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UP : SIR के बाद छूटे मतदाताओं को जोड़ने का प्लान, घर-घर पहुंचेंगे BLO; यूपी CEO ने क्या कहा?

यूपी में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) की वास्तविक स्थिति और पात्र वोटर्स के नाम कटने या जोड़ने के संबंध में मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा ने स्थिति स्पष्ट की है। उन्होंने कहा कि हम विशेष अभियान के तहत सभी समस्याओं का निवारण करने का प्रयास करेंगे।

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(सांकेतिक फोटो-Istock)

लखनऊ : उत्तर प्रदेश में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR)- 2026 के बाद भी यदि किसी पात्र वोटर्स का नाम सूची में शामिल नहीं है या किसी कारणवश छूट गया है तो उसे जोड़ने के लिए विशेष अभियान चलाया जाएगा। इस काम में बूथ लेवल अधिकारी (BLO) पुरानी और मतदाता सूची का मिलान कर छूटे मतदाताओं को चिन्हित करेंगे और घर-घर जाकर वर्तमान स्थिति का सत्यापन करेंगे। साथ ही पहली बार वोटर बनने वाले युवाओं और अन्य पात्र नागरिकों से फार्म-6 भरवाकर उनका नाम वोटर्स लिस्ट में शामिल किया जाएगा। इस पर मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा का बयान आया है, जिसमें संबंधित प्रक्रिया से जुड़े तमाम सवालों के जवाब हैं।

मतदाता सूची में नाम जोड़ने के लिए चलाए जा रहे विशेष अभियान पर नवदीप रिणवा ने कहा कि हम जो विशेष अभियान चला रहे हैं, उसका उद्देश्य उन मतदाताओं की जांच और सत्यापन करना है, जिनके नाम SIR से पहले मतदाता सूची में थे, लेकिन अंतिम मतदाता सूची में उनके नाम उपलब्ध नहीं हैं। BLO को निर्देश दिया गया है कि वे इस तरह की त्रुटियों और मतदाताओं के नामों की जांच एवं सत्यापन करें, ताकि कोई भी पात्र मतदाता सूची से छूटने न पाए।फॉर्म-6 कभी भी जमा किया जा सकता है। विशेष अभियान शुरू होने से पहले भी कोई व्यक्ति फॉर्म-6 जमा कर सकता है। जहां तक तारीखों का सवाल है, इन्हें आम जनता की सुविधा को ध्यान में रखते हुए निर्धारित किया गया है।

23 अक्टूबर को लेकर जो आशंकाएं जताई जा रही हैं, उस पर कहना चाहूंगा कि उत्तर प्रदेश में अगले साल विधानसभा चुनाव होने हैं। कानून के अनुसार, उत्तर प्रदेश की मतदाता सूची का पुनरीक्षण भी किया जाएगा। जब तक भारत निर्वाचन आयोग (ECI) कोई अलग निर्णय नहीं लेता, लोगों को अपना नाम मतदाता सूची में जांचने और उसे सुनिश्चित करने के पर्याप्त अवसर मिलेंगे। हम यह सुनिश्चित करने का प्रयास कर रहे हैं कि कोई भी पात्र व्यक्ति मतदाता सूची से बाहर न रह जाए।

मतदाता सूची में दोहरे नामों की समस्या SIR से पहले भी मौजूद थी और कुछ कारणों से अब भी है। जब फॉर्म-6 जमा किया जाता है या एक ही व्यक्ति के लिए कई फॉर्म जमा हो जाते हैं, तो सिस्टम तत्काल दोहराव की पहचान नहीं कर पाता। यदि कुछ दिनों के अंतराल पर कई फॉर्म-6 जमा किए गए हैं, तो उस समय सभी फॉर्म प्रक्रिया में होते हैं और दोहराव सामने नहीं आता। कुछ महीनों बाद जब हम विशेष अभियान चलाते हैं, तब इनकी जांच की जाती है और दोहराए गए नामों को हटाया जाता है। यह एक सतत प्रक्रिया है।

समाजवादी पार्टी के आरोपों का दिया जवाब

समाजवादी पार्टी ने दोहरे मतदाताओं के संबंध में करीब 25 ज्ञापन सौंपे हैं। हमारी जांच में पाया गया है कि इन शिकायतों में से लगभग 85 प्रतिशत का निस्तारण पहले ही किया जा चुका है। हाल ही में समाजवादी पार्टी ने 100 विधानसभा क्षेत्रों का डेटा दिया है। हमने उन्हें आश्वस्त किया है कि इस डेटा की जांच की जाएगी और जांच के बाद उन्हें जानकारी दी जाएगी। कुछ पन्नों पर दोहरे मतदाताओं के रूप में अलग-अलग नाम दर्ज थे। इस संबंध में कुछ शिकायतें हो सकती हैं, लेकिन यह भी संभव है कि संबंधित नाम हम पहले ही हटा चुके हों। हम इसकी जांच करेंगे और सूची प्रकाशित करेंगे।

Vinod Mishra
विनोद मिश्राauthor

दिल्ली से लेकर यूपी की राजधानी लखनऊ में करीब दो दशक से टीवी पत्रकारिता कर रहें है। यूपी की सियासत की नब्ज और ब्यूरोकेसी की समझ है। पत्रकारिता एक पैशन है।

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