पूर्वोत्तर राज्य मणिपुर में एक बार फिर से भारी ईंधन संकट का खतरा मंडराने लगा है। नेशनल हाईवे-37 (NH-37) पर तेल टैंकरों की आवाजाही पूरी तरह से ठप होने के बाद राजधानी इंफाल सहित राज्य के विभिन्न जिलों में पेट्रोल पंपों के बाहर वाहन चालकों की किलोमीटर लंबी कतारें देखने को मिल रही हैं। लोग संभावित किल्लत के डर से गाड़ियों में तेल भरवाने के लिए घंटों इंतजार करने को मजबूर हैं। यह स्थिति 'ऑल मणिपुर पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स ट्रांसपोर्टर्स एसोसिएशन' (AMPPTA) द्वारा अनिश्चितकालीन हड़ताल और काम रोकने के ऐलान के बाद पैदा हुई है।
इंफाल-जिरीबाम हाईवे पर खड़े हुए टैंकर (सांकेतिक चित्र)
बता दें कि ट्रांसपोर्टर एसोसिएशन ने 15 जुलाई को ही मणिपुर सरकार को ज्ञापन सौंपकर 15 दिनों का अल्टीमेटम दिया था। इसके बाद 29 जुलाई को प्रशासनिक अधिकारियों के साथ हुई वार्ता का कोई ठोस नतीजा न निकलने पर एसोसिएशन ने 31 जुलाई से काम बंद करने का फैसला लिया।
उग्रवादियों की धमकियां और 6 जगहों पर अवैध वसूली
ट्रांसपोर्टर एसोसिएशन ने स्पष्ट किया है कि वे रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण इंफाल-जिरीबाम राजमार्ग पर तब तक तेल टैंकरों का संचालन नहीं करेंगे, जब तक राज्य सरकार ऑपरेटरों और ड्राइवरों की पुख्ता सुरक्षा सुनिश्चित नहीं करती।
एसोसिएशन ने आरोप लगाया कि राजमार्ग पर विभिन्न उग्रवादी समूहों द्वारा लगातार धमकियां दी जा रही हैं और बड़े पैमाने पर अवैध वसूली (Extortion) की जा रही है। एसोसिएशन के पदाधिकारी ने कहा कि 225 किलोमीटर लंबे जिरीबाम-इंफाल रास्ते पर ट्रांसपोर्टरों को कम से कम छह अलग-अलग स्थानों पर जबरन अवैध 'टैक्स' देने के लिए मजबूर किया जाता है। वसूली के प्रमुख ठिकानों में अवांगखुल, कंबिरोन, नुंगबा, जिरीबाम पार्किंग, नोनी और ओइनमलोंग शामिल हैं।
सुरक्षा की गुहार, जनता में बढ़ी घबराहट
हाईवे पर बढ़ती गुंडागर्दी और अवैध वसूली के चलते ट्रांसपोर्टरों ने ड्राइवरों की जान-माल के खतरे का हवाला देते हुए गाड़ियों के पहिए रोक दिए हैं। टैंकरों की आपूर्ति रुकने से राज्य के डिपो में ईंधन का भंडार तेजी से घट रहा है। यदि सरकार जल्द ही ट्रांसपोर्टरों की सुरक्षा मांगों का समाधान नहीं निकालती और राजमार्ग पर अवैध वसूली पर लगाम नहीं कसती, तो आने वाले दिनों में पूरे मणिपुर में आवश्यक सेवाओं और आम जनजीवन पर इसका गंभीर असर पड़ सकता है।
