Gandhi Jayanti 2019 : ये हैं महात्मा गांधी की जिंदगी के 5 प्रेरक प्रसंग, जो ज्ञान के साथ-साथ देते हैं सीख

एजुकेशन
Updated Sep 30, 2019 | 23:30 IST | टाइम्स नाउ डिजिटल

2 अक्टूबर को देशभर में गांधी जयंती मनाया जाता है। ऐसे में आज हम बात करेंगे महात्मा गांधी के जीवन से जुड़े ऐसे प्रेरक प्रसंगों के बारे में जो ना सिर्फ ज्ञान देती हैं बल्कि उससे हमे सीख भी मिलती हैं।

Mahatma Gandhi Prerak Prasang
Mahatma Gandhi Prerak Prasang  |  तस्वीर साभार: Instagram

देशभर में 2 अक्टूबर को राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की 150वीं जयंती मनाई जाएगी। बता दें कि गांधी जी ने देश में अपने योगदान के लिए ही नहीं बल्कि आदर्शों से भी लोगों के दिल खास जगह बनाई है। ऐसे में आज हम बात करेंगे उनके ऐसे ही प्रेरक प्रसंगों के बारे में जो हमें जीवन में ज्ञान ही नहीं बल्कि सीख भी देती है। वहीं ये प्रसंग हमारे जीवन की कठिनाइयों को आसान बनाती है।

झूठ कभी नहीं बोलना चाहिए
महात्मा गांधी झूठ के सख्त खिलाफ थे। दरअसल उनकी जिंदगी में एक ऐसा किस्सा हुआ जिसके बाद उन्होंने तय किया कि वो कभी झूठ नहीं बोलेंगे। दरअसल उनके भाई उन दिनों कर्ज में फंसे हुए थे। ऐसे में भाई की मदद के लिए उन्होंने अपना सोने का कड़ा बेच दिया। जब घर वालों ने कड़े को लेकर सवाल किया तो उन्होंने झूठ बोलते हुए कहा कि कड़ा कहीं हो खो गया है। लेकिन गांधी जी झूठ बोलकर खुश नहीं थे। बार बार उनकी आत्मा उन्हें सच बोलने के लिए कह रही थी। ऐसे में उन्होंने अपने पिता को एक पत्र लिखा और सारी सच्चाई बता दी। पत्र मिलने के बाद उन्हें लगा कि पिता बहुत पीटेंगे। लेकिन ऐसा नहीं हुआ, इस बात से उन्हें काफी चोट पहुंची थी। 

समय की कीमत
दांडी यात्रा के दौरान बापू एक स्थान पर ठहरे हुए थे, तभी वहां पर एक अंग्रेजी प्रशंसक उनके पास आया और बोला 'हेलो मेरा नाम वाकर' है। इस पर गांधी जी ने चलते-चलते कहा मैं भी तो वाकर हूं। ये कहकर गांधी जी वहां से चले गए। ऐसा करते देख एक शख्स उनके पास आया और कहा कि आप उससे मिले क्यों नहीं आपकी प्रसिद्धि होती। तभी गांधी जी ने कहा मेरे लिए सम्मान से ज्यादा समय कीमत है।

गांधी जी ने दी थी कर्म बोने की सलाह
उन दिनों गांधी जी एक गांव में गए हुए थे। जहां गांधी जी को देखने के लिए लोगों की भीड़ लग गई । इस पर गांधी ने गांव वालो से पूछा इस वक्त किस अन्न की कटाई हो रही है और किस अन्न को बोया जा रहा है। इस पर एक वृद्ध व्यक्ति बाहर आकर कहा कि आप इतने ज्ञानी हैं क्या आपको ये नहीं पता जेठ मास में कोई फसल लगाया नहीं जाता। इस पर गांधी जी ने कहा कि तो क्या इस वक्त आप खाली हैं। आप चाहे तो कुछ बो सकते हैं कुछ भी काट सकते। लोगों ने कहा कि आप ही बता दिजिए क्या बोना और क्या काटना चाहिए? इस पर उन्होंने कहा कि.....

आप लोग कर्म बोइए और आदत को काटिए,
आदत को बोइए और चरित्र को काटिए,
चरित्र को बोइए और भाग्य को काटिए,
तभी तुम्हारा जीवन सार्थक हो पाएगा।

अछूत को त्याग दो
जब महात्मा गांधी के पिता जी का ट्रांसफर राजकोट में हुआ था तब उनके पड़ोस में एक सफाईकर्मी भी रहता था। गांधी जी उसे बहुत पसंद करते थे। एक बार किसी कार्यक्रम में गांधी जी को मिठाई बांटने का काम सौंपा गया था। गांधी जी सबसे पहले मिठाई पड़ोस में रहने वाले सफाईकर्मी को देने लगे। जैसे ही गांधी जी उन्हें मिठाई देने लगे तभी सफाईकर्मी ने कहा कि मुझे मत  छुएं मैं अधूत हूं। ये बात गांधी जी को बहुत बुरी लगी और उन्होंने सफाईकर्मी के हाथ को पकड़कर कहा कि हम सब इंसान है छूत और अछूत कुछ नहीं होता।

गलती हो तो माफी मांगे
गांधी जी एक बार यात्रा में निकले थे, उस दौरान उनके साथ अनुयायी आनंद स्वामी भी थे। यात्रा के दौरान आनंद स्वामी किसी बात को लेकर एक व्यक्ति से बहस हो गई थी। बात बढ़ती चली गईं जिसके बाद उस शख्स को आनंद स्वामी ने थप्पड़ मार दिया। बाद में जब ये बात गांधी जी पता चला तो उन्हें बहुत बुरा लगा। उन्होंने आनंद स्वामी को उस शख्स से माफी मांगने के लिए कहा। उन्होंने कहा कि अगर वो शख्स आम इंसान ना होकर आपके बराबरी का होता तो क्या आप तब भी थप्पड़ मारते। इसके बाद आनंद स्वामी को एहसास हुआ और उन्होंने शख्स से माफी मांगी।

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