Bihar News: बिहार की राजनीति में उपेंद्र कुशवाहा के बेटे दीपक प्रकाश (Deepak Prakash) के नाम कई अनचाहे रिकॉर्ड बनते दिख रहे हैं। पहली बार जब मंत्री बने तो सदन के सदस्य बनने से पहले ही सीएम नीतीश कुमार ने इस्तीफा दे दिया। दूसरी बार जब मंत्री बने तो कहीं से MLC का टिकट ही नहीं मिला। इस तरह से दीपक प्रकाश का मंत्रीपद जाना तय ही हो गया है।
उपेंद्र कुशवाहा के बेट दीपक प्रकाश (फोटो- DeepakPrakashRLM)
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क्यों दीपक प्रकाश का मंत्रीपद जाना है तय?
दीपक प्रकाश का मंत्री बने रहने के लिए सदन का सदस्य होना जरूरी है, जिसे शपथ ग्रहण के 6 महीने के अंदर पूरा करना होता है। लेकिन अभी तक दीपक प्रकाश किसी भी सदन के सदस्य नहीं बन पाए हैं। एमएलसी के लिए दीपक प्रकार को जदयू या बीजेपी से सपोर्ट चाहिए था, लेकिन किसी ने भी उनके लिए सीट नहीं छोडी है। एनडीए ने नौ में से आठ सीट के लिए अपने उम्मीदवार घोषित कर दिए हैं। इससे आरएलएम प्रमुख के लिए रास्ते लगभग बंद हो गए हैं।
कहां बिगड़ी बात?
सूत्रों के अनुसार जब उपेंद्र कुशवाहा ने बेटे दीपक प्रकाश को एमएलसी बनाने के लिए बीजेपी से संपर्क साधा तो बीजेपी की तरफ से राष्ट्रीय लोक मोर्चा के विलय का प्रस्ताव दिया गया, जिसे उपेंद्र कुशवाहा ने मना कर दिया। जिसके बाद बीजेपी ने भी एमएलसी सीट से इनकार कर दिया। दीपक जब पहली बार नवंबर, 2025 मे मंत्री बने थे, उस समय भी ऐसा ही प्रस्ताव उपेंद्र कुशवाहा को दिया गया था। उस समय भी उपेंद्र कुशवाहा ने विलय से इंकार किया था। इसके बाद भी बीजेपी ने दीपक प्रकाश को मंत्री बनाना स्वीकार कर लिया था। बीजेपी को उम्मीद थी कि बीजेपी के नेतृत्व वाली नयी सम्रट सरकार मे उपेंद्र कुशवाहा पुत्र के राजनीतिक भविष्य को देखते हुए मान जाएंगे, लेकिन कुशवाहा इसके लिए तैयार नहीं हुए। कुशवाहा ने इसे लेकर कहा- "राष्ट्रीय लोक मोर्चा का अस्तित्व किसी एक पद को लेकर समाप्त हो जाए, दुनिया की कोई ताकत यह काम नहीं कर सकती है। पूरी मजबूती के साथ हम लोग एनडीए में थे, एनडीए में है, एनडीए में रहेंगे। कुछ लोग समझते हैं उपेंद्र कुशवाहा पुत्र मोह में चले गए, अरे भैया उपेंद्र कुशवाहा पार्टी नहीं परिवार चलाता है।"
जदयू की ओर झुके कुशवाहा
राज्यसभा सदस्य कुशवाहा ने कहा को एनडीए के साथ मजबूती से खड़े हैं। उन्होंने कहा, "मैं 2014 में प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेन्द्र मोदी का समर्थन करने वाले शुरुआती लोगों में शामिल था लेकिन सच यह है कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के साथ हमारा कोई वैचारिक जुड़ाव नहीं है। हमारी विचारधारा जद(यू) से मेल खाती है। मैं समता पार्टी का संस्थापक सदस्य रहा हूं, जो जद(यू) का पहले का स्वरूप थी। मेरी सहानुभूति अब भी उसी आंदोलन के साथ है।’’
बता दें कि उपेंद्र कुशवाहा पहले जदूय के साथ थे। फिर बाहर हुए और फिर से जदयू में ही वापसी की थी। पार्टी का भी तब विलय करा दिया था। लेकिन कुशवाहा ने 2023 में जद(यू) छोड़ दी थी। उस समय उन्होंने आरोप लगाया था कि पार्टी का लालू प्रसाद के राष्ट्रीय जनता दल (राजद) में विलय करने के लिए ’’सौदा’’ हुआ है। इसके बाद फिर से अपनी पार्टी बनाई।
