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केन-बेतवा लिंक परियोजना पर क्यों मचा बवाल? विस्थापन, मुआवजा और पर्यावरण को लेकर क्या कहते हैं सरकारी आंकड़े

Ken-Betwa River Linking Project: बुंदेलखंड की जीवन रेखा कही जाने वाली महत्वाकांक्षी केन-बेतवा लिंक परियोजना हाल के दिनों में एक बार फिर राजनीतिक चर्चा और विरोध प्रदर्शनों के केंद्र में आ गई है।

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केन-बेतवा लिंक परियोजना को लेकर मचा बवाल (फाइल फोटो)

Photo : ANI

Ken-Betwa River Linking Project: बुंदेलखंड की जीवन रेखा कही जाने वाली महत्वाकांक्षी केन-बेतवा लिंक परियोजना हाल के दिनों में एक बार फिर चर्चा के केंद्र में है। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी द्वारा सोशल मीडिया पर साझा किए गए वीडियो और स्थानीय नेताओं के बयानों के बाद इस परियोजना से जुड़े पुनर्वास, मुआवजे और विस्थापन को लेकर कई तरह के गंभीर दावे किए जा रहे हैं।

हालांकि, मध्य प्रदेश शासन और स्थानीय प्रशासन के आधिकारिक आंकड़े इन दावों से बिल्कुल विपरीत कहानी बयां करते हैं। तो चलिए जानते हैं कि असल सच्चाई है क्या?

आबादी और विस्थापन के आंकड़ों का सच

आरोप: यह दावा किया जा रहा है कि इस परियोजना के कारण चारों बांधों (मझगवां, रूंझ, केन-बेतवा और नेगुवा) से लगभग 50,000 की आबादी प्रभावित हो रही है।

तथ्य: प्रशासन के आधिकारिक दस्तावेजों के मुताबिक, चारों परियोजनाओं से प्रभावित होने वाली कुल आबादी लगभग 23,000 ही है। मझगवां परियोजना के डूब क्षेत्र से महज 1 पूर्ण और 7 आंशिक गांव प्रभावित हैं, जिससे 5,640 आबादी प्रभावित हो रही है। रूंझ परियोजना के क्षेत्र की 1,906 आबादी प्रभावित है।

केन-बेतवा लिंक परियोजना (पन्ना व छतरपुर) के डूब क्षेत्र से 7 पूर्ण और 2 आंशिक गांव प्रभावित हैं, जबकि क्षतिपूर्ति वनीकरण के लिए 14 गांवों की भूमि अर्जित की गई है, जिससे कुल 5,039 परिवारों की 15,661 आबादी प्रभावित हो रही है। वहीं, नेगुवा लघु परियोजना से विस्थापन पूरी तरह शून्य है।

रिकॉर्ड-तोड़ विशेष पुनर्वास पैकेज

केन-बेतवा परियोजना के तहत प्रभावित 22 गांवों के कुल 5,039 विस्थापित परिवारों के पात्र हितग्राहियों के लिए 12.50 लाख प्रति परिवार की दर से कुल 604.745 करोड़ का विशेष पुनर्वास पैकेज स्वीकृत किया गया है। सबसे बड़ी बात तो यह है कि इस स्वीकृत राशि का 96 फीसदी भुगतान पहले ही किया जा चुका है। यह मुआवजा वितरण करीब डेढ़ वर्ष पूर्व ही पूरा कर लिया गया था।

इसके साथ ही, छतरपुर जिले के ग्राम करीदिया में 179 प्लॉट, ग्राम राईपुरा में 154 प्लॉट और ग्राम सलैया में 70 प्लॉटों का आवंटन करके कॉलोनी के रूप में पुनर्वास की भव्य व्यवस्था की जा रही है, जहां विद्युत और पानी जैसी मूलभूत सुविधाएं दी जा रही हैं।

वर्षाकाल में विस्थापन के आरोपों का खंडन

आरोप है कि मानसून और वर्षा ऋतु के दौरान प्रभावित परिवारों को उचित वैकल्पिक व्यवस्था के बिना जबरन उनके घरों से बेघर किया गया। हालांकि, यह आरोप निराधार है, क्योंकि पन्ना जिले के 8 प्रभावित गांवों का पुनर्व्यवस्थापन वर्षाकाल शुरू होने से बहुत पहले ही सुरक्षित तरीके से संपन्न कर लिया गया था। विस्थापित परिवारों ने स्वेच्छा से इस विशेष एकमुश्त पुनर्वास पैकेज का विकल्प चुना है।

पर्यावरण, बाघ और वन संरक्षण के कड़े इंतजाम

आरोप: परियोजना के कारण 21 आदिवासी बहुल गांवों के साथ लगभग 40 लाख वृक्षों और पन्ना टाइगर रिजर्व के 100 से अधिक बाघों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका जताई जा रही है।

तथ्य: परियोजना का क्रियान्वयन शुरू करने से पहले कड़े नियमों के तहत 'इनवायरमेंट इंपैक्ट असेसमेंट' (EIA) के अंतर्गत पर्यावरण मंजूरी प्राप्त की गई है। पन्ना टाइगर रिजर्व के संरक्षण के लिए एक 'इंटीग्रेटेड लैंडस्केप मैनेजमेंट प्लान' तैयार किया गया है। भारत सरकार की शर्तों के अनुसार, वन विभाग द्वारा 'कैचमेंट एरिया ट्रीटमेंट प्लान' और 'वाइल्ड लाइफ मैनेजमेंट प्लान' पर कड़ाई से काम किया जा रहा है। साथ ही, स्टेज-2 वन स्वीकृति के कड़े नियमों के तहत एफ.आर.एल (FRL) से 10 मीटर नीचे तक वृक्षों की कटाई नहीं की गई है। इसके अलावा, प्रभावित वन क्षेत्र में वन अधिकार अधिनियम (FRA) के तहत पात्र परिवारों की संख्या शून्य पाई गई है।

सुप्रीम कोर्ट और NGT में कोई रोक नहीं

प्रदर्शनकारियों का दावा है कि परियोजना से जुड़े कानूनी विषयों पर सुप्रीम कोर्ट और नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) में प्रकरण लंबित हैं, जिससे काम पर रोक लग सकती है।

तथ्य: परियोजना क्षेत्र के लिए 6017 हेक्टेयर वन भूमि की स्टेज-1, स्टेज-2 और वाइल्ड लाइफ स्वीकृतियों की सभी शर्तों का पूर्ण पालन किया जा रहा है। वर्तमान में सुप्रीम कोर्ट या एनजीटी में परियोजना से संबंधित कोई भी अदालती मामला प्रचलन में या लंबित नहीं है।

पुलिस कार्रवाई और महिलाओं के उत्पीड़न का दावा

वीडियो में आरोप लगाया गया कि प्रदर्शन स्थल पर 2000 से 5000 पुलिस बल तैनात किया गया, तथा रात्रि 2:00 बजे पुलिस ने 50 महिलाओं को लगभग 10 किलोमीटर तक दौड़ाकर खदेड़ा।

प्रशासन ने महिलाओं को रात में प्रताड़ित करने के आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया। हालांकि, प्रशासन ने कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए न्यूनतम बल प्रयोग की बात स्वीकारी। प्रशासन के मुताबिक, बांध निर्माण स्थल पर असामाजिक तत्वों द्वारा पथराव करने और सरकारी वाहनों में तोड़फोड़ की कोशिश की गई। साथ ही कहा कि उपद्रवियों के खिलाफ सुसंगत धाराओं में मामले दर्ज किए गए हैं।

अतिरिक्त बजट स्वीकृत

इस विवाद के बीच मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव सरकार ने संवेदनशीलता दिखाते हुए पन्ना जिले के लिए 202.50 करोड़ रुपये का अतिरिक्त बजट स्वीकृत किया है। इसी प्रकार, छतरपुर के नवागत कलेक्टर मृणाल मीणा ने 11 अगस्त 2026 को ऐतिहासिक कदम उठाते हुए प्रभावित 14 गांवों में दोबारा सर्वे कराने के निर्देश दिए हैं ताकि कोई भी वास्तविक पात्र व्यक्ति मुआवजे से वंचित न रहे। इसके साथ ही, 5 गांवों के 59 लोगों के लिए 7.37 करोड़ की अतिरिक्त राशि भी स्वीकृत कर दी गई है।

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