राम मंदिर चंदा चोरी विवाद के बाद अब बदरीनाथ सहित कई मंदिरों में चढ़ावे को लेकर अनियमितताएं सामने आ रही हैं। इसी कड़ी में विश्व प्रसिद्ध मां बगलामुखी मंदिर, नलखेड़ा में दान और चढ़ावे को लेकर उठे विवाद ने भी तूल पकड़ लिया है। आगर-मालवा क्षेत्र में करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़े इस मंदिर में वित्तीय अनियमितताओं और निजी बैंक खातों के जरिए दान लेने के आरोपों के बाद जिला प्रशासन ने सख्त कदम उठाया है। कलेक्टर प्रीति यादव ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच के लिए तीन सदस्यीय समिति का गठन किया है। समिति को सात दिनों के भीतर अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं।
मां बगलामुखी मंदिर चढ़ावा विवाद की जांच रिपोर्ट 7 दिन में आएगी सामने
जिला प्रशासन की तरफ से जारी आदेश के अनुसार, मंदिर परिसर में एक गैर-सरकारी समिति पर आरोप है कि वह शासकीय प्रबंधन समिति से अलग श्रद्धालुओं से नकद और सोना-चांदी के रूप में दान स्वीकार कर रही थी। शिकायतों में यह भी कहा गया है कि दान की राशि निजी बैंक खातों में जमा की गई और वित्तीय प्रक्रिया में अनियमितताएं बरती गईं। इन गंभीर आरोपों को देखते हुए प्रशासन ने मामले की जांच कराने का फैसला लिया है।
कलेक्टर के आदेश के अनुसार, जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी बी.एस. सोलंकी को जांच समिति का अध्यक्ष बनाया गया है। समिति में जिला कोषालय अधिकारी मनीष सोलंकी और नलखेड़ा नगर परिषद की मुख्य नगरपालिका अधिकारी मिन्नी अग्रवाल को सदस्य नियुक्त किया गया है।
जांच समिति मंदिर परिसर का इंस्पेक्शन करेगी और दान व चढ़ावे की पूरी व्यवस्था की जांच करेगी। इसके अलावा रिसिप्ट बुक, बैंक अकाउंट्स, वित्तीय अभिलेखों और अन्य संबंधित दस्तावेजों की भी जांच की जाएगी। समिति यह भी पता लगाएगी कि मामले में किसी अधिकारी, कर्मचारी, मंदिर प्रबंधन या अन्य संबंधित व्यक्ति की भूमिका तो संदिग्ध नहीं है।
कलेक्टर ने जांच दल को सभी उपलब्ध सुबूतों को इकट्ठा कर तथ्यों के आधार पर अपनी रिपोर्ट, अभिमत और जरूरी रिकमंडेशन सात दिनों के भीतर प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। अब श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों की निगाहें इस जांच पर टिकी हैं। जांच रिपोर्ट आने के बाद ही यह साफ हो पाएगा कि दान और चढ़ावे को लेकर लगाए गए आरोपों में कितनी सच्चाई है और अगर अनियमितता पाई जाती है तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ क्या कार्रवाई की जाएगी।
