Varanasi News: सावन का महीना भगवान शिव को समर्पित होता है। इस पवित्र महीने में देश और दुनियाभर में शिवभक्त भगवान के मंदिर पहुंचकर जलाभिषेक करते हैं और व्रत भी रखते है। महादेव की नगरी काशी से सामाजिक सौहार्द और धार्मिक आस्था की एक ऐसी तस्वीर सामने आई है, जो धर्म की सीमाओं से आगे इंसानियत और श्रद्धा का संदेश देती है। मूल रूप से गाजीपुर की रहने वाली रुबीना अंसारी (Rubina Ansari) जन्म से मुस्लिम हैं, लेकिन लगभग एक दशक से भगवान शिव की नियमित आराधना कर रही हैं। सावन के सोमवार और महाशिवरात्रि पर वह व्रत रखती हैं और काशी के मंदिरों में पहुंचकर भगवान शिव का जलाभिषेक भी करती हैं।
रुबीना की यह आस्था काशी की उस परंपरा को भी सामने लाती है, जहां अलग-अलग धर्म और समुदाय के लोग एक-दूसरे की धार्मिक आस्थाओं का सम्मान करते हुए साथ रहते आए हैं। वह मंदिर में भगवान शिव को बेलपत्र अर्पित करती हैं और श्रद्धा के साथ पूजा-अर्चना करती हैं।
10 साल से कर रहीं शिव आराधना
रुबीना अंसारी के मुताबिक, भगवान शिव के प्रति उनकी आस्था अचानक नहीं बनी, बल्कि समय के साथ और मजबूत होती गई। पिछले लगभग 10 सालों से वह नियमित रूप से महादेव की पूजा करती आ रही हैं। सावन का महीना उनके लिए खास महत्व रखता है। सावन के सोमवार के साथ वह महाशिवरात्रि पर भी व्रत और पूजा करती हैं।
उनकी धार्मिक दिनचर्या सिर्फ शिव आराधना तक सीमित नहीं है। रुबीना के अनुसार वह पिछले 12 वर्षों से नवरात्र का व्रत भी रखती हैं। उनका कहना है कि इन धार्मिक परंपराओं के प्रति उनकी श्रद्धा लगातार बढ़ती गई और अब यह उनकी दिनचर्या का हिस्सा बन चुकी है।
शुरुआत में परिवार ने जताया विरोध
रुबीना ने बताया कि जब उन्होंने धार्मिक व्रत और पूजा-पाठ शुरू किया, तब परिवार और रिश्तेदारों ने उनके ऐसा करने पर विरोध जताया था और उन्हें ऐसा न करने की सलाह भी दी थी। हालांकि, समय के साथ उनके परिवार ने भी उनकी आस्था और समर्पण को समझा।
लगातार व्रत रखने और पूजा करने के उनके निर्णय के प्रति परिवार का नजरिया भी धीरे-धीरे बदल गया। आखिरकार परिवार ने उनकी धार्मिक आस्था का सम्मान किया और उन्हें अपनी श्रद्धा के अनुसार पूजा-पाठ करने की आजादी दी।
बता दें कि रुबीना के पिता रिटायर्ड टीचर हैं। काशी की यह तस्वीर ऐसे समय में सामने आई है, जब धार्मिक पहचान को लेकर समाज में अक्सर बहस होती रहती है। रुबीना अंसारी की कहानी सामाजिक समरसता और आपसी सम्मान का संदेश देती है।
यादव बंधुओं ने किया सबसे पहले जलाभिषेक
आज सावन के पहले सोमवार के दिन महादेव के सबबसे बड़े दरबार काशी विश्वनाथ मंदिर में सुबह से ही भक्तों की भीड़ उमड़ी है। इस दौरान काशी के यादव बंधुओं ने यहां सबसे पहले बाबा का जलाभिषेक किया। बता दें कि काशी की यह परंपरा रही है कि सावन के पहले सोमवार को सबसे पहले यादव बंधु ही बाबा का जलाभिषेक करते हैं।
आज के इस खास अवसर पर यादव बंधु पारंपरिक वेष-भूषा में मंदिर पहुंचे। कंधे पर गंगाजल से भरी गगरी और आंखों में काजल लगाए हुए यादव बंधु जब मंदिर पहुंचे तो यहां का पूरा माहौल शिवमय हो गया। इस दौरान मंदिर में डमरू की गूंज से पूरा परिसर गुंजायमान हो गया।
