Delhi NCR News: दिल्ली सरकार के गुरुवार से राजधानी में गैर-BS-VI श्रेणी के वाहनों के प्रवेश पर प्रतिबंध लगाने के फैसले ने पूरे NCR में चिंता बढ़ा दी है। वायु प्रदूषण पर काबू पाने के उद्देश्य से उठाए गए इस कदम का सीधा असर गुरुग्राम, नोएडा और गाजियाबाद से रोजाना दिल्ली आने-जाने वाले लाखों लोगों पर पड़ने वाला है।
गुरुग्राम में दो लाख से ज्यादा वाहन होंगे प्रभावित
आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक गुरुग्राम में करीब दो लाख निजी वाहन ऐसे हैं, जो BS-VI मानक पर खरे नहीं उतरते। इनमें लगभग डेढ़ लाख BS-III पेट्रोल कारें और 36 हजार से अधिक BS-IV डीजल वाहन शामिल हैं। इसके अलावा शहर में 47 हजार से ज्यादा व्यावसायिक BS-IV डीजल वाहन और करीब दो हजार BS-III पेट्रोल कमर्शियल वाहन भी हैं। सार्वजनिक परिवहन की बात करें तो लगभग 2,200 बसें BS-III और BS-IV श्रेणी की हैं। वहीं, करीब 92 हजार डीजल वाहन ऐसे हैं, जो पहले ही 10 साल की तय सीमा पार कर चुके हैं।
नोएडा की चार लाख गाड़ियों पर पड़ेगी मार
नोएडा में भी हालात कुछ अलग नहीं हैं। शहर में रजिस्टर्ड लगभग 10 लाख वाहनों में से 4 लाख से ज्यादा वाहन इस प्रतिबंध से प्रभावित होंगे। इनमें 1.4 लाख BS-III वाहन शामिल हैं, जिनमें 96,210 पेट्रोल और 41,067 डीजल वाहन हैं। इसके अलावा 2.8 लाख BS-IV वाहन हैं, जिनमें अधिकांश पेट्रोल से चलते हैं। नोएडा में केवल करीब 4.2 लाख वाहन ही BS-VI मानकों के अनुरूप हैं, जिन्हें दिल्ली में प्रवेश की अनुमति होगी।
गाजियाबाद में भी आधे से ज्यादा वाहन दायरे में
गाजियाबाद में BS-VI मानक वाले वाहनों की संख्या करीब 5.5 लाख है, लेकिन इसके अलावा उतनी ही संख्या में BS-III और BS-IV श्रेणी के वाहन भी हैं, जिन पर रोक लगेगी। इनमें करीब 1.7 लाख BS-III और 3.7 लाख BS-IV वाहन शामिल हैं।
सीमाओं पर कड़ी निगरानी
दिल्ली सरकार के फैसले के बाद नोएडा-दिल्ली समेत सभी सीमाओं पर ट्रैफिक पुलिस की टीमें तैनात कर दी गई हैं। अधिकारियों के अनुसार BS-VI से कम मानक वाले किसी भी वाहन को दिल्ली में प्रवेश नहीं करने दिया जाएगा। नियमों का उल्लंघन करने पर न सिर्फ जुर्माना लगाया जाएगा, बल्कि वाहन जब्त करने की कार्रवाई भी की जाएगी।
लोगों में बढ़ी असमंजस और परेशानी
एनसीआर के हजारों कर्मचारी और कारोबारी रोजाना निजी वाहनों से दिल्ली आते-जाते हैं। अचानक लागू हो रहे इस प्रतिबंध के कारण लोगों के सामने काम पर पहुंचने और पारिवारिक जरूरतों को पूरा करने को लेकर नई चुनौतियां खड़ी हो गई हैं। अब बड़ी संख्या में लोग वैकल्पिक साधनों की तलाश में मेट्रो का रुख कर सकते हैं, जिससे उसपर भी दबाव बढ़ेगा।
