ग्रेटर नोएडा : बरसाती सीजन में जलभराव की समस्या से निपटने के लिए ग्रेटर नोएडा अथॉरिटी व्यापाक तैयारियां करने का दंभ भरता है, लेकिन सीजनल बारिश से शहर पानी-पानी होता है, जिससे लोगों को भारी समस्याओं का सामना करना पड़ता है। हालांकि, अथॉरिटी शहरवासियों से घरों में जलजमाव रोकने और साफ-सफाई के लिए जागरुक कर रहा, लेकिन वह अपने कार्यालय की छत पर ही जमा गंदा पानी को नहीं हटा पा रहा। इससे कार्यालय में सीलन भी आ रही है।
हिंदुस्तान की खबर के हवाले से सामने आई तस्वीर में ग्रेटर नोएडा अथॉरिटी की पोल खुलती नजर आ रही है। उसके प्रशासनिक भवन और टावर नंबर-1 और दो के बीच के हिस्से में छत पर लंबे समय से जमा पानी में काई लग गई है। इतना ही नहीं उसमें चाय के कप, बोतल, पॉलिथीन आदि कूड़ा जमा है। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि लंबे समय से साफ-सफाई नहीं की गई, जिससे मच्छर जनित बीमारियों का खतरा भी बढ़ गया है।
वीआईपी पॉर्किंग में जलभराव
हिंदुस्तान ने लिखा है कि छत के साथ भूतल पर वीआईपी पॉर्किंग के पास भी वर्षों से जलभराव की समस्या है। वहां से पूरे दिन ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के कार्यालय की छत पर जमा गंदा पानी जमा है। हालांकि, दिनभर अधिकारियों और कर्मचारियों का आना-जाना लग रहता है, लेकिन सफाई की ओर किसी का ध्यान नहीं जा रहा।
जानकारी के मुताबिक, यह समस्या नई नहीं है, बल्कि भवन के निर्माण के समय से है, लेकिन स्थायी समाधान नहीं किया गया। छत पर पानी भरने से इमारत में सीलन है। प्राधिकरण ने इस नई इमारत के निर्माण में 700 करोड़ रुपये खर्च किए थे। करोड़ों की लागत से निर्मित भव्य इमारत के बेसमेंट में मानसून की शुरुआत पर ही घुटनों तक पानी भर गया था, जिस कारण इलेक्ट्रिक पैनल के कमरे में भी पानी घुस गया था और वीआईपी लिफ्ट भी खराब हो गई थी।
ग्रेटर नोएडा की एसीईओ श्रीलक्ष्मी वीएस का कहना है कि 66 प्राधिकरण दफ्तरों में जलभराव और गंदगी दूर करने के लिए निर्देश दिए गए हैं। जल्द ही जल निकासी की व्यवस्था को दुरुस्त किया जाएगा।
