता, पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय) की उपस्थिति तथा CTIL के प्रतिनिधियों ऋधेश राजवंशी और शाना शर्मा की सहभागिता ने प्रतियोगिता की पेशेवर गंभीरता और अकादमिक गहराई को और रेखांकित किया।

TNN Education Desk
TNN एजुकेशन डेस्क author

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