Bihar News: बिहार की राजनीति में एक युग का अंत और एक नई पारी की शुरुआत होने जा रही है। प्रदेश के सबसे लंबे समय तक मुख्यमंत्री रहे और जनता दल (यूनाइटेड) के अध्यक्ष नीतीश कुमार अब राष्ट्रीय राजनीति के अखाड़े यानी दिल्ली का रुख कर रहे हैं। बिहार भाजपा नेता संजय सरावगी ने रविवार को पुष्टि की है कि नीतीश कुमार 10 अप्रैल को औपचारिक रूप से राज्यसभा सांसद के रूप में शपथ लेंगे। सूत्रों के हवाले से इससे पहले बुधवार 8 अप्रैल को बिहार सरकार की कैबिनेट की आखिरी मीटिंग भी हो सकती है। राजनीतिक गलियारों में कयास लगाए जा रहे हैं कि इस दिन नीतीश का इस्तीफा भी हो सकता है।
10 अप्रैल को लेंगे राज्यसभा सांसद की शपथ (PTI)
संजय सरावगी ने की पुष्टि
75 वर्षीय नीतीश कुमार ने पिछले महीने राज्यसभा के लिए निर्वाचित होने के बाद हाल ही में बिहार विधान परिषद (MLC) की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया था। यह इस्तीफा उनके संसदीय सफर के अगले बड़े पड़ाव का संकेत है। भाजपा नेता संजय सरावगी के अनुसार, शपथ ग्रहण समारोह के बाद बिहार में नई कैबिनेट के गठन के रोडमैप पर काम शुरू होगा। सरावगी ने जोर देकर कहा कि मुख्यमंत्री, भाजपा का केंद्रीय नेतृत्व और एनडीए गठबंधन मिलकर राज्य सरकार के भविष्य और नई कैबिनेट पर निर्णय लेंगे।
भावुक संदेश के साथ की थी घोषणा
नीतीश कुमार ने 5 मार्च को एक भावुक संदेश जारी कर अपने इस फैसले की घोषणा की थी। उन्होंने अपनी इच्छा व्यक्त की थी कि वे बिहार विधानमंडल के दोनों सदनों के साथ-साथ संसद के दोनों सदनों के सदस्य के रूप में सेवा करना चाहते थे, जो अब पूरा होने जा रहा है। उन्होंने 'विकसित बिहार' के निर्माण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई और आने वाली नई सरकार को अपना "सहयोग और मार्गदर्शन" देने का वादा किया।
एनडीए का स्वागत और सहयोगियों की प्रतिक्रिया
नेशनल डेमोक्रेटिक एलायंस (NDA) ने नीतीश कुमार के इस फैसले का स्वागत किया है और संसदीय लोकतंत्र में उनकी वापसी की सराहना की है। बिहार के उपमुख्यमंत्री विजय सिन्हा ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह उनका अपना निर्णय है और संवैधानिक व्यवस्था के तहत यदि कोई व्यक्ति एक सदन की शपथ ले रहा है, तो उसे दूसरे सदन से इस्तीफा देना ही होता है। पूर्व जदयू सांसद चंदेश्वर चंद्रवंशी ने कहा कि भले ही नीतीश कुमार दिल्ली जा रहे हैं, लेकिन बिहार की राजनीति पर उनकी पकड़ और पकड़ बनी रहेगी।
जदयू विधायक दुलाल चंद्र गोस्वामी ने अपने नेता के फैसले पर टिप्पणी करते हुए कहा कि नीतीश कुमार ने बिहार को "विकसित राज्यों की सूची" में शामिल करने का काम किया है। उन्होंने विधान परिषद से उनके इस्तीफे को राज्य के लिए एक "बड़ी क्षति" बताया। समर्थकों का मानना है कि नीतीश कुमार का विजन अब न केवल बिहार बल्कि पूरे देश के काम आएगा। उनके दिल्ली जाने से बिहार की प्रशासनिक संरचना और राजनीतिक समीकरणों में बड़े बदलाव की उम्मीद की जा रही है।
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