कर्नाटक के धर्मस्थल क्षेत्र से जुड़े बहुचर्चित मामले में नया मोड़ आ गया है। शिकायतकर्ता चिन्नैया ने शनिवार देर शाम अदालत के समक्ष स्वयं उपस्थित होकर स्वीकार किया कि उसने पहले दिए गए आरोप और गवाही झूठी थी। अधिकारियों ने बताया कि उसका बयान बेल्थांगडी में अतिरिक्त सिविल न्यायाधीश एवं प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट ने दर्ज किया। जानकारी के अनुसार, शिवमोगा जेल में बंद 45 वर्षीय चिन्नैया को पुलिस सुरक्षा में अदालत लाया गया था। उसका बयान भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की धारा 183 के तहत दर्ज किया गया।
कर्नाटक धर्मस्थल केस में शिकायत कर्ता अपनी गवाही से पलटा (फाइल फोटो- PTI)
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पहले झूठी गवाही के आरोप में गिरफ्तारी
विशेष जांच दल (एसआईटी) ने चिन्नैया को इससे पहले झूठी गवाही देने के आरोप में गिरफ्तार किया था। उस पर आरोप था कि उसने 11 जुलाई को अदालती कार्यवाही के दौरान झूठे दावे किए और सबूत के तौर पर खोपड़ी पेश की थी।
अदालत में चिन्नैया का खुलासा
अदालत में दिए स्वैच्छिक बयान में चिन्नैया ने माना कि धर्मस्थल में दो दशक के दौरान बलात्कार, हत्या और शवों को दफनाने जैसी घटनाओं की शिकायतें और उसके द्वारा पहले दी गई गवाही पूरी तरह से मनगढ़ंत थीं। उसने दावा किया कि कुछ व्यक्तियों के इशारे पर ही उसने यह कदम उठाया। हालांकि, पुलिस ने तकनीकी कारणों से उन व्यक्तियों के नाम का खुलासा नहीं किया है। चिन्नैया ने यह भी स्वीकार किया कि 11 जुलाई को अदालत में पेश की गई खोपड़ी उसे सौजन्या के चाचा विट्ठल गौड़ा ने सौंपी थी।
जांच जारी
एसआईटी इस पूरे मामले की गहन जांच कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि बयान और सबूतों की कानूनी रूप से जांच की जा रही है और जिन व्यक्तियों का इसमें हाथ होने की बात सामने आई है, उनकी भूमिका भी जल्द स्पष्ट की जाएगी। कर्नाटक का धर्मस्थल केस में इसी शिकायतकर्ता ने दावा किया था कि उसने 1995-2014 के बीच धर्मस्थल में काम करते हुए, कई शवों को दफनाने या जलाने के लिए मजबूर किया गया। इन शवों में महिलाएं व नाबालिगाएँ शामिल थीं, जिन पर यौन हिंसा के निशान पाए जाते थे।
