मंडला : जिले में स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल खड़े करने वाली एक घटना सामने आई है। प्रसव पीड़ा से जूझ रही एक गर्भवती महिला ने अस्पताल ले जाते समय ऑटो-रिक्शा में चार बच्चों को जन्म दिया, लेकिन समय से पहले जन्म लेने के कारण चारों नवजातों की मौत हो गई। परिजनों ने आरोप लगाया है कि समय पर एंबुलेंस उपलब्ध नहीं कराई गई, जिसकी वजह से बच्चों की जान नहीं बच सकी।
(सांकेतिक फोटो-Istock)
जानकारी के मुताबिक, नैनगांव निवासी रजनी सिंगाराम को गर्भावस्था के सातवें महीने में प्रसव पीड़ा शुरू होने पर पहले घुठास के सरकारी स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया। वहां उसकी हालत गंभीर होने पर डॉक्टरों ने उसे बेहतर इलाज के लिए बिछिया सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र रेफर कर दिया।
टाइम्स नाउ नवभारत पर यह भी पढ़ें - 4 महीने पहले ही चेतन से शादी कर चुकी थी सिया? केतन मर्डर केस में चौंकाने वाला खुलासा, दावे के जांच में जुटी पुलिस
एंबुलेंस के इंतजार में ऑटो का लिया सहारा
परिजनों का आरोप है कि उन्होंने आपातकालीन एंबुलेंस सेवा से संपर्क किया, लेकिन काफी इंतजार के बाद भी एंबुलेंस नहीं पहुंची। इसके बाद मजबूरन गर्भवती महिला को ऑटो-रिक्शा से अस्पताल ले जाया गया। रास्ते में ही महिला ने चार बच्चों को जन्म दिया।
जिला मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (सीएमएचओ) डॉ. डी. जे. मोहंती ने बताया कि चारों नवजात समय से पहले (प्रीमैच्योर) पैदा हुए थे और उनका वजन करीब 1.5 किलोग्राम था। अपरिपक्व होने के कारण उनकी मौत हो गई। मृत नवजातों में तीन लड़कियां और एक लड़का शामिल हैं। डॉ. मोहंती ने बताया कि महिला का इलाज बिछिया सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में चल रहा है और उसकी हालत फिलहाल खतरे से बाहर है। वहीं, महिला के पति गणेश सिंगाराम का कहना है कि यदि समय पर एंबुलेंस मिल जाती तो उनके बच्चों की जान बच सकती थी।
इस मामले पर मंडला के जिला कलेक्टर राहुल नामदेव धोते ने कहा कि प्रशासन को अभी तक इस संबंध में कोई औपचारिक शिकायत नहीं मिली है। उन्होंने कहा कि शिकायत मिलने पर मामले की जांच कराई जाएगी और यदि किसी स्तर पर लापरवाही सामने आती है तो नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
