मार्च का महीना, भीषण गर्मी और आने वाले दिनों के बारे में सोचकर ही लोग घबराने लगे थे। तभी एक वेस्टर्न डिस्टर्बेंस हवा में नमी लेकर आया और मौसम को सुहावना कर गया। इसके तुरंत बाद दूसरा वेस्टर्न डिस्टर्बेंस आया और आंधी-बारिश और ओलावृष्टि का नया दौर ले आया। यही नहीं, ऊंचे पहाड़ी इलाकों में जमकर बर्फबारी भी हुई। एक के बाद एक आए इन दो वेस्टर्न डिस्टर्बेंस से जैसे एक बार फिर से ठंड लौट आई, पंखे बंद हो गए। जी हां, पिछले एक हफ्ते में मौसम के करवट लेने की यही कहानी है। अगर आपको लगता है कि ये कहानी खत्म हो गई, बारिश का दौर खत्म हो गया और फिर से तेज धूप और हीटवेव का प्रकोप झेलना पड़ेगा तो आप गलत हैं। क्योंकि अब जो मौसम बन गया है, वह जल्दी पलटी मारने वाला नहीं है। चलिए जानते हैं मौसम विभाग ने इस बारे में क्या कहा है -
फिलहाल गर्मी की छुट्टी, अभी और होगी बारिश
आमतौर पर सर्दियों के ठंडे मौसम में पश्चिमी की ओर से आने वाले वेस्टर्न डिस्टर्बेंस के कारण उत्तर भारत में बारिश होती है। मौजूदा वेस्टर्न डिस्टर्बेंस खास है। सिर्फ इसलिए नहीं कि इसके कारण इस मौसम में बारिश हो रही है, बल्कि इसलिए कि इसका शेप यानी आकार अनोखा है। अनोखा इसलिए भी है क्योंकि इस वेस्टर्न डिस्टर्बेंस ने मार्च में अचानक बढ़ी गर्मी से उत्तर भारत के मैदानी इलाकों और पश्चिमी भारत में लोगों को राहत दी है।
तीन देशों में फैला यह वेदर सिस्टम
इस वेस्टर्न डिस्टर्बेंस का आकार सामान्य से बिल्कुल अलग है। इसमें एक सीधी कम दबाव की लाइन भी है, जो सीधी रेखा में हजारों किलोमीटर तक फैली है। यह लाइन अफगानिस्तान के आसमान से शुरू होकर पाकिस्तान को पार करती हुई, भारत तक आती है। आमतौर पर इस तरह के वेदर सिस्टम में एक कर्व लाइन दिखती है, लेकिन इस बार वेस्टर्न डिस्टर्बेंस एक सीधी लाइन में आया है।
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ऐसे आकार और सीधे लाइन में आने वाले वेस्टर्न डिस्टर्बेंस के चलते तेज तूफान और भारी बारिश होती है। बिजली चमकने के साथ ही तेज झौंकेदार हवाएं (Gusty Winds) भी ऐसे सिस्टम के चलते आते हैं। यह सब इस समय उत्तर भारत के तमाम इलाकों में अभी महसूस किए जा रहे हैं। सीधी ट्रॉट लाइन इस वेदर सिस्टम को काफी मजबूती दे रही है। घूमने की बजाय निम्न दबाव का क्षेत्र तीन देशों के वायुमंडल में सीधी रेखा के रूप में फैला हुआ है।
मौसम विभाग की चेतावनी
इसको लेकर मौसम विभाग ने चेतावनी भी जारी की है। मौसम विभाग का कहना है कि जो भी लोग इस वैदर सिस्टम की सीधी लाइन में रहते हैं, वह अलर्ट रहें और IMD के आधिकारिक अपडेट पर नजर बनाए रखें, ताकि तूफान के दौरान वह सुरक्षित रह सकें।
वेस्टर्न डिस्टर्बेंस के आने से क्या फर्क पड़ा
याद करें अभी एक हफ्ते पहले तक जब वेस्टर्न डिस्टर्बेंस नहीं आया था, उत्तर भारत के मैदानी इलाकों में तापमान काफी ज्यादा दर्ज किया जा रहा था। दिल्ली जैसे शहरों में पारा मार्च की शुरुआत में ही 37 डिग्री के करीब पहुंच गया था। ऐसा लग रहा था, जैसे मई का महीना शुरू हुआ हो। इससे लाखों लोगों को दिक्कतें शुरू हो गई थीं।
वेस्टर्न डिस्टर्बेंस के आने पर मौसम में बड़ी ही तेजी से बदलाव देखने को मिला। बारिश शुरू हो गई, थंडरस्टॉर्म आए और ठंडी हवा के चलते तापमान में 7 डिग्री तक की गिरावट आ गई। IMD का अनुमान है कि आज यानी शुक्रवार 20 मार्च तक उत्तर भारत और उत्तर पश्चिमी भारत में बिजली कड़कने और झौंकेदार हवाओं के साथ बारिश का दौर जारी रहेगा।
इस तरह से वेस्टर्न डिस्टर्बेंस उत्तर और उत्तर-पश्चिमी भारत के लोगों के लिए बड़ी राहत लेकर आया। कई इलाकों में ओले भी गिरे, इस वेस्टर्न डिस्टर्बेंस के चलते हवा में नमी आई और देखते ही देखते मौसम ने करवट ले ली। IMD अब भी इस पर कड़ी नजर रखे हुए है। उम्मीद की जा रही है कि मार्च के महीने अब वैसी गर्मी नहीं लौटेगी, जैसी महीने की शुरुआत में देखने को मिल रही थी।
