Madhya Pradesh News: एक ओर गरबा के कार्यक्रमों में हिंदू संगठनों की अपील पर आयोजक आइडेंटी कार्ड चेक कर रहे हैं, कलावा बांध रहे हैं, तिलक लगा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर मध्य प्रदेश वक्फ बोर्ड के एक फरमान ने मुस्लिम संगठनों को और नाराज कर दिया है। वक्फ बोर्ड ने इस साल होने वाले इज्तिमा समारोह के लगने वाले बाजार/मेला में सभी धर्मों की एंट्री करवाने का फैसला कर लिया है।
वक्फ बोर्ड ने बताई वजह
दरअसल अब तक इज्तिमा बाजार में मुस्लिम समुदाय दुकानें लगाता था, इस्तीमा समिति अपने स्तर पर दुकानों का आवंटन कर देती थी। लेकिन इस साल से वक्फ बोर्ड के निर्देश पर दुकानों के आवंटन के लिए बाकायदा सरकारी विज्ञप्ति जारी होगी। टाइम्स नाउ नवभारत से खास बातचीत में वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष सनवर पटेल ने कहा कि वाकिफ की मंशा है कि यतीम बच्चों और गरीबों का भला किया जा सके, इसीलिए इस बाजार का आयोजन होता है। यह पूरी तरह से व्यावसायिक गतिविधि है, जो भी ज्यादा पैसा देगा वह दुकान लगा सकता है। वह चाहे किसी भी धर्म का क्यों ना हो। हम हिंदू मुस्लिम सभी का स्वागत करेंगे। सनवर पटेल ने कहा कि जो भी इसका विरोध करता है उसकी मानसिकता विरोध की हो सकती है लेकिन इज्तिमा का मेला धार्मिक नहीं बल्कि व्यावसायिक आयोजन है। इसलिए सभी धर्मों को लोग इसमें आ सकते हैं।
इज्तिमा का उद्देश्य और मुख्य बातें
इसमें देश-दुनिया से आए इस्लामी विद्वान (आलिम) और धर्मगुरु कुरान, हदीस और इस्लाम की बुनियादी शिक्षाओं पर चर्चा करते हैं।
इसका मुख्य उद्देश्य लोगों को अपने गुनाहों से तौबा (माफी) मांगने, नमाज, रोजा और अच्छे आचरण की तरफ प्रेरित करना होता है।
यह दुनिया भर में तब्लीगी जमात द्वारा आयोजित किया जाने वाला एक अहम कार्यक्रम है।
यह आयोजन आमतौर पर 3 से 4 दिन का होता है, जिसके अंतिम दिन देश और दुनिया में अमन-शांति के लिए सामूहिक दुआ की जाती है। भोपाल में दिसंबर के पहले हफ्ते में इज्तिमा का आयोजन होना प्रस्तावित है।
फैसले से मुस्लिम संगठन नाराज
वक्फ बोर्ड के इस फैसले से मुस्लिम संगठन नाराज हैं। ऑल इंडिया मुस्लिम त्योहार कमेटी के संयोजक शमशुल हसन बल्ली का कहना है कि यह फैसला सही नहीं है। जब गरबा और अन्य हिंदू कार्यक्रमों में मुस्लिम समुदाय दुकान नहीं लग सकता, कुछ चुनिंदा हिंदूवादी संगठन और नेता ऐसा कहते हैं तो हमें भी हिंदू समुदाय को एंट्री नहीं देनी चाहिए। सनवर पटेल कहते हैं कि यह सभी के लिए है तो वक्फ बोर्ड हिंदू समुदाय के बच्चों और महिलाओं को मदद क्यों नहीं करता? इज्तिमा पूरी तरह से धार्मिक आयोजन है, इसमें दुनिया भर की जमाते आती हैं। यहां हिंदू समुदाय के दुकानदारों को एंट्री नहीं देनी चाहिए। सनवर पटेल को पहले मुस्लिम संगठनों और धर्म गुरुओं से चर्चा करनी चाहिए थी, उसके बाद कोई फैसला करना चाहिए था। वह बीजेपी के नेता हैं और सरकारी पद पर हैं लेकिन उन्हें मुसलमानों की भावनाओं का भी ख्याल रखना चाहिए।
