MARCOS Commando: अगर बनना चाहते हैं मार्कोस कमांडो तो पहले देखें इनकी ट्रेनिंग, जानें कौन कर सकता है आवेदन

MARCOS Commando: भारतीय नौसेना में मार्कोस कमांडो बनना बेहद टफ माना जाता है। आंकड़ों के अुनसार कमांडो बनने के लिए आवेदन करने वाले 1000 सैनिकों में से कोई एक ही मार्कोस कमांडो बन पाता है। इसकी ट्रेनिंग बेहद मुश्किल मानी जाती है। हालांकि चयन के बाद इन्‍हें शानदार सैलरी मिलती है।

Marcos commandos
मार्कोस कमांडो की ट्रेनिंग और सैलरी   |  तस्वीर साभार: Twitter
मुख्य बातें
  • एक हजार सैनिकों में से सिर्फ एक ही बन पाता है मार्कोस कमांडो
  • एलिजिबिलिटी टेस्‍ट में ही हो जाते हैं 90 फीसदी उम्‍मीदवार बाहर
  • कमांडो बनने के लिए करनी पड़ती है 3 साल की कठिन ट्रेनिंग

MARCOS Commando: मार्कोस को भारत के वर्ल्‍ड के सबसे बेहतरीन कमांडो में से एक माना जाता है। भारतीय नौसेना का यह विशेष बल आतंकवाद से निपटने के लिए पानी के नीचे और सब-एंटी-पाइरेसी ऑपरेशन में माहिर होता है। साथ ही ये जमीन पर भी अपने ऑपरेशन को अंजाम देते हैं। ये कमांडो देश की सुरक्षा व्‍यवस्‍था को पुख्‍ता करने के लिए अब तक कई ऑरपरेशन को अंजाम दे चुके हैं। देश सेवा का सपना देखने वाले हर युवा मार्कोस कमांडो बनना चाहता है, लेकिन यह इतना आसान भी नहीं होता। आइए, जानते हैं कि मार्कोस कमांडो बनने के लिए किस स्‍तर की ट्रेनिंग से गुजरना पड़ता है और इन्‍हें सैलरी क्‍या मिलती है।

मार्कोस का गठन व चयन प्रक्रिया

इसका गठन 1987 में किया गया था। मार्कोस कमांडो को आतंकवाद से लेकर, नेवी ऑपरेशन और एंटी पायरेसी ऑपरेशन में भी यूज किया जाता है। मार्कोस कमांडज्ञे बनने के लिए थल, जल और वायु सेना के अलावा अर्ध-सैनिकल बल भी आवेदन कर सकते हैं। इसमे सलेक्‍ट होना इतना टफ है कि भारतीय सेना के 1000 सैनिकों में से कोई एक सैनिक ही मार्कोस कमांडो बन पाता है। इसमें आवेदन के लिए केंडिडेट की उम्र  20 साल से ज्‍यादा नहीं होनी चाहिए। उम्मीदवार को पहले तीन दिन शारीरिक फिटनेस टेस्ट और एलिजिबिलिटी टेस्‍ट से गुजरना होता है। इस दौरान ही करीब 90 प्रतिशत उम्मीदवार रिजेक्ट हो जाते हैं।

मार्कोस कमांडो की ट्रेनिंग

मार्कोस में चयन के लिए पांच हफ्ते की शुरुआती ट्रेनिंग होती है। यह ट्रेनिंग इतना तकलीफदेह होती है कि लोग इसकी तुलना नर्क से करते हैं। इस दौरान ट्रेनी से कठिन परिश्रम करवाया जाता है। इन पांच हफ्तों में इन्‍हें सोने का भी बहुत कम मौका मिलता है। ज्‍यादातर उम्‍मीदर यहीं से वापस लौट जाते हैं। इस ट्रेनिंग को कंप्‍लीट करके जो लोग बचते है, उन्‍हें मार्कोस की 3 साल की असली ट्रेनिंग करवाई जाती है। इसमें ट्रेनी को अपने कंधे पर 25 किलो वजन लेकर जांघों तक कीचड़ में घुस कर 800 मीटर की दौड़ लगानी पड़ती है। फिर इनको "हालो" और "हाहो" नाम की 2 ट्रेनिंग दी जाती है। "हालो" जम्प में ट्रेनी को लगभग 11 किमी. की ऊंचाई से जमीन पर जंप करनी होती है, वहीं  "हाहो" जम्प में 8 किमी. की ऊंचाई से जंप करनी होती है। साथ ही इस जंप के दौरान 8 सेकेंड के अंदर ही इन्‍हें अपने पैराशूट को भी खोलना होता है।

आगरा और कोच्चि में होती है ट्रेनिंग

मार्कोस कमांडो के प्रशिक्षुओं को आगरा के पैराट्रूपर ट्रेनिंग स्कूल में पैरा जंपिंग कराई जाती है। वहीं गोताखोरी के प्रशिक्षण के लिए उन्‍हें कोच्चि में नौसेना के डाइविंग स्कूल में ट्रेनिंग मिलती है। मार्कोस कमांडो की ट्रेनिंग में ओपन और क्लोज सर्किट डाइविंग, उन्नत हथियार कौशल और मार्शल आर्ट सहित बुनियादी कमांडो कौशल, हवाई प्रशिक्षण, खुफिया प्रशिक्षण, पनडुब्बी शिल्प संचालन, आतंकवाद विरोधी अभियान, पनडुब्बियों से संचालन, स्काइडाइविंग, भाषा प्रशिक्षण, सम्मेलन विधि, विस्फोटक से निपटने की टेक्‍निक आदि सिखाई जाती है। जिन उम्‍मीदवारों का मार्कोस कमांडों में चयन होता है, उनके घरवालों को भी इसकी जानकारी नहीं दी जाती है। इन्‍हें अपनी पहचान को छिपाकर रखना होता है। मार्कोस कमांडो की ज्यादातर ट्रेनिंग आईएनएस अभिमन्यु (मुंबई) में होती है।

मार्कोस कमांडो की सैलरी

मार्कोस कमांडो की सैलरी 7वें वेतन आयोग के अनुसार मिलती है। उनका मूल वेतन 25,000/- रुपये है। इसके साथ ही इन्‍हें जहाज गोताखोर भत्ता- +8.500 से 10,000/- रुपये, मार्कोस भत्ता- +25,000/- रुपये, अगर वह हार्ड एरिया में तैनात है तो मूल वेतन का 20% जोखिम भत्‍ता और यदि ये कमांडो अति सक्रिय क्षेत्र में हैं तो अति सक्रिय क्षेत्र भत्ता- 16,900/- रुपये, फील्ड एरिया में तैनात हैं तो फील्ड एरिया अलाउंस- 10,500/- रुपये मिलता है। कुल मिलाकर इनकी सैलरी लाखों में होती है।

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