8 बरस की उम्र में कर डाले 3 मर्डरः ईंट से शरीर कूच दबा देता था गला, पढ़ें- कैसे मासूम बन गया सबसे छोटा सीरियल किलर!

  • Authored by: टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल
  • Updated Jul 23, 2022, 01:42 PM IST

मनोवैज्ञानिकों ने अमरजीत सदा को 'पीड़ित' कहा। उनका मानना है कि बच्चा सही और गलत में फर्क करने में असमर्थ था, क्योंकि उसने कथित तौर पर हत्याएं कीं, जिसमें बच्चे और पारिवार सदस्य थे।

8 बरस की उम्र में कर डाले 3 मर्डरः ईंट से शरीर कूच दबा देता था गला, पढ़ें- कैसे मासूम बन गया सबसे छोटा सीरियल किलर!
Photo Credit: BCCL

बच्चे मन के सच्चे होते हैं और कच्चे भी। अपने शुरुआती दिनों में वे असल में तय नहीं कर पाते कि क्या सही है और क्या गलत। कुछ ऐसा ही हुआ, अमरजीत सदा के साथ। वह सही और गलत के भेद में उलझ गया और यही वजह रही कि उसे दुनिया का सबसे छोटे उम्र का सीरियल किलर बताया जाने लगा। 

दरअसल, सदा जब आठ बरस का था तब उसने अलग-अलग घटनाओं में तीन लोगों की हत्या कर दी थी। इन वारदातों को उसने एक साल के भीतर 2006 से 2007 के बीच अंजाम दिया। वह जब सात साल का था, तब उसने अपने पहले शिकार को मौत के घाट उतारा था। 2006 में उसने कथित तौर पर अपनी छह साल की चाचा की बेटी को मार डाला था, जबकि सबसे आखिर में उसके हाथों पड़ोस में रहने वाली एक छह महीने की बच्ची (खुशबू) मारी गई थी।

मृतका की मां के मुताबिक, "मैं बच्ची को सोता छोड़ किसी काम से चली गई थी। लौट कर आई तो बेटी वहां नहीं थी।" हालांकि, चंद घंटों बाद सदा ने कबूला कि वह खुशबू को साथ ले गया था और उसने बेरहमी से ईंटों से उसके शरीर पर वार किया। फिर गला दबाकर उसकी हत्या कर दी। बाद में वह ग्रामीणों को वहां ले गया, जहां उसने बच्ची की लाश को दफनाया था। 

पुलिस ने जब उसे हिरासत में लिया तो बताया गया कि वह अफसरों के सामने खूब मुस्कुराया। अपनी बहन और चाचा की बिटिया को मारने के बाद भी उसके चेहरे पर न तो शिकन थी और न ही अफसोस। एक इंस्पेक्टर के मुताबिक, सभी हत्याएं एक ही तरह से की गई थीं।

सदा जब हिरासत में था, तब एक मनोवैज्ञानिक ने उसे 'पीड़ित' कहा। उनका मानना है कि बच्चा सही और गलत में फर्क करने में असमर्थ था, क्योंकि उसने कथित तौर पर हत्याएं कीं, जिसमें बच्चे और पारिवार सदस्य थे। भारतीय कानून के तहत एक बच्चे को जेल या मौत की सजा नहीं दी जा सकती है, इसलिए माना जाता था कि सदा को 18 साल की उम्र तक बिहार के मुंगेर में एक बाल गृह में रखा गया था। 

समझा जाता है कि उसे 2016 में रिहा कर दिया गया था, जब उसका मौजूदा ठिकाना नामालूम है। वह मूल रूप से बिहार के मुसहर गांव से ताल्लुक रखता है। उसका जन्म साल 1998 में हुआ था। परिवार के बारे में फिलहाल अधिकारिक जानकारी नहीं है, मगर इतना बताया जाता है कि वह गरीब परिवार में पैदा हुआ था और उसके पिता मजदूर थे।  

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