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ना भाषा की बाध्यता, ना बोर्ड परीक्षा का दवाब..., CBSE की थ्री-लैंग्वेज पॉलिसी हुई आसान?, लेकिन इन 5 सवालों के जवाब मिलना बाकी

Explained CBSE three language policy : सीबीएसई ने थ्री-लैंग्वेज पॉलिसी को लेकर उठी चिंताओं के बीच स्कूलों और छात्रों को राहत देने वाला स्पष्टीकरण जारी किया है। बोर्ड ने साफ किया है कि नई शिक्षा नीति के तहत भाषा संबंधी प्रावधानों को लागू करते समय छात्रों पर किसी विशेष भाषा को थोपने का उद्देश्य नहीं है।

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सीबीएसई थ्री लैंग्वेज पॉलिसी को लेकर 5 सवालों के जवाब मिलना बाकी
Authored by: Kuldeep Raghav
Updated Jun 30, 2026, 15:00 IST
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Explained CBSE three language policy : केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने हाल ही में थ्री-लैंग्वेज पॉलिसी को लेकर उठी चिंताओं के बीच स्कूलों और छात्रों को राहत देने वाला स्पष्टीकरण जारी किया है। बोर्ड ने साफ किया है कि नई शिक्षा नीति (NEP 2020) के तहत भाषा संबंधी प्रावधानों को लागू करते समय छात्रों पर किसी विशेष भाषा को थोपने का उद्देश्य नहीं है। इसके बावजूद देशभर में अभिभावकों, छात्रों और शिक्षाविदों के बीच कई सवाल अब भी बने हुए हैं। बोर्ड ने सोमवार को त्रि-भाषा नीति को लेकर गाइडलाइंस जारी की हैं। इसके अनुसार दसवीं के शैक्षणिक सत्र-2026-27 पर नई त्रि-भाषा नीति लागू नहीं होगी। तस्वीर साफ है कि दसवीं के मौजूदा बैच को तीन भाषाएं पढ़ने से छूट दे दी गई है। वह दो भाषाओं के साथ ही अपनी पढ़ाई जारी रख सकेंगे।

सीबीएसई के अनुसार शैक्षणिक सत्र 2026-27 में सातवीं से नौवीं कक्षा में पढ़ाई कर रहे छात्रों को दो विदेशी भाषाओं के साथ एक भारतीय भाषा पढ़ने की अनुमति दी गई है। सीबीएसई की अकादमिक निदेशक की ओर से जारी गाइडलाइंस में कहा गया है कि सातवीं से नौवीं के मौजूदा बैच के छात्रों को तीन भाषाएं पढ़नी होंगी, यदि वह अभी दो विदेशी भाषाएं पढ़ रहे हैं तो उन्हें एक अतिरिक्त भारतीय भाषा लेना अनिवार्य होगा। बाद में तीन भाषाओं में से कम से कम दो भारतीय भाषाएं पढ़ना जरूरी है, जबकि तीसरी भाषा के रूप में अग्रेंजी, फ्रेंच, जर्मन, अरबी और स्पेनिश जैसी भाषाओं में से किसी एक का चयन कर सकते हैं। यह व्यवस्था इस बैच के दसवीं में आने तक चलती रहेगी।

क्यों लाई गई थ्री लैंग्वेज पॉलिसी

दरअसल, नई शिक्षा नीति में छात्रों को तीन भाषाएं सीखने का प्रावधान रखा गया है। इसका उद्देश्य भाषाई विविधता को बढ़ावा देना और छात्रों की बहुभाषी क्षमता विकसित करना है। हालांकि, जैसे ही विभिन्न राज्यों में इसके क्रियान्वयन को लेकर चर्चा तेज हुई, कई तरह की आशंकाएं सामने आने लगीं। कुछ लोगों ने इसे हिंदी या किसी अन्य भाषा को अनिवार्य बनाने के प्रयास के रूप में देखा, जबकि कई राज्यों ने अपनी भाषाई पहचान और शिक्षा व्यवस्था को लेकर चिंता जताई।

सीबीएसई थ्री लैंग्वेज फॉर्मूला

सीबीएसई थ्री लैंग्वेज फॉर्मूला

पैरेंट्स की चिंता बढ़ाने वाले सवाल

CBSE के ताजा स्पष्टीकरण के बाद यह स्पष्ट हुआ है कि विद्यार्थियों को उपलब्ध विकल्पों के अनुसार भाषाओं का चयन करने की सुविधा दी जाएगी। बोर्ड ने यह भी संकेत दिया है कि राज्यों और स्कूलों की व्यावहारिक परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए लचीलापन बरता जाएगा। फिर भी कुछ महत्वपूर्ण प्रश्न ऐसे हैं, जिन पर अब तक पूरी स्पष्टता नहीं मिल सकी है। महाराजा अग्रसेन पब्लिक स्कूल, बुलंदशहर के प्रधानाचार्य नरेंद्र मित्तल से बातचीत में इन सवालों जवाब जानने की कोशिश की गई।

1. क्या किसी विशेष भाषा को अनिवार्य बनाया जाएगा?

सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या भविष्य में किसी एक भाषा को सभी छात्रों के लिए अनिवार्य किया जाएगा। CBSE ने फिलहाल ऐसी किसी बाध्यता से इनकार किया है, लेकिन विस्तृत दिशा-निर्देश आने का इंतजार है। बोर्ड के अनुसार नई भाषा नीति का उद्देश्य छात्रों में भारतीय भाषाओं के प्रति रुचि विकसित करना और बहुभाषी दक्षता को बढ़ावा देना है।

2. छोटे और ग्रामीण स्कूलों में व्यवस्था कैसे होगी?

देश के हजारों स्कूलों में पहले से ही भाषा शिक्षकों की कमी है। ऐसे में तीन भाषाओं की पढ़ाई के लिए प्रशिक्षित शिक्षकों की उपलब्धता एक बड़ी चुनौती बन सकती है।

3. छात्रों पर अतिरिक्त शैक्षणिक बोझ बढ़ेगा या नहीं?

अभिभावकों की चिंता है कि तीन भाषाओं का अध्ययन छात्रों के अकादमिक दबाव को बढ़ा सकता है। बोर्ड ने इसमें सहूलियत की बात कही है, लेकिन मूल्यांकन और पाठ्यक्रम की रूपरेखा अभी पूरी तरह स्पष्ट नहीं है।

4. राज्यों की भूमिका क्या होगी?

शिक्षा समवर्ती सूची का विषय है। यह एक ऐसा विषय है जिस पर केंद्र सरकार और राज्य सरकार दोनों को कानून बनाने का अधिकार होता है। ऐसे में राज्य सरकारों की सहमति और स्थानीय आवश्यकताओं को किस हद तक महत्व मिलेगा, यह सवाल अभी सामने बना हुआ है।

5. बोर्ड परीक्षाओं पर क्या प्रभाव पड़ेगा?

क्या भविष्य में भाषा विषयों का पैटर्न बदलेगा? क्या तीनों भाषाओं का मूल्यांकन समान स्तर पर होगा? इस संबंध में भी CBSE का कहना है कि सातवीं से नौवीं के मौजूदा बैच के विद्यार्थियों को कक्षा दसवीं में तीसरी भाषा की बोर्ड परीक्षा नहीं देनी होगी। इन कक्षाओं के मौजूदा छात्रों को परीक्षा से छूट होगी। उनका मूल्यांकन आंतरिक रूप से किया जाएगा।

किस कक्षा के लिए क्या हैं नए नियम?

किस कक्षा के लिए क्या हैं नए नियम?

किस कक्षा के लिए क्या हैं नए नियम?

वर्तमान कक्षा 10 (शैक्षणिक सत्र 2026-27)

  • इस बैच के छात्रों पर नई भाषा नीति लागू नहीं होगी।
  • छात्र पहले की तरह केवल दो भाषाओं के साथ बोर्ड परीक्षा देंगे।
  • तीसरी भाषा पढ़ना अनिवार्य नहीं होगा।
  • तीसरी भाषा की कोई बोर्ड परीक्षा भी नहीं देनी होगी।

वर्तमान कक्षा 9 (शैक्षणिक सत्र 2026-27)

  • छात्रों को तीन भाषाएं पढ़नी होंगी।
  • तीन भाषाओं में कम से कम दो भारतीय भाषाएं अनिवार्य होंगी।
  • अगले वर्ष कक्षा 10 में पहुंचने पर तीसरी भाषा की बोर्ड परीक्षा नहीं होगी।
  • तीसरी भाषा का मूल्यांकन स्कूल स्तर पर आंतरिक परीक्षा के माध्यम से किया जाएगा।

वर्तमान कक्षा 7 और 8

  • इन छात्रों को भी तीन भाषाएं पढ़नी होंगी।
  • कम से कम दो भारतीय भाषाएं रखना अनिवार्य होगा।
  • कक्षा 10 में पहुंचने पर तीसरी भाषा की बोर्ड परीक्षा नहीं देनी होगी।
  • तीसरी भाषा का मूल्यांकन केवल स्कूल स्तर पर किया जाएगा।

वर्तमान कक्षा 6

  • यह पहला बैच होगा, जिस पर नई तीन-भाषा नीति पूरी तरह लागू होगी।
  • छात्रों को कक्षा 6 से ही तीन भाषाएं पढ़नी होंगी।
  • कक्षा 10 तक तीनों भाषाओं का अध्ययन जारी रखना होगा।
  • कक्षा 10 में पहुंचने पर तीसरी भाषा (R-3) की बोर्ड परीक्षा भी देनी होगी।
  • इस बैच पर नई भाषा नीति के सभी प्रावधान लागू होंगे।
CBSE थ्री लैंग्वेंज पॉलिसी के मुख्य बिंदु

CBSE थ्री लैंग्वेंज पॉलिसी के मुख्य बिंदु

गाइडलाइंस के मुख्य बिंदु

  • मौजूदा बैच के दसवीं के छात्रों पर नई भाषा नीति लागू नहीं होगी
  • मौजूदा सातवीं, आठवीं और नौंवीं के छात्रों को कक्षा दसवीं में तीसरी भाषा की कोई बोर्ड परीक्षा नहीं देनी होगी।
  • दो विदेशी भाषाएं पढ़ रहे छात्र एक अतिरिक्त भाषा के साथ अपनी पढ़ाई जारी रख सकेंगे।
  • तीन भाषाओं में कम से कम दो भारतीय भाषाएं होना अनिवार्य
  • नई व्यवस्था शैक्षणिक सत्र 2026-27 से सीबीएसई संबद्ध स्कूलों में लागू होगी।

दिव्यांग छात्रों को छूट

सीबीएसई ने तीन-भाषा नीति के तहत कुछ विशेष श्रेणी के विद्यार्थियों को सामान्य छूट देने का प्रावधान किया है। विशेष आवश्यकता वाले बच्चों को दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम 2016 के प्रावधानों के अनुरूप तीसरी भाषा के अनिवार्य अध्ययन से आवश्यक छूट और रियायतें प्रदान की जाएंगी। कुल मिलाकर, CBSE के स्पष्टीकरण ने तत्काल चिंता को कुछ हद तक कम जरूर किया है, लेकिन थ्री-लैंग्वेज पॉलिसी के व्यावहारिक क्रियान्वयन को लेकर कई पहलुओं पर अभी और स्पष्टता की आवश्यकता है। आने वाले महीनों में केंद्र सरकार, राज्यों और शिक्षा बोर्डों द्वारा जारी दिशा-निर्देश ही तय करेंगे कि यह नीति छात्रों और स्कूलों के लिए कितनी सहज और प्रभावी साबित होती है।

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