एचएस फाउंडेशन ने ब्लॉकचेन फॉर इम्पैक्ट (BFI) के सहयोग से आईआईटी दिल्ली के FITT में एक स्पेशल रिसर्च और इनोवेशन क्षमता-विकास कार्यक्रम का आयोजन किया। इस कार्यक्रम का उद्देश्य भारत के टियर-2 और टियर-3 जिलों में नवाचार के माहौल को मजबूत करना था। यह देश के सबसे बड़े फैकल्टी-केंद्रित और शोध-आधारित कार्यशालाओं में से एक रहा। इस कार्यक्रम में 35 शैक्षणिक संस्थानों के 63 फैकल्टी सदस्यों ने भाग लिया। ये प्रतिभागी भारत के 25 टियर-2 और टियर-3 जिलों से आए थे। इसमें इंजीनियरिंग, मेडिकल, आयुर्वेद, पशु चिकित्सा, कानून और प्रबंधन जैसे अलग-अलग क्षेत्रों के कॉलेज शामिल थे। फैकल्टी सदस्य लखनऊ, मेरठ, मथुरा, मुरादाबाद, सहारनपुर और बुलंदशहर जैसे शहरों के साथ-साथ दिल्ली एनसीआर के संस्थानों से भी आए थे।
IIT Delhi
यह कार्यक्रम इस तरह तैयार किया गया था कि फैकल्टी के माध्यम से 1.35 लाख से अधिक स्नातक और स्नातकोत्तर छात्रों तक पहुँच बनाई जा सके। यह एक अनोखा आयोजन रहा, जिसमें इन संस्थानों की भागीदारी राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और विश्व हिंदू परिषद के सदस्यों के सहयोग से संभव हो पाई।
इस पहल का मुख्य उद्देश्य भाग लेने वाले कॉलेजों में कार्यशील इनक्यूबेशन सेल (नवाचार केंद्र) स्थापित करना था, ताकि फैकल्टी सदस्य नवाचार का नेतृत्व कर सकें, अकादमिक शोध को व्यावहारिक समाधान में बदल सकें और छात्रों को उद्यमिता के लिए मार्गदर्शन दे सकें। फैकल्टी की दीर्घकालिक भूमिका को समझते हुए, ब्लॉकचेन फॉर इम्पैक्ट (BFI) ने एचएस फाउंडेशन के उस प्रस्ताव का समर्थन किया जिसमें अल्पकालिक गतिविधियों की बजाय संस्थान-स्तर पर क्षमता निर्माण पर ध्यान दिया गया।
आईआईटी दिल्ली के नवाचार और तकनीक हस्तांतरण परिवेश में आयोजित इस तीन दिवसीय आवासीय कार्यक्रम में प्रतिभागियों को वास्तविक समस्याओं की पहचान, फैकल्टी-आधारित उद्यमिता, फंडिंग और इनक्यूबेशन के रास्ते, बौद्धिक संपदा प्रबंधन और तकनीक ट्रांसफर जैसे विषयों पर प्रशिक्षण दिया गया। इसके साथ ही व्यावहारिक अभ्यास और आइडिया पिचिंग सत्र भी आयोजित किए गए।
कार्यक्रम के तहत FITT–आईआईटी दिल्ली ने भाग लेने वाले संस्थानों को आगे भी मार्गदर्शन और मेंटरशिप देने का आश्वासन दिया, ताकि वे अपने इनक्यूबेशन सेल को प्रभावी रूप से शुरू कर सकें। इस पहल पर टिप्पणी करते हुए, एचएस फाउंडेशन के मैनेजिंग ट्रस्टी आशीष धर द्विवेदी ने कहा, “भारत में नवाचार को कुछ बड़े शहरों तक सीमित नहीं रहना चाहिए। अलग-अलग क्षेत्रों और विषयों के फैकल्टी को सशक्त बनाकर हम उत्तर प्रदेश में शोध और उद्यमिता के लिए मजबूत आधार तैयार कर रहे हैं।”
FITT–आईआईटी दिल्ली के निदेशक निखिल अग्रवाल ने कहा, “दीर्घकालिक शोध को व्यवहार में लाने के लिए फैकल्टी-प्रेरित नवाचार बेहद जरूरी है। इस कार्यक्रम के माध्यम से आईआईटी दिल्ली क्षेत्रीय संस्थानों को मजबूत इनक्यूबेशन और नवाचार क्षमताएं विकसित करने में सहयोग देने के लिए प्रतिबद्ध है।" यह पहल राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर शोध, नवाचार और उद्यमिता को सभी तक पहुँचाने के प्रयासों के लिए एक दोहराने योग्य मॉडल के रूप में देखी जा रही है।
