बिहार विधानपरिषद की 10 सीटों पर चुनाव के लिए घमासान शुरू हो गया है। इनमें एक सीट पर उपचुनाव हो रहा है। इन सीटों में से चार पर जनता दल यूनाइटेड के बाद भारतीय जनता पार्टी ने अपने उम्मीदवारों के नामों का एलान किया है। भाजपा के उम्मीदवारों में सबसे ज्यादा जिस नाम की चर्चा हो रही है वो है भोजपुरी के पावर स्टार पवन सिंह की। आज भले ही भाजपा ने पवन सिंह को टिकट दिया हो लेकिन कभी भाजपा ने ही पवन सिंह को पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा दिया था। हालांकि बाद में उनके बीच सब सामान्य हो गया और उन्होंने बिहार चुनाव में भाजपा के स्टार प्रचारक की भूमिका निभाई।
2017 में भाजपा में आए और 2024 में हो गए बाहर
भोजपुरी के पावर स्टार का भारतीय जनता पार्टी के साथ जुड़ाव कोई नया नहीं है। उन्होंने साल 2017 में भगवा पार्टी ज्वाइन की थी। इसके बाद लोकसभा चुनाव में भाजपा ने उन्हें पश्चिम बंगाल के आसनसोल से अपना उम्मीदवार बनाया, लेकिन उन्होंने बागी रुख अपनाते हुए वहां से चुनाव लड़ने से मना कर दिया और बिहार के काराकाट संसदीय क्षेत्र से चुनाव लड़ा था। हालांकि इस चुनाव में पवन सिंह को हार का सामना करना पड़ा था, लेकिन उनसे ज्यादा नुकसान यहां एनडीए को उठाना पड़ा था। निर्दलीय रूप से केवल उनके लड़ने भर से ही सीपीआई माले के राजाराम कुशवाहा को फायदा हुआ और उन्होंने पवन सिंह के साथ ही भाजपा समर्थित एनडीए उम्मीदवार और आरएलएम के अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा को भी हार का सामना करना पड़ा था। इस संसदीय क्षेत्र में राजपूत और कोइरी गोलबंदी के कारण भाजपा को नुकसान उठाना पड़ा था।
वहीं, पवन सिंह के इस कदम को अनुशासनहीनता मानते हुए भाजपा ने 22 मई 2024 को पवन सिंह को पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा दिया था। उस समय पवन सिंह बिहार प्रदेश कार्यसमिति के सदस्य थे।
2026 में पार्टी में वापसी के बाद मिला बड़ा राजनीतिक मौका
हालांकि बाद में उनके और पार्टी नेतृत्व के बीच दूरियां कम हुईं। आज से करीब 3 महीने पहले दिल्ली में उन्होंने भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन से महत्वपूर्ण मुलाकात की थी। उस दौरान उन्होंने खुद को पार्टी का समर्पित कार्यकर्ता बताया था। तब उन्होंने कहा था कि संगठन जो जिम्मेदारी देगा, उसे निभाएंगे। अब विधान परिषद उम्मीदवार बनाए जाने को उसी राजनीतिक पुनर्वास के रूप में देखा जा रहा है।
बिहार चुनाव में स्टार प्रचारक की भूमिका
2025 के बिहार विधानसभा चुनाव में भाजपा ने पवन सिंह की लोकप्रियता का भरपूर इस्तेमाल किया। वे पार्टी के चुनावी कार्यक्रमों, जनसभाओं और रोड शो में लगातार सक्रिय रहे। भोजपुरी भाषी क्षेत्रों में उनकी मौजूदगी ने भाजपा के प्रचार अभियान को खास पहचान दी। उनके लोकप्रिय गीत चुनावी माहौल में लगातार सुनाई देते रहे और पार्टी कार्यकर्ताओं के बीच उत्साह बढ़ाने का काम करते रहे। भाजपा के कई वरिष्ठ नेताओं के साथ उन्होंने मंच साझा किया और चुनावी प्रचार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
भोजपुरी जगत के सबसे लोकप्रिय चेहरों में एक हैं पवन सिंह
आरा के रहने वाले पवन सिंह भोजपुरी फिल्म और संगीत जगत का बड़ा नाम हैं। अभिनय के साथ-साथ उन्होंने गायकी में भी बड़ी पहचान बनाई है। उनका जन्म 5 जनवरी 1986 को बिहार के भोजपुर जिले में हुआ था। कम उम्र में ही उन्होंने संगीत की दुनिया में कदम रख दिया था। वर्ष 1997 में उनका पहला संगीत एल्बम सामने आया। बाद में उनका गीत ‘लॉलीपॉप लागेलू’ न सिर्फ भोजपुरी बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी लोकप्रिय हुआ। इसके बाद उन्होंने कई सुपरहिट गीत और फिल्में दीं, जिससे उनकी पहचान भोजपुरी इंडस्ट्री के बड़े सितारों में होने लगी।
विवादों से घिरे रहते हैं पवन सिंह
पवन सिंह अक्सर अपनी निजी जिंदगी को लेकर विवादों में रहते हैं। चाहें वो अक्षरा सिंह से रिश्तों की खबरें हों या दूसरी पत्नी से तलाक और विवाद। उनकी निजी जिंदगी की बात करें तो उन्होंने दो शादियां की हैं। उनकी पहली पत्नी नीलम सिंह थीं, जिनका शादी के कुछ महीनों बाद ही 2015 में निधन हो गया था। नीलम ने मुंबई स्थित घर में आत्महत्या कर ली थी। इस घटना ने पवन सिंह को गहरे सदमे में डाल दिया। पहली पत्नी के निधन के बाद पवन सिंह का नाम भोजपुरी अभिनेत्री अक्षरा सिंह के साथ जोड़ा जाने लगा। हालांकि यह रिश्ता लंबे समय तक नहीं चल सका। बाद में दोनों के बीच दूरियां बढ़ीं और मामला सार्वजनिक विवाद तक पहुंच गया। रिश्ता खत्म होने के बाद अक्षरा सिंह ने कई इंटरव्यू में पवन सिंह पर गंभीर आरोप लगाए थे। उन्होंने कहा था कि रिश्ते के दौरान उन्हें मानसिक और शारीरिक प्रताड़ना का सामना करना पड़ा।फिर मार्च 2018 में पवन सिंह ने ज्योति सिंह से विवाह किया। दोनों के बीच भी सबकुछ सामान्य नहीं है। ज्योति ने पवन सिंह पर घरेलू हिंसा और कई अन्य गंभीर आरोप लगाकर 2022 में तलाक की अर्जी दाखिल की थी।