Gujarat Navratri: आधुनिकता के इस दौर में जहां डीजे और एयर-कंडीशन डोम वाले गरबे आम हो गए हैं, वहीं गुजरात के राजकोट में आज भी प्राचीन संस्कृति और परंपरा की अनोखी झलक देखने को मिल रही है। यहां नवरात्रि पर सालों से ऐसी अनूठी परंपरा निभाई जा रही है, जिसमें बेटियां सिर पर जलती हुई इंढोणी रखकर गरबा करती हैं। श्री बजरंग गरबी मंडल की ओर से आयोजित इस विशेष गरबा रास में आस्था, साहस और सांस्कृतिक विरासत का अनूठा संगम देखने को मिलता है। यह परंपरा पिछले 18 सालों से लगातार चली आ रही है।
सिर पर जलती इंढोणी रखकर गरबा
इस विशेष आयोजन में बेटियां सिर पर जलती हुई इंढोणी रखकर गरबे की लय पर रास करती हैं। करीब 20 से 25 मिनट तक चलने वाला यह प्रदर्शन दर्शकों के लिए खास आकर्षण रहता है। जलती इंढोणी के साथ कदमों का तालमेल और गरबा करने का खास अंदाज लोगों को मंत्रमुग्ध कर देता है। इस अनूठे रास को देखने के लिए जिसे राजकोट शहर ही नहीं बल्कि आसपास के ग्रामीण इलाकों से भी भारी संख्या में दर्शक पहुंचते हैं। नवरात्रि के दौरान हर साल दर्शकों में इस आयोजन को लेकर खास उत्साह रहता है।
नवरात्रि के तीन दिनों में होता है विशेष आयोजन
श्री बजरंग गरबी मंडल पिछले 18 सालों से इस परंपरा को आगे बढ़ा रहा है। नवरात्रि के तीसरे, छठे और नौवें दिन विशेष गरबा रास का आयोजन होता है। मां आद्यशक्ति की आराधना से जुड़ा यह आयोजन पारंपरिक गरबा संस्कृति को जीवंत बनाए रखने का प्रयास है। आधुनिक गरबा के बढ़ते चलन के बीच राजकोट की यह परंपरा अपने अलग स्वरूप की वजह से अलग पहचान बनाए हुए है। इसमें धार्मिक आस्था के साथ बेटियों का साहस भी देखने को मिलता है।
आग के बीच गरबा, सुरक्षा के लिए भी इंतजाम
सिर पर आग जलाकर किए जाने वाले इस खतरनाक और कठिन गरबा के दौरान किसी भी अप्रिय घटना से निपटने के लिए आयोजकों द्वारा विशेष व्यवस्था की जाती है। सुरक्षा के मद्देनजर फायर इक्विपमेंट समेत जरूरी इंतजाम रखे जाते हैं। राजकोट का यह विशेष गरबा रास नवरात्रि के पारंपरिक स्वरूप की याद दिलाता है। श्री बजरंग गरबी मंडल की ओर से 18 सालों से निभाई जा रही यह परंपरा आस्था, साहस और संस्कृति को एक साथ जोड़ती है।
