केंद्र शासित प्रदेश जम्मू कश्मीर विधानसभा ने आज यानी सोमवार 28 सितंबर को पूर्ण राज्य का दर्जा तत्काल बहाल करने की मांग वाला प्रस्ताव पारित कर दिया। यह प्रस्ताव ऐसे समय पर पारित हुआ, जब विपक्षी भारतीय जनता पार्टी (BJP) के सदक्यों ने सदन से वॉकआउट कर लिया।
जम्मू-कश्मीर को पूर्ण राज्य के दर्जे वाला प्रस्ताव पारित
बता दें कि मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने पिछले ही हफ्ते शुक्रवार 25 सितंबर को यह प्रस्ताव पेश किया था। हालांकि, कई सदस्यों द्वारा इस मुद्दे पर अपनी बात रखने की इच्छा जताए जाने के कारण प्रस्ताव पर चर्चा बाद के लिए टाल दी गई थी।
सदन में विपक्षी दल भाजपा ने शुक्रवार और आज दोनों दिन प्रस्ताव का विरोध किया। पार्टी के सदस्य सदन के बीचोंबीच आ गए। यही नहीं भाजपा सदस्यों ने कार्यसूची से संबंधित कागजात फाड़े और सदन की समानांतर कार्यवाही चलाने लगे।
सदन में पास किए गए प्रस्ताव में कहा गया है, 'इस सदन द्वारा 26 जून 2000 और छह नवंबर 2024 को पारित प्रस्तावों के अलावा, यह सदन भारत सरकार से जम्मू कश्मीर का पूर्ण राज्य का दर्जा तत्काल और शीघ्र बहाल करने का आह्वान करता है और संकल्प लेता है कि यह प्रस्ताव भारत सरकार को भेजा जाए।'
बता दें कि 26 जून 2000 को फारुक अब्दुल्ला के नेतृत्व वाली नेशनल कॉन्फ्रेंस (नेकां) की सरकार ने नौ अगस्त 1953 से पहले मौजूद व्यवस्था के अनुरूप अधिक स्वायत्तता बहाल करने की मांग को लेकर एक प्रस्ताव पारित किया था। छह नवंबर 2024 को विधानसभा ने विशेष दर्जा बहाल करने की मांग वाला प्रस्ताव पारित किया था।
सत्तारूढ़ नेशनल कॉन्फ्रेंस (NC) सहित कई सदस्यों ने प्रस्ताव में संशोधन पेश किए थे। इनमें से कई सदस्यों ने मांग की थी कि प्रस्ताव में राज्य को विशेष दर्जा बहाल करने की मांग भी शामिल की जाए।
हालांकि, बहस के दौरान जवाब देते हुए मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने सदस्यों से अपने संशोधन वापस लेने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि वे 'भाजपा की इस साजिश में फंस गए हैं और उन्होंने संशोधन पेश कर दिए हैं।'
सीएम ने कहा, 'यह सदन विशेष दर्जे के लिए पहले ही दो बार प्रस्ताव पारित कर चुका है - एक बार (पूर्व मुख्यमंत्री) फारूक अब्दुल्ला के कार्यकाल में और दूसरी बार 2024 में, इस सरकार के गठन के तुरंत बाद। विशेष दर्जा ऐसा प्रावधान है, जो अन्य राज्यों के पास नहीं है। हमने केंद्र से उन विशेष प्रावधानों को बहाल करने के लिए कहा है, जो 2019 से पहले हमारे पास थे। इसलिए मैं अपने सहयोगियों से अनुरोध करता हूं कि वे इन संशोधनों पर जोर न दें, जिससे भाजपा को इसका विरोध करने का बहाना मिल जाए।'
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मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला की अपील के बाद विधानसभा अध्यक्ष ने सदस्यों से पूछा कि क्या वे अपने संशोधनों पर जोर नहीं देना चाहते हैं। इस पर सभी आठ विधायक सहमत थे। इसके बाद अध्यक्ष ने प्रस्ताव को मत विभाजन के लिए रखा। इस दौरान भाजपा सदस्य अपना विरोध जारी रखे हुए थे।
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भाजपा सदस्यों के सदन से बहिर्गमन के बीच ध्वनिमत से प्रस्ताव पारित कर दिया गया। भाजपा ने कहा कि प्रस्ताव में स्वायत्तता और विशेष दर्जे का संदर्भ संविधान का अपमान है और वह सदन में इस पर न तो चर्चा होने देगी और न ही इसे पारित होने देगी।
