पटना

बिहार विधानसभा: काले लिबास में विपक्षी सदस्यों को देख बिफरे नीतीश कुमार , बोले- 'खाय-खाय नारा आपके लिए बेहतर रहता'

बिहार विधानसभा में राज्य विधानमंडल के दोनों सदस्यों में विपक्षी दलों के सदस्यों के काले कपड़े पहन कर आने को लेकर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने शुक्रवार को उनकी आलोचना की।

Image

सदन में बोलते हुए बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार (प्रतीकात्मक फोटो -PTI)

पटना: बिहार में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के विरोध में राज्य विधानमंडल के दोनों सदस्यों में विपक्षी दलों के सदस्यों के काले कपड़े पहन कर आने को लेकर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने शुक्रवार को उनकी आलोचना की।कुमार (75) ने राज्य विधानमंडल के मानसून सत्र के अंतिम दिन यह नाराजगी जताई। सत्र के दौरान, विपक्षी दलों के सदस्यों ने राज्य में जारी एसआईआर की कवायद के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया।

विपक्ष ने आरोप लगाया कि इस कवायद का उद्देश्य आगामी महीनों में होने वाले विधानसभा चुनाव में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) को जीत दिलाने में मदद करना है।बिहार विधान परिषद में विधान पार्षदों (एमएलसी) ने एसआईआर के साथ-साथ राज्य सरकार के खिलाफ नारे लगाए। मुख्यमंत्री कुमार विधान परिषद के सदस्य हैं।राज्य विधानमंडल के उच्च सदन में विपक्ष की नेता और पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी ने कार्यवाही शुरू होने से पहले संवाददाताओं से कहा कि कल विधानसभा के अंदर तेजस्वी यादव पर हमला हुआ। राज्य के सभी विधायकों को अब अपनी जान जाने का डर सता रहा है।

तेजस्वी यादव का आरोप

न्यूज एजेंसी भाषा के मुताबिक विधानसभा में बृहस्पतिवार को भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के एक विधायक को अपनी मेज पर लगी माइक को उखाड़कर विपक्ष की ओर बढ़ते हुए देखा गया था। बाद में, सदन में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने दावा किया था कि विधायक कि मुझ पर हमला करने के लिए आ रहे थे, लेकिन मुझे मेरे पार्टी सहयोगियों ने बचा लिया। भाजपा चाहे तो मुझे मरवा दे। मैं कोई बचाव नहीं करूंगा। मैं अपनी लाइसेंसी बंदूक भी सौंपने को तैयार हूं। विधान परिषद में, आज दोपहर कार्यवाही शुरू होते ही विपक्षी दलों के सदस्यों ने बृहस्पतिवार की घटना का विरोध करना शुरू कर दिया और राज्य सरकार हाय-हाय के नारे लगाने लगे।

जारी रहा हंगामा

सदन के सभापति अवधेश नारायण सिंह ने मजाकिया टिप्पणी के साथ सदस्यों को शांत करने की कोशिश की। उन्होंने कहा कि यदि आप यहां हाय-हाय नारेबाजी करते रहेंगे, तो चुनाव के बाद भी आप हाय-हाय करेंगे।अगले कुछ महीने में, बिहार विधानसभा चुनाव के लिए तारीखों का ऐलान किये जाने की संभावना है। विधान परिषद में हंगामा जारी रहने के बीच कुछ मिनट बाद, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार अपने स्थान पर खड़े हो गए और कहा कि आप सभी हाय-हाय चिल्ला रहे हैं। खाय-खाय नारा लगाना आपके लिए बेहतर रहता।

काले लिबास पर बिफरे नीतीश कुमार

कुमार बार-बार मीडिया दीर्घा की ओर देखते नजर आए, जिससे यह प्रतीत हो रहा था कि वह चाहते हैं कि संवाददाता विपक्ष के अमर्यादित व्यवहार की रिपोर्टिंग करें। उन्होंने अपनी नाराजगी जताते हुए कहा कि आप लोग काले कपड़े पहनकर यहां आ रहे हैं। इसका क्या मतलब है? आपने कभी कोई समझदारी वाला काम नहीं किया। सत्र का आखिरी दिन है और आप समय बर्बाद कर रहे हैं। मुख्यमंत्री ने राबड़ी देवी की ओर इशारा करते हुए कहा कि उन्होंने शायद कोई निर्देश दिया होगा और आप सभी, उनकी पार्टी के लोग और सहयोगी उसका पालन करने लगे और काले कपड़े पहनकर यहां आ गए। आपने पहले कब इस तरह के कपड़े पहने थे? विपक्ष द्वारा हंगामा जारी रखे जाने पर सभापति ने कार्यवाही दोपहर दो बजे तक के लिए स्थगित कर दी।

हंगामेदार रहा सत्र

इससे पहले, विधानसभा की कार्यवाही पूर्वाह्नन 11 बजे शुरू होने पर मुख्यमंत्री ने इसी तरह की नाराजगी विधानमंडल के निचले सदन में भी जताई। अध्यक्ष ने विपक्षी दलों के विधायकों से संयम बरतने का अनुरोध किया तथा उन्हें बताया कि सदन की कार्यवाही देखने के लिए कुछ स्कूली बच्चों को आमंत्रित किया गया है। वहीं, इस बीच विपक्षी दलों के कुछ सदस्य आसन के करीब आ गये थे।विपक्षी दलों के कुछ सदस्यों ने हंगामा जारी रखा और रिपोर्टिंग स्टाफ के लिए रखे गए फर्नीचर को पलटने की कोशिश की।इसके बाद, विधानसभा अध्यक्ष को सदन की कार्यवाही शुरू होने के कुछ ही मिनट के भीतर अपराह्न दो बजे तक के लिए स्थगित करनी पड़ी। (भाषा इनपुट)

Sanjeev Dubey
संजीव कुमार दुबेauthor

पत्रकारिता में मेरे सफर की शुरुआत 20 साल पहले हुई। 2002 अक्टूबर में टीवी की रुपहले दुनिया में दाखिल हुआ। शुरुआत टीवी की दुनिया के उस पहलू से हुई जहां हर खबर को उसके मुताबिक आकार दिया जाता है यानी उसे कसा जाता है। सहारा टीवी में मेरे कामकाज की शुरुआत पैकेजिंग से हुई जहां खबरों को अलग-अलग प्रारूपों में गढ़ने का काम होता है। फिर पीसीआर में आउटपुट एडिटर की भूमिका निभाने का मौका मिला जहां तुरंत निर्णय कर खबरों को ब्रेक करने की चुनौती रहती है। न्यूजरूम की गहमागमी के बीच रनडाउन तैयार करने की जिम्मेदारी भी बखूबी निभाई। यहां ब्रेकिंग, हार्ड कोर की खबरों और फीचर्ड प्रोग्रामिंग ने मेरे अनुभव का दायरा तो बढ़ाया ही उसमें गहराई एवं पैनापन भी दिया। 2011 में टेलिविजन न्यूज की दुनिया को अलविदा कहना पड़ा। अक्टूबर 2011 में Zee News की हिंदी वेबसाइट को अपनी अगवुाई में लॉन्च करने का मौका मिला। डिजिटल की दुनिया और टीवी की दुनिया में खबरें परोसने और खबरों को दिखाने का अंदाज बिल्कुल अलग था। मैं उस दौर में दस्तक दे चुका था जब टीवी भी स्मार्टफोन पर देखा जाने लगा था। डिजिटल पर भी ब्रेकिंग थी। अगर टीवी में प्रोग्रामिंग थी तो यहां भी बतौर फीचर, सॉफ्ट स्टोरीज का विशाल संसार था। एक नया मीडियम जो स्मार्टफोन पर बखूबी देखा और समझा जा सकता था। डिजिटल की इस दुनिया में टीवी और अखबार दोनों समाहित थे। यहां काम करते हुए डिजिटल न्यूज मीडिया की बारीकियां तो सीखी हीं। साथ ही जब जी न्यूज से विदाई ली तो उस समय 33 मिलियन यूजर्स के बीच 84 मिलियन पीवीज देखने की अपार खुशियां हासिल हुईं। जी न्यूज में एक लंबी पारी खेलने के बाद जुलाई 2017 में टाइम्स नाउ नेटवर्क से जुड़ने का अवसर मिला। 2017 में ही टाइम्स नाउ की हिंदी वेबसाइट की शुरुआत हुई। यह पहला मौका था जब टाइम्स नाउ की अगुवाई में कोई हिंदी न्यूज वेबसाइट लॉन्च हुई। यहां एक नई और युवा टीम बनी। यह टीम आक्रामक अंदाज में काम करते हुए कम समय में अपनी पहचान बनाई। डिजिटल की दुनिया के बदलते संसार में अब चुनौती पीवीज की नहीं बल्कि यूजर्स की थी, जिन्हें लाना इतना आसान नहीं थी। लेकिन टीम के जज्बे, हौसले ने असाधारण चुनौतियों को भी अपनी मेहनत एवं लगन से उसे सामान्य बनाया। डिजिटल न्यूज की दुनिया में हर पल चुनौतियों के बीच नया कुछ सीखने-समझने और कुछ कर गुजरने की प्रेरणा मिलती है। यह सिलसिला आज भी अनवरत जारी है-

और पढ़ें
End of Article