CBSE Marksheet Row : ऑन-स्क्रीन मार्किंग और स्कैनिंग में गंभीर गड़बड़ियां, वेंडर के सॉफ्टवेयर की जांच की मांग

सेंट्रल बोर्ड ऑफ सेकेंडरी एजुकेशन (CBSE) को क्लास 12 की खाली मार्कशीट और गलत आंसर स्क्रिप्ट जारी करने के बाद काफी आलोचना का सामना करना पड़ा। इसके नए ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) सिस्टम में स्कैनिंग और इंडेक्सिंग की गड़बड़ियों के कारण डेटा में गलतियाँ हुईं, जिसके चलते लोगों ने याचिकाएं दायर कीं और सुप्रीम कोर्ट में भी अपील की गई; बाद में इन गलतियों को मैन्युअल रूप से सुधारा गया। हालांकि इस बीच पेरेंट्स में अब भी टेंडर लेने वाली कंपनी और बोर्ड के खिलाफ आक्रोश है।

CBSE Black Marksheet Row : 13 मई को नतीजे घोषित होने के बाद से ही CBSE को भारी सोशल प्रेशर और कानूनी विवादों का सामना करना पड़ रहा है। इसकी वजह ये कि 12वीं कक्षा के कई छात्रों की मार्कशीट में कई तरह की परेशानियां हुईं। ये पूरी तरह से भरी हुई नहीं थीं। CBSE अपनी इन समस्याओं के लिए सर्वर टैगिंग और स्कैनिंग प्रोसेस में गंभीर खामियों को जिम्मेदार ठहराता है; ये खामियां हार्डवेयर में खराबी के कारण आईं, जो उसके हालिया डिजिटल परीक्षा सिस्टम का हिस्सा था।

CBSE blank Marksheet

CBSE blank Marksheet

ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) सिस्टम के शुरुआती इस्तेमाल के कारण, स्कैनिंग के दौरान फिजिकल आंसर शीट या तो पूरी तरह खाली रह गईं या फिर डिजिटल रूप में बहुत धुंधली सेव हुईं। इंजीनियर और डॉक्टर बनने की चाह रखने वाले कई होनहार छात्र अब मुश्किल स्थिति में हैं, क्योंकि यूनिवर्सिटी काउंसलिंग सेशन के अहम समय में उन्हें अपने डैशबोर्ड पर विषयों के लिए कोई ग्रेड या Result Later जैसा कोई नोटिफिकेशन भी नहीं दिख रहा है। जहां एक तरफ परेशान माता-पिता और शिक्षा संगठनों की ओर से दबाव बढ़ रहा है, वहीं वकील अब वेंडर के सॉफ्टवेयर कंप्लायंस प्रोसेस की जांच की मांग कर रहे हैं।

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