पांच साल, 15 जोड़ियांः भारतीय टीम का सबसे बड़ा प्रयोग जारी है, कब सुलझेगी ये समस्या?

क्रिकेट
भाषा
Updated May 23, 2020 | 06:00 IST

Team India's Opening problems in test cricket: भारतीय क्रिकेट टीम के लिए टेस्ट क्रिकेट में पिछले 5 सालों के अंदर एक ऐसा प्रयोग जारी है जो खत्म होने का नाम नहीं ले रहा है।

Rohit Sharma and Mayank Agarwal pair in test cricket
Rohit Sharma and Mayank Agarwal pair in test cricket  |  तस्वीर साभार: AP, File Image

नयी दिल्ली: रोहित शर्मा के सीमित ओवरों में सलामी बल्लेबाज की भूमिका निभाने से पिछले सात वर्षों में भारत को दोनों छोटे प्रारूपों में ओपनिंग को लेकर ज्यादा माथापच्ची नहीं करनी पड़ी लेकिन टेस्ट क्रिकेट में उसकी एक अदद सलामी जोड़ी की तलाश अब भी जारी है। आइए जानते हैं कि क्या-क्या विकल्प मौजूद हैं और ओपनर्स की तलाश का सफर अब तक कैसा रहा है। ये पिछले पांच साल का लेखा-जोखा है।

रोहित को पिछले साल अक्टूबर में टेस्ट मैचों में भी सलामी बल्लेबाज की भूमिका में उतारा गया था और वह इसमें सफल भी रहे लेकिन उनकी असली परीक्षा विदेशी पिचों पर होनी थी और न्यूजीलैंड दौरे से पहले उनके चोटिल होने के कारण भारत को 2020 में खेले गये दो टेस्ट मैचों में नयी सलामी जोड़ी के साथ उतरना पड़ा था।

ऑस्ट्रेलिया में मयंक और रोहित?

भारत अगर इस साल के आखिर में आस्ट्रेलिया दौरे पर जाता है तो फिर पूरी संभावना है कि मयंक अग्रवाल के साथ रोहित ही पारी का आगाज करेंगे लेकिन अन्य बल्लेबाजों विशेषकर युवा पृथ्वी शॉ की दावेदारी को भी कम करके नहीं आंका जा सकता है जबकि केएल राहुल एकदिवसीय प्रारूप में अच्छे प्रदर्शन के कारण लंबे प्रारूप में खेलने का दावा मजबूत करते जा रहे हैं। इनके अलावा मुरली विजय और शिखर धवन की दावेदारी को भी नहीं नकारा जा सकता है।

15 जोड़ियां आजमाईं

पिछले पांच वर्षों में भारत ने धवन, राहुल, विजय, अग्रवाल, रोहित, पार्थिव पटेल, सॉव, गौतम गंभीर, हनुमा विहारी, अभिनव मकुंद और यहां तक कि तीसरे नंबर पर खेलने वाले चेतेश्वर पुजारा को भी पारी का आगाज करने के लिये भेजा। इस बीच भारत ने इन खिलाड़ियों को मिलाकर 15 जोड़ियां आजमायी। राहुल ने सर्वाधिक 32 टेस्ट मैचों में ओपनिंग की जबकि विजय ने 29, धवन ने 21 और अग्रवाल ने 11 मैचों में यह जिम्मेदारी संभाली।
अग्रवाल ने आस्ट्रेलिया के खिलाफ 2018 में मेलबर्न में ‘बाक्सिंग डे’ टेस्ट मैच में पदार्पण किया और शीर्ष क्रम के पहले दो स्थानों में से एक स्थान को स्थायित्व प्रदान किया। उन्होंने अब तक 11 मैचों की 17 पारियों में 974 रन बनाये हैं लेकिन न्यूजीलैंड के खिलाफ चार पारियों में वह 102 रन ही बना पाये थे जबकि शॉ ने 98 रन बनाये थे। लेकिन इस पूरी श्रृंखला में सभी भारतीय बल्लेबाज नाकाम रहे थे।

रोहित होंगे बेताब, शॉ पर भी नजरें

रोहित टेस्ट मैचों में फिर से पारी का आगाज करने के लिये बेताब होंगे। उन्होंने पिछले साल दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ विशाखापट्टनम में पहली बार यह भूमिका निभायी और दोनों पारियों में शतक (174 और 127) ठोककर नया रिकार्ड बनाया था। इसके बाद उन्होंने रांची में 212 रन की लाजवाब पारी खेली लेकिन बांग्लादेश के खिलाफ दोनों टेस्ट मैचों में उनका बल्ला कुंद पड़ा रहा। साव ने अब तक जो चार टेस्ट मैच खेले हैं उनमें एक शतक की मदद से 335 रन बनाये हैं।

भारत इस मामले में तीसरे नंबर पर

अगर पिछले पांच वर्षों में अन्य देशों की सलामी जोड़ियों की बात करें तो इंग्लैंड और श्रीलंका के बाद भारत ने सर्वाधिक बल्लेबाजों से पारी की शुरुआत करवायी। इंग्लैंड ने इस बीच 17, श्रीलंका ने 12, भारत ने 11, दक्षिण अफ्रीका ने 10, आस्ट्रेलिया और पाकिस्तान ने नौ-नौ खिलाड़ियों को सलामी बल्लेबाज के रूप में आजमाया। न्यूजीलैंड ने टॉम लैथम की वजह से इस बीच स्थायित्व दिखाया और पिछले पांच वर्षों में उसने केवल चार खिलाड़ियों को ओपनिंग का दायित्व सौंपा। लैथम ने पिछले पांच वर्षों में अपनी टीम की तरफ से सभी 42 मैचों में पारी का आगाज किया।

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