उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर बड़ा फेरबदल देखने को मिल रहा है। समाजवादी पार्टी से बगावत कर चुके गौरीगंज से विधायक राकेश प्रताप सिंह और कालपी विधानसभा सीट से विधायक विनोद चतुर्वेदी आगामी 14 अक्टूबर को आधिकारिक तौर पर भारतीय जनता पार्टी की सदस्यता ग्रहण करेंगे। पार्टी के वरिष्ठ नेताओं, राष्ट्रीय महासचिव स्मृति ईरानी और प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी की मौजूदगी में इन दोनों नेताओं की जॉइनिंग कराई जाएगी।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और सपा प्रमुख अखिलेश यादव (फोटो- PTI & samajwadiparty)
कभी थी वापसी की अटकलें
सपा के बागी विधायकों को लेकर चर्चा चल रही। इनकी सपा में वापसी की अटकलें भी लग रही थी। 5 अक्टूबर को इन दोनों ने सीएम योगी से उनके आवास पर मुलाक़ात भी की थी। इस हाई-प्रोफाइल मुलाकात के बाद से ही राजनीतिक गलियारों में इनके भाजपा में शामिल होने की चर्चाएं तेज हो गई थीं।
राज्यसभा चुनाव में हुई थी बगावत
यह पूरा घटनाक्रम फरवरी 2024 में हुए उत्तर प्रदेश राज्यसभा चुनाव से जुड़ा हुआ है। उस दौरान समाजवादी पार्टी के पाले में सेंधमारी करते हुए कई विधायकों ने पार्टी लाइन के खिलाफ जाकर भाजपा के पक्ष में क्रॉस-वोटिंग की थी। इसी बगावत के चलते सपा के तीसरे उम्मीदवार को हार का सामना करना पड़ा था और भाजपा के आठवें उम्मीदवार की जीत सुनिश्चित हुई थी। सपा के इन बागी विधायकों की सूची में राकेश प्रताप सिंह और विनोद चतुर्वेदी के अलावा कई अन्य बड़े नाम भी शामिल रहे हैं।
मनोज कुमार पाण्डेय (ऊंचाहार)
रायबरेली से विधायक और पूर्व मंत्री मनोज पाण्डेय ने राज्यसभा चुनाव के दौरान खुलकर भाजपा के पक्ष में पाला बदला था और ब्राह्मण समुदाय में मजबूत पकड़ रखते हैं। फिलहाल योगी सरकार में कैबिनेट मंत्री है।
अभय सिंह (गोसाईंगंज)
अयोध्या की गोसाईंगंज सीट से विधायक अभय सिंह ने भी वैचारिक मतभेदों के चलते क्रॉस-वोटिंग की थी। फिलहाल भाजपा के साथ है, लेकिन आधिकारिक जोइनिंग नही हुई है।
पूजा पाल (चायल)
कौशाम्बी की चायल सीट से सपा विधायक पूजा पाल ने भी पार्टी के निर्देशों के विपरीत जाकर भाजपा उम्मीदवार के पक्ष में मतदान किया था। भाजपा ने फिलहाल इन्हें संगठन में जिम्मेदारी दी है।
इस सूची में राकेश पाण्डेय (जलालपुर) समेत अन्य असंतुष्ट विधायक भी शामिल रहे, जिन्होंने पार्टी से अपनी दूरियां बढ़ा ली थीं। राज्यसभा चुनाव के दौरान इन नेताओं की क्रॉस-वोटिंग से सपा के समीकरण पूरी तरह बिगड़ गए थे। अब इन बागी नेताओं का एक-एक करके खुले तौर पर भाजपा में शामिल होना यह साफ करता है कि उत्तर प्रदेश के आगामी राजनीतिक समीकरणों और जोड़-तोड़ की राजनीति में नए अध्याय जुड़ रहे हैं।
