50 साल बाद गंगा की मुख्य धारा में लौटी 'हिल्सा'; गाजीपुर में मिलीं दो मछलियों ने बढ़ाई वैज्ञानिकों की उम्मीद

दशकों के लंबे इंतजार के बाद यूपी के गाजीपुर में गंगा नदी में हिल्सा मछली मिली है। 740 ग्राम वजन की दो मछलियों की यह मौजूदगी गंगा के बेहतर होते पारिस्थितिकी तंत्र और नमामि गंगे के प्रयासों की बड़ी सफलता मानी जा रही है। आइए जानते हैं क्यों है यह खास।

राष्ट्रीय नदी गंगा के पारिस्थितिकी तंत्र यानी इकोसिस्टम और जैव विविधता की बहाली की दिशा में एक खुशखबरी आई है। उत्तर प्रदेश के गाजीपुर जिले में गंगा नदी में कई दशक के बाद प्रवासी हिल्सा (Hilsa) मछली के दो नमूने पाए गए हैं, मिलाकर जिनका वजन 740 ग्राम है। राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन (NMCG) और सेंट्रल इनलैंड फिशरीज रिसर्च इंस्टिट्यूट (ICAR-CIFRI) ने इसे गंगा नदी की बेहतर होते सेहत, पर्याप्त डिजॉल्व्ड ऑक्सीजन और लागतार जल प्रवाह का सीधा सबूत बताया है। लेकिन ये मछली इतनी खास क्यों है, आइए पहले इसे समझ लेते हैं।

hilsa found in ghazipur ganga river

50 साल बाद गाजीपुर में मिली हिल्सा

क्यों खास है हिल्सा?

हिल्सा जिसका वैज्ञानिक नाम Tenualosa ilisha है, ये मुख्य रूप से बंगाल की खाड़ी में पाई जाने वाली एक अत्यंत लोकप्रिय और स्वादिष्ट मछली है। बांग्लादेश में तो इसे राष्ट्रीय मछली का दर्जा प्राप्त है। हमारे देश में पश्चिम बंगाल, ओडिशा और त्रिपुरा में यह पाक संस्कृति का बहुत महत्वपूर्ण हिस्सा है। खास तौर पर त्योहारों के मौके आते ही 'इलिश' की मांग बहुत बढ़ जाती है। यह एक प्रवासी मछली है। प्रजनन के लिए ये खारे पानी से निकल कर मीठे पानी में आती है। पिछले कुछ दशकों से फरक्का बैराज इसमें सबसे बड़ी बाधा बना।

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