करियर के पहले ही मैच में जीता 'मैन ऑफ द मैच' का खिताब, फिर बोले- 'मैं असाधारण प्रतिभा वाला नहीं'

Man of The match Harshal Patel: न्यूजीलैंड के खिलाफ रांची में टीम इंडिया के लिए टी20 डेब्यू करने के बाद मैन ऑफ द मैच चुने गए हर्षल पटेल ने बताया क्या है उनकी सफलता का मंत्र। 

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हर्षल पटेल और रोहित शर्मा  |  तस्वीर साभार: AP
मुख्य बातें
  • आईपीएल 2021 के पर्पल कैप विजेता हर्षल पटेल को मिला डेब्यू का मौका
  • करियर के पहले अंतरराष्ट्रीय मैच में 4 ओवर में 25 रन देकर लिए 2 विकेट
  • इस शानदार गेंदबाजी प्रदर्शन के लिए हर्षल को चुना गया मैन ऑफ द मैच

रांची: आईपीएल 2021 के पर्पल कैप विजेता हर्षल पटेल का शुक्रवार को आखिरकार वो सपना पूरा हो गया जो भारत में क्रिकेट खेलने वाला हर खिलाड़ी बचपन से देखता है। हर्षल भारत के लिए अंतरराष्ट्रीय टी20 खेलने वाले 94 खिलाड़ी बने। न्यूजीलैंड के खिलाफ सीरीज के दूसरे टी20 के लिए उन्हें मोहम्मद सिराज की जगह एकादश में शामिल किया गया जो जयपुर में चोटिल हो गए थे। 

ऐसे में अपना पहला मैच खेलते हुए हर्षल पटेल ने शानदार प्रदर्शन किया और अपने आईपीएल वाले फॉर्म को बरकरार रखते हुए 4 ओवर में 25 रन देकर दो विकेट हासिल किए और कीवी टीम को 20 ओवर में 6 विकेट प 153 रन के स्कोर तक रोकने में अहम भूमिका अदा की। हर्षल 2 विकेट लेकर भारत की ओर से सबसे सफल गेंदबाज रहे। उन्हें टीम इंडिया की 7 विकेट से जीत के बाद मैन ऑफ द मैच चुना गया। 

मन में चल रही थी थोड़ी उथल-पुथल 
डेब्यू मैच में मैन ऑफ द मैच चुने जाने की अनोखी उपलब्धि हासिल करने के बाद हर्षल फूले नहीं समाए। 9 साल लंबे इंतजार के बाद उन्हें पहली बार टीम इंडिया की जर्सी पहनकर खेलने का मौका मिला। मैन ऑफ द मैच चुने जाने के बाद उन्होंने कहा, मन में थोड़ी सी उथल-पुथल चल रही है। आजकल मैच के दौरान आप प्रॉसेस में इतना अधिक उलझ जाते हैं कि अच्छे पलों का लुत्फ उठाना भी भूल जाते हैं, आपको ये भी नहीं पता होता कि आस-पास क्या चल रहा है। जब आप खेलने के लिए मैदान में उतरते हैं उसके बाद पूरी तरह उसमें डूब जाते हैं। लेकिन यह पल मेरे लिए यादगार रहेगा। मैं इससे बेहतर डेब्यू की अपेक्षा नहीं कर सकता था।  

9 साल लंबे इंतजार के बाद मिला डेब्यू का मौका 
9 साल तक घरेलू  क्रिकेट खेलने के बाद अंतरराष्ट्रीय डेब्यू की यात्रा के अनुभव के बारे में हर्षल पटेल ने कहा, मेरे खेल में धीमी और लगातार प्रगति हुई। मैं कोई असाधारण प्रतिभा वाला खिलाड़ी नहीं था। मुझे अपने खेल को जमीनी स्तर से ऊपर तक लाना था। मैंने उस लिहाज से अच्छा किया और अपनी प्रतिभा और क्षमता से बेहतर करने की कोशिश की। उसके लिए मैंने कई बार गलतियां की और फिर उनमें सुधार करते हुए यह जानने में सफल हुआ कि मैं किस तरह अच्छा कर सकता हूं और किस तरह नहीं। मेरी यह यात्रा बहुत शानदार रही है। उसने मुझे बहुत सारे जीवन के पाठ सिखाए हैं। जो क्रिकेट करियर के खत्म होने के बाद भी मेरे लिए मददगार होंगे।  

तरकश में है यॉर्कर जैसा अचूक हथियार 
आप शानदार स्लोअर गेंद फेकते हैं इसके अलावा और किसी गेंद पर आप काम कर रहे हैं? इसके जवाब में हर्षल ने कहा, मुझे लगता है कि आपको गेंदबाजी में ज्यादा विविधता की जरूरत नहीं होती है। आपको बस वो करना होता है जो आप सबसे बेहतर तरीके से कर सकते हैं आपको उसकी पैकेजिंग सही तरीके से करनी होती है। आज की परिस्थिति में मैं लूप वाली धीमी गेंदें और यॉर्कर गेंदें नहीं फेंक सका। मैं ये गेंदें भी पूरे आत्मविश्वास के साथ फेंक पाता हूं। यॉर्कर एक ऐसी गेंद है जो मैं अपनी इच्छा के अनुसार कभी भी डाल सकता हूं। मुझे गेंदबाजी की उस विधा में और पारंगत होना है। 

खेल का लुत्फ उठाता जाऊंगा 
डेब्यू के बाद करियर कैसा होगा, मैंने पहले करियर में बहुत से अच्छे पल देखे हैं। यह मेरे लिए क्रिकेट खेलने का एक और मंच है जहां मुझे अपनी ओर से अच्छा खेल दिखाना है और मैं बस यही करना चाहता हूं और जो कुछ भी मेरे पास आएगा मैं उसका आनंद लेना चाहता हूं।

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