Kanpur Crime News: कानपुर के विनीत मिनोचा (Vineet Minocha) हत्याकांड में शालू जेल से बाहर आ गई। शालू वही बहू है, जिसका अपराध इतना था कि वह विनीत मिनोचा के बेटे सुब्रत से शादी की थी। शादी के बाद दोनों का एक बच्चा हुआ। परिवार राजी-खुशी था, किसी चीज की कमी नहीं थी, लेकिन एक दिन विनीत मिनोचा की हत्या हो जाती है। हत्या में सीधे बहू शालू का नाम आ जाता है। शालू एक तो दूसरे घर की बेटी थी, विनीत मिनोचा के घर आए हुए उसे कुछ साल ही हुए थे, लिस से लेकर हर किसी ने यही समझा कि शालू ने ही हत्या करवाई है। शालू बिना किसी को कुछ बोले, अपराध स्वीकारा और पुलिस की गाड़ी में जाकर बैठ गई।
जेल से रिहा होकर शालू पहुंची घर (AI Photo- Newsroom Verified)
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ससुर की हत्या के समय पार्टी कर रही थी शालू
जितनी तेजी से पुलिस ने इस हत्याकांड का खुलासा किया, उतनी ही तेजी से यह हत्या एक मिस्ट्री बन गई। जिस समय विनीत मिनोचा की हत्या हुई, शालू पार्टी में थी। पार्टी में जमकर नाच-गाना हो रहा था, खाना-पीना चल रहा था। अगर शालू इस हत्या से जुड़ी होती तो शायद ही वो पार्टी का आनंद ले रही होती, उसका ध्यान ससुर विनीत मिनोचा की हत्या पर रहता। लेकिन ऐसा कुछ नहीं था।
पति से टूट कर प्यार करती थी शालू
शालू को जब ससुर की हत्या का पता चला, तो उसे पति पर शक तो हुआ, लेकिन विश्वास नहीं। क्योंकि पति सुब्रत के कहने पर ही उसने नौकर विशाल और उसके साथी राजकिशोर को घर के अंदर आने दिया था। वो चुपचाप अपना परिवार बचाने के लिए, ससुर की हत्या का इल्जाम अपन सिर पर ले ली और हत्यारे विशाल की हां में हां मिलाते हुए जेल चली गई। इधर दुनिया बहू को कोसने लगी, तरह-तरह की खबरें आने लगीं, बहू और ससुर में अनबन थी, बहू को पाबंदिया पसंद नहीं थी। जो शालू घर की प्यारी थी, वो तुरंत खलनायिका बन गई। घरवालों की नजर में भी और समाज की नजर में भी, आखिर बहू थी, लोग आसानी से विश्वास कर गए कि हत्या उसी ने की।
पति को पछतावा था, लेकिन नहीं स्वीकारी हत्या की बात
शालू का पति सुब्रत हर सच्चाई से वाकिफ था। हत्या उसी ने करवाई थी, यह बात वह, उसका नौकर विशाल और उसका साथी राजकिशोर जानते थे। लेकिन तीनों ने सच नहीं बताया। विशाल ने पुलिस के सामने मुंह खोला और शालू का नाम ले लिया। शालू जेल चली गई। जो शालू आलीशान जिंदगी जी रही थी, वो अगले ही पल समाज की नजर में अपने ही ससुर की हत्यारिन हो चुकी थी। घर छोड़कर जेल चली गई थी, उसका बच्चा उससे दूर हो गया था, लेकिन शालू अपना मुंह बंद रखी। जब पति सुब्रत पकड़ा गया, तब उसने कहा कि शालू के गिरफ्तार होने का उसे पछतावा था, लेकिन शालू का नाम लेने के लिए विशाल को उसी ने कहा था।
अब बेटा मिला तो पति दूर हुआ
शालू 21 दिन बाद जब जेल से बाहर आई तो सबसे ज्यादा फिक्र अपने बच्चे को लेकर की। उसी के भागी-भागी पहुंची। लेकिन एक तरफ आज भी उसे अपने पति सुब्रत की चिंता हो रही है। शालू ससुराल के बजाय मायके गई है। लेकिन आज भी यह स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं है कि उसके पति ने अपने पिता की हत्या कर उसे फंसाया है।
