कौन थे ‘फरसा वाले बाबा, जिन्होंने आठ साल की उम्र में ही छोड़ दिया था घर,ईद वाले दिन उनकी मौत के बाद क्यों भड़क उठी मथुरा नगरी?

आज ईद वाले दिन सुबह से ही मथुरा के कोसीकलां और छाता इलाकों में तनाव की स्थिति बनी हुई है। ब्रज के प्रसिद्ध गौरक्षक और संत चंद्रशेखर,जिन्हें इलाके में "फरसा वाले बाबा" के नाम से जाना जाता था,की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत के बाद गौरक्षकों का गुस्सा फूट पड़ा है। ऐसे में सवाल है कि आखिर कौन थे ‘फरसा वाले बाबा जिनकी मौत के बाद इलाके में तनाव फैल गया है...

उत्तर प्रदेश के मथुरा जिले के छाता इलाके में आज ईद के दिनल शनिवार तड़के बाबा चंद्रशेखर उर्फ ‘फरसा वाले बाबा’ की मौत हो गई। इसके बाद हालात अचानक तनावपूर्ण हो गए। सुबह बड़ी संख्या में लोग सड़कों पर उतर आए और दिल्ली-आगरा हाईवे को जाम कर दिया। गुस्साई भीड़ ने पुलिस पर पथराव भी किया,जिसमें कई पुलिस वाहन क्षतिग्रस्त हो गए। हालात इतने बिगड़ गए कि स्थिति संभालने के लिए पुलिस को आंसू गैस के गोले छोड़ने पड़े और अतिरिक्त सुरक्षा बलों को तैनात करना पड़ा। ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर कौन थे ‘फरसा वाले बाबा’, जिनकी मौत के बाद इतना बड़ा जनाक्रोश देखने को मिला।

कौन थे ‘फरसा वाले बाबा, जिन्होंने आठ साल की उम्र में ही छोड़ दिया था घर,ईद वाले दिन उनकी मौत के बाद क्यों भड़क उठी मथुरा नगरी?

कौन थे बाबा चंद्रशेखर?

बाबा चंद्रशेखर मूल रूप से फिरोजाबाद जिले के एक गांव के रहने वाले थे। उन्होंने गो-रक्षा को अपने जीवन का मुख्य उद्देश्य बना लिया था और इसी कारण वे इलाके में एक अलग पहचान बना चुके थे। वे हर वक्त अपने हाथ में फरसा लेकर चलते थे, जो उनके व्यक्तित्व की खास पहचान बन गया। इसी वजह से लोग उन्हें ‘फरसा वाले बाबा’ कहने लगे।

200 युवाओं की टीम करती थी उनके साथ काम

बाबा चंद्रशेखर उर्फ फरसा वाले बाबा ने गोरक्षा के लिए अपना जीवन समर्पित कर दिया था। उन्होंने गांव-गांव जाकर युवाओं को अपने साथ जोड़ा और गो-सेवा के लिए एक संगठित टीम तैयार की। बताया जाता है कि करीब 200 युवाओं की एक सक्रिय टीम उनके साथ काम करती थी। इतना ही नहीं उनके समर्थकों की संख्या भी काफी अधिक थी।

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