मोदी सरकार ने अनुसूचित जाति के बच्चों के लिए खोला खजाना, 59,000 करोड़ रुपये की छात्रवृत्ति योजना को मंजूरी

केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार ने दलित बच्चों के लिए बड़ा फैसला लिया है। सरकार ने पोस्ट मैट्रिक छात्रवृत्ति योजना में 59 हजार करोड़ रुपये खर्च करने का फैसला लिया है।

Modi govt approves transformatory changes in Post Matric Scholarship for students belonging to Scheduled Castes
मोदी सरकार ने अनुसूचित जाति के बच्चों के लिए खोला खजाना 

मुख्य बातें

  • मोदी सरकार ने दलित बच्चों के लिए खोला खजाना, पोस्ट मैट्रिक छात्रवृत्ति योजना में खर्च करेगी 59 हजार करोड़
  • अनुमान है कि 1.36 करोड़ ऐसे सबसे गरीब छात्रों को मिल सकता है फायदा
  • वर्ष 2020-21 से 2025-26 के दौरान 5 गुना से अधिक बढ़ाकर लगभग 6,000 करोड़ रुपये प्रतिवर्ष किया जाएगा

नई दिल्ली: मोदी सरकार ने अनुसूचित वर्ग के बच्चों को आगे बढ़ने के अवसर प्रदान करने के लिए एक बड़ा फैसला लिया है। इसके मुताबिक सरकार इस वर्ग से आने वाले बच्चों की पढ़ाई पर अब पहले की तुलना में हर साल पांच गुना अधिक धनराशि खर्च करेगी। बुधवार को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडल समिति की बैठक हुई जिसमें अगले 5 वर्षों में 4 करोड़ से अधिक अनुसूचित जाति के छात्रों को लाभ पहुंचाने के लिए 'अनुसूचित जाति से संबंधित छात्रों के लिए मैट्रिकोत्तर छात्रवृत्ति (पीएमएस-एससी)' की केंद्र प्रायोजित स्कीम बड़े और रूपांतरात्मक परिवर्तनों के साथ अनुमोदित की गई। इसका लक्ष्य है कि ये छात्र वे अपनी उच्चतर शिक्षा को सफलतापूर्वक पूरा कर सकें।

मंत्रिमंडल ने 59,048 करोड़ रुपये के कुल निवेश को अनुमोदन प्रदान किया है जिसमें से केंद्र सरकार 35,534 करोड़ रुपये (60 प्रतिशत) खर्च करेगी और शेष राशि राज्य सरकारों द्वारा खर्च की जाएगी। इस महत्वपूर्ण स्कीम में केंद्र सरकार की भागीदारी अधिक होगी।इस योजना से अनुसूचित जाति के छात्रों को कक्षा 11 वीं से शुरू होने वाले मैट्रिक के बाद के किसी भी पाठ्यक्रम को जारी रखने में मदद मिली है। इस योजना में सरकार शिक्षा की लागत का वहन करती है।     

विशेषताएं

  1. गरीब-से-गरीब परिवारों के 10वीं कक्षा उत्तीर्ण छात्रों को अपनी इच्छानुसार उच्चतर शिक्षा पाठ्यक्रमों में नामित करने के लिए एक अभियान चलाया जाएगा। अनुमान है कि 1.36 करोड़ ऐसे सबसे गरीब छात्र जो वर्तमान में 10वीं कक्षा के बाद अपनी शिक्षा को जारी नहीं रख सकते हैं, उन्हें अगले पांच वर्षों में उच्चतर शिक्षा प्रणाली के अंतर्गत लाया जाएगा।
  2. यह स्कीम सुदृढ़ सुरक्षा उपायों के साथ ऑनलाइन प्लेटफार्म पर संचालित की जाएगी जिससे पारदर्शिता, जवाबदेही, कार्य क्षमता, तथा बिना विलम्ब के समयबद्ध सहायता सुनिश्चित होगी।
  3. राज्य पात्रता, जातिगत स्थिति, आधार पहचान तथा बैंक खाता के ब्यौरे की ऑनलाइन पोर्टल पर अभेद्य जांच करेंगे।
  4. इस स्कीम के अंतर्गत छात्रों को वित्तीय सहायता का आहरण डीबीटी मोड के माध्यम से और अधिमान्यता आधार सक्षम भुगतान प्रणाली को प्रयोग में लाकर किया जाएगा। वर्ष 2021-22 से प्रारंभ करते हुए इस स्कीम में केंद्र का अंश (60 प्रतिशत) निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार छात्रों के बैंक खातों में डीबीटी मोड के माध्यम में सीधे जारी किया जाएगा।
  5. निगरानी तंत्र को और सुदृढ़ किया जाएगा और सोशल ऑडिट, तीसरे पक्ष द्वारा वार्षिक मूल्यांकन कराकर और प्रत्येक संस्थान की अर्ध-वार्षिक स्वतः लेखा परीक्षित रिपोर्टों के माध्यम से किया जाएगा।

केंद्रीय सहायता जो वर्ष 2017-18 से वर्ष 2019-20 के दौरान लगभग 1100 करोड़ रुपये प्रतिवर्ष थी, उसे वर्ष 2020-21 से 2025-26 के दौरान 5 गुना से अधिक बढ़ाकर लगभग 6,000 करोड़ रुपये प्रतिवर्ष किया जाएगा।

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