Rajasthan News: मानसून की विदाई के साथ ही राजस्थान में मच्छर जनित रोगों का खतरा बढ़ गया है। डेंगू, मलेरिया और स्क्रब टाइफस के मामलों में तेजी से इजाफा हो रहा है, जिसने सरकार और स्वास्थ्य विभाग की चिंता बढ़ा दी है। केवल एक महीने में डेंगू के मरीजों की संख्या 13 गुना बढ़ी है। प्रदेश में अब तक कुल 2688 मच्छर जनित रोगी सामने आ चुके हैं।
मानसून के बाद मच्छर जनित रोगों का खतरा बढ़ा (सांकेतिक फोटो|istock)
जयपुर-कोटा, अजमेर में डेंगू का सबसे ज्यादा असर
स्वास्थ्य विभाग की रिपोर्ट के अनुसार, डेंगू ने प्रदेश के 40 जिलों में अपना असर दिखाया है, जबकि मलेरिया 37 जिलों में फैल चुका है। जयपुर, कोटा और अजमेर में डेंगू का सबसे अधिक प्रभाव देखने को मिला है। वहीं बाड़मेर, जैसलमेर और उदयपुर में मलेरिया के मामलों में तेजी आई है। चिकनगुनिया के रोगी भी जयपुर, कोटपूतली और कोटा से सामने आ रहे हैं। खासकर जयपुर में स्क्रब टाइफस के 247 मामलों के चलते एसएमएस अस्पताल में इसके लिए अलग ओपीडी शुरू करनी पड़ी है।
दैनिक भास्कर में छपी खबर के अनुसार, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग का दावा है कि टीबी की स्क्रीनिंग के तहत 93 लाख लोगों की जांच की गई है, लेकिन डेंगू और मलेरिया के बढ़ते मामलों पर कोई ठोस कदम अब तक नहीं उठाए गए हैं। स्वास्थ्य मंत्री ने 22 जुलाई को वर्षाजनित बीमारियों की निगरानी के निर्देश दिए थे। सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि केवल एक महीने में डेंगू के मामलों में 13 गुना बढ़ोतरी हुई है। जुलाई में जहां 115 मरीज थे, वहीं अगस्त-सितंबर में यह आंकड़ा बढ़कर 1345 तक पहुंच गया।
राजस्थान में डेंगू के मामले सबसे अधिक
मलेरिया के मामले भी अगस्त में 121 से बढ़कर अब 864 तक हो गए हैं। डेंगू के मामले देश में सबसे अधिक राजस्थान से सामने आए हैं। हालांकि, राहत की बात यह है कि अब तक डेंगू और मलेरिया से किसी मरीज की जान नहीं गई है। फिर भी बढ़ते मामलों को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग को जल्द ठोस कदम उठाने की जरूरत है, ताकि स्थिति पर नियंत्रण पाया जा सके और महामारी का खतरा न बढ़े।
