करीब सात साल बाद गाजियाबाद में उम्मीद की नई किरण जगी है, जहां तीन हजार आवंटियों को फ्लैट मिलेंगे। अब जीडीए ने प्रधानमंत्री आवास योजना के सभी प्रोजेक्ट में बाहरी विकास कार्य कराने की योजना बनाई है। इस पर 17.62 करोड़ रुपये खर्च होंगे। मंगलवार को बोर्ड बैठक में इस प्रस्ताव को मंजूरी मिलने के बाद प्राधिकरण करीब छह माह में ये सभी कार्य कराएगा, जिसके बाद फ्लैटों पर कब्जा देना शुरू कर देगा। गाजियाबाद विकास प्राधिकरण (जीडीए) ने प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) के पांच प्रोजेक्ट में कुल 3,496 फ्लैट बनाए हैं।
ऐसे में लाभार्थियों को अभी तक फ्लैटों पर कब्जा नहीं मिल पाया है। इसका मुख्य कारण प्रोजेक्ट का बाह्य विकास कार्य नहीं हो पाना है, जो अन्य विभागों को करना है। जीडीए ने अपने हिस्से का काम कराने के लिए सभी विभागों को कई बार पत्र लिखा है, लेकिन किसी भी विभाग ने इन प्रोजेक्ट में काम शुरू नहीं किया है। अब प्राधिकरण पांचों प्रोजेक्ट का सारा काम खुद कराएगा। जल निगम को 1.86 करोड़ रुपये की लागत से मधुबन बापूधाम में जलापूर्ति करनी थी।
सीवरेज कार्यों के लिए इतने हुए खर्च
डासना में उत्तर प्रदेश जल निगम को सीवरेज कार्यों पर 2.81 करोड़ रुपये और जलापूर्ति कार्यों पर 1.39 करोड़ रुपये खर्च करने पड़े। प्रताप विहार में जल निगम को 2.43 करोड़ रुपये और नूरनगर में जल निगम को 1.29 करोड़ रुपये खर्च कर जलापूर्ति करनी पड़ी। निवाड़ी में लोक निर्माण विभाग को 67.69 लाख रुपये में एप्रोच रोड बनाना था और जल निगम को 400 केएलडी क्षमता का एसटीपी बनाना था।
प्राधिकरण की कार्यों के प्रति पहल
जीडीए उपाध्यक्ष अतुल वत्स ने बताया कि इन परियोजनाओं का बाहरी विकास कार्य दूसरे विभागों को कराना था, लेकिन उन्होंने ये काम शुरू नहीं किया। अब प्राधिकरण ने इन कार्यों को कराने की योजना बनाई है, ताकि लोगों को फ्लैटों पर अधिकार दिया जा सके। जानकारी के मुताबिक, प्रधानमंत्री आवास योजना की पहली परियोजना 11 जुलाई 2018 को मधुबन बापूधाम में शुरू हुई थी। डासना में परियोजना 11 मार्च 2019, प्रताप विहार योजना और नूर नगर में परियोजना 20 दिसंबर 2019, निवाड़ी में परियोजना 10 जून 2019 को शुरू हुई थी। ऐसे में, सभी परियोजनाएं अभी पूरी तरह से पूरी नहीं हो पाई हैं।
