नई दिल्ली: भारत के पूर्व विकेटकीपर फारुख इंजीनियर भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) चयन समिति से बेहद खफा हैं। अपने बेबाक अंदाज के लिए मशहूर फारुख ने एमएसके प्रसाद की अध्यक्षता वाली चयन समिति की विश्वसनीयता पर सवाल भी उठाए। इसके अलावा उन्होंने सुप्रीम कोर्ट द्वारा नियुक्त प्रशासकों की समिति (सीओए) पर भी निशाना साधा।
भारत के लिए 1961 से 1975 के बीच 46 टेस्ट और पांच वनडे मैच खेलने वाले फारूख ने एक इंटरव्यू में कहा, 'टीम चयन की प्रक्रिया में विराट कोहली की बहुत अहम भूमिका है जो एक बहुत अच्छी बात है। लेकिन चयनकर्ताओं की क्या खूबी है? सभी चयनकर्ताओं ने मिलकर कुल 10-12 टेस्ट मैच खेले होंगे।'
82 वर्षीय पूर्व विकेटकीपर ने कहा, 'मैंने इनमें से एक चयनकर्ता को विश्व कप के दौरान पहचाना भी नहीं था। मैंने किसी से पूछा 'यह कौन था जिसने भारत का ब्लेजर पहन रखा था, तो उसने बताया कि यह एक चयनकर्ता है।' वे सिर्फ अनुष्का शर्मा (विराट की पत्नी) को चाय के कप दे रहे थे। मुझे लगता है कि दिलीप वेंगसरकर के कद के किसी शख्स को चयन समिति में होना चाहिए।'
फारुख पूर्व भारतीय कप्तान सौरव गांगुली के बीसीसीआई अध्यक्ष बनने से काफी खुश हैं। उन्होंने कहा, 'अब वक्त आया है कि एक क्रिकेटर बोर्ड को चला रहा है क्योंकि सीओए, मेरी नजर में पूरी तरह से वक्त की बर्बादी थी।'
उन्होंने कहा, 'मैं उस दिन पढ़ रहा था कि सीओए को अपने काम के लिए 3.5 करोड़ रुपए मिले। यह अपराध है। इसके साथ ही मुझे लगता है कि मीटिंग और अन्य चीजों के लिए उन्हें हजारों रुपये दिए गए होंगे। मुझे लगता है वे लोग हनीमून पर थे। अब हनीमून खत्म हो गया है।'
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