Delhi E-Buses: राजधानी दिल्ली में सार्वजनिक परिवहन को और मजबूत बनाने की दिशा में मंगलवार को बड़ा कदम उठाया गया। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने आरके पुरम में आयोजित कार्यक्रम में 300 नई इलेक्ट्रिक (ई-बसों) को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इस दौरान दोनों नेताओं ने दक्षिण दिल्ली में बनने वाले बहु-स्तरीय (मल्टी-लेवल) बस डिपो की आधारशिला भी रखी। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए अमित शाह ने कहा कि नई इलेक्ट्रिक बसों के संचालन और आधुनिक बस डिपो के निर्माण से दिल्ली का सार्वजनिक परिवहन तंत्र और स्वच्छ एवं हरित परिवहन व्यवस्था दोनों मजबूत होंगे।
दिल्ली को मिली 300 नई ई-बसें
इन 300 नई बसों के शामिल होने के बाद दिल्ली के इलेक्ट्रिक बस बेड़े की संख्या लगभग 4,500 से बढ़कर 4,800 हो गई है। वहीं राष्ट्रीय राजधानी में कुल बसों की संख्या अब करीब 7,000 है।
पिछले दिनों भी शामिल हुई थीं नई ई-बसें
दिल्ली सरकार ने हाल के दिनों में चरणबद्ध तरीके से इलेक्ट्रिक बसों को अपने बेड़े में शामिल किया है। इससे पहले भी कई चरणों में नई ई-बसों को सड़कों पर उतारा गया था, ताकि सार्वजनिक परिवहन की क्षमता बढ़ाई जा सके और यात्रियों को बेहतर कनेक्टिविटी मिल सके। सरकार का लक्ष्य आने वाले समय में डीजल और सीएनजी बसों की जगह पूरी तरह इलेक्ट्रिक बसों को प्राथमिकता देना है।
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दिल्ली इलेक्ट्रिक वाहन नीति 2026 के तहत विस्तार
300 नई ई-बसों को शामिल किया जाना दिल्ली सरकार की 'दिल्ली इलेक्ट्रिक वाहन नीति 2026' का हिस्सा है। इस नीति का उद्देश्य राजधानी में इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देना, वायु प्रदूषण कम करना और स्वच्छ परिवहन के लिए आवश्यक बुनियादी ढांचा विकसित करना है। नीति के अनुसार अधिसूचना लागू होने के बाद दिल्ली परिवहन निगम (DTC) और परिवहन विभाग अपने बेड़े में केवल इलेक्ट्रिक बसों को ही शामिल करेंगे।
नई इलेक्ट्रिक बसों की खरीद और संचालन के लिए केंद्र सरकार की 'पीएम ड्राइव' (PM Drive) पहल के तहत वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई जा रही है। इसके अलावा, पिछले वर्ष डीटीसी ने शहर के कई मार्गों पर बेहतर कनेक्टिविटी सुनिश्चित करने के लिए नौ मीटर लंबी इलेक्ट्रिक बसों की संख्या भी बढ़ाई थी।
दिल्ली सरकार का कहना है कि इलेक्ट्रिक बसों के विस्तार से न केवल यात्रियों को आधुनिक और प्रदूषण-मुक्त परिवहन सुविधा मिलेगी, बल्कि राजधानी में कार्बन उत्सर्जन कम करने और स्वच्छ वायु के लक्ष्य को हासिल करने में भी मदद मिलेगी।
