पश्चिम बंगाल में आज विधानसभा चुनाव (West Bengal Assembly Election 2026) के तहत पहले चरण का मतदान हो रहा है। दूसरे चरण के लिए प्रचार जोरों पर है। राज्य की कुल 294 सीटों के लिए दो चरणों में मतदान होना है। जिसमें पहले चरण का मतदान आज 23 अप्रैल को हो रहा है, इस चरण में 152 विधानसभा सीटों के लिए वोट डाले जा रहे हैं। दूसरे चरण के तहत राज्य की 142 विधानसभा सीटों के लिए 29 अप्रैल को मतदान होगा। 4 मई को मतगणना होगी और इसी के साथ यह भी पता चल जाएगा कि ममता बनर्जी 'दीदी' एक बार फिर बहुमत हासिल करके सत्ता में लौटती है या भाजपा और कांग्रेस जैसे विपक्षी दल उन्हें सत्ता से बेदखल कर पाते हैं। ये तो हुई चुनाव की बात। क्या आप जानते हैं कि पश्चिम बंगाल या कहा जाए बंगाल को उसका ये नाम कैसे मिला? चलिए जानते हैं -
बंगाल नाम कैसे पड़ा?
आजादी से पहले बंगाल (Bengal) एक ही था, जिसे अंग्रेजों ने दो हिस्सों में बांट दिया था। बाद में पूर्वी बंगाल आज का बांग्लादेश बन गया, जबकि पश्चिम बंगाल आज भी इसी नाम से जाना जाता है। इसलिए इस आर्टिकल में हम बात सिर्फ बंगाल की करेंगे, क्योंकि इस नाम की कहानी विभाजन से सदियों पुरानी है। बंगाल को बंगला भी कहा जाता है। बंगाल को उसका नाम प्राचीन वंगा या बंगा राज्य से मिला है। इसका उल्लेख प्रारंभिक संस्कृत साहित्य में भी मिलता है। हालांकि, बंगाल का शुरुआती इतिहास कुछ स्पष्ट नहीं है। लेकिन तीसरी शताब्दी ईशा पूर्व से इस क्षेत्र का इतिहास ज्ञात है।
वेदिग ग्रंथों और महाभारत में इस क्षेत्र को वंगा (बंगा) राज्य कहा गया है। इसमें बंगाल के दक्षिणी हिस्से शामिल थे। 11वीं सदी में इस क्षेत्र के लिए वंगाला (Vangala) शब्द का प्रयोग किया गया। उस समय गंगा डेल्टा के पूर्वी हिस्से को इस नाम से पुकारा जाता था। जबकि 13वीं सदी में इस बंगाला (Bangalah) कहा गया, जहां से इस क्षेत्र को उसका मौजूदा नाम मिला।
मौर्य साम्राज्य का हिस्सा था बंगाल
आज का पश्चिम बंगाल और बांग्लादेश जिसे पूर्व में बंगाल कहा जाता था। तीसरी शताब्दी ईसा पूर्व में यह पूरा क्षेत्र मौर्य साम्राज्य का हिस्सा बन गया था। भारत के महान सम्राट अशोक को यह भूभाग विरासत में मिला था।
गुप्त साम्राज्य का भी हिस्सा रहा बंगाल
मौर्य साम्राज्य के पतन के बाद इस क्षेत्र में कुछ समय के लिए अव्यवस्था की स्थिति रही। चौथी शताब्दी ईस्वी में यह क्षेत्र समुद्रगुप्त के नेतृत्व वाले गुप्त साम्राज्य में शामिल हो गया था। बाद में बंगाल के पूरा क्षेत्र पर पाल वंश के शासकों ने राज किया। इसी पाल वंश ने इस पूरे क्षेत्र में स्थिरता और सांस्कृति विकास को बढ़ावा दिया।
पांच सदी तक मुस्लिम शासकों के नियंत्रण में रहा बंगाल
13वीं सदी की शुरुआत से लेकर 18वीं सदी के मध्य तक बंगाल के इस पूरे क्षेत्र में मुस्लिम शासकों का नियंत्रण रहा। इस दौरान कभी यह दिल्ली सल्तनत के अधीन तो कभी स्वतंत्र शासकों ने यहां राज किया। 18वीं सदी में जब अंग्रेज आए उस समय इस पूरे पर क्षेत्र नवाब राज करते थे।
पश्चिमी बंगाल का नाम पश्चिम बंगाल कैसे पड़ा यह तो अब आप जानते ही हैं कि जब अंग्रेजों ने बंगाल विभाजन किया तो एक हिस्से को पूर्वी और दूसरे को पश्चिमी बंगाल कहा गया। आजादी के बाद भी जो हिस्सा भारत में आया उसे पश्चिम बंगाल ही कहा जाता रहा।