DTC Bus Strike Today News: दिल्ली और देशभर में चाहें जहां चले जाएं, हर कोई दिल्ली के पब्लिक ट्रांसपोर्ट की जमकर तारीफ करता है। अक्सर लोग कहते सुनाई देते हैं कि दिल्ली जैसा पब्लिक ट्रांसपोर्ट होना चाहिए। दिल्ली के पब्लिक ट्रांसपोर्ट का एक बड़ा हिस्सा DTC बसों के रूप में सड़कों पर दौड़ता है। दिल्ली के लाखों लोग रोज DTC बसों में सफर करते हैं और अपनी-अपनी मंजिल तक पहुंचते हैं। सिर्फ दिल्ली ही क्यों NCR के अन्य शहरों, जैसे नोएडा, फरीदाबाद, गाजियाबाद, गुरुग्राम आदि में भी DTC बसें यात्रियों की सेवा में तत्पर रहती हैं। लेकिन पिछले तीन दिन से DTC ड्राइवर हड़ताल पर हैं। आज यानी शुक्रवार 18 सितंबर को उनकी हड़ताल का चौथा दिन है। इस बीच सरकार के साथ उनकी बातचीत भी हुई, लेकिन हड़ताल खत्म करने का समझौता नहीं हो पाया। आखिर क्या हैं DTC ड्राइवरों की मांगें और समझौता कहां अटका हुआ है, चलिए जानते हैं -
दिल्ली में DTC संविदा ड्राइवरों की हड़ताल का आज चौथा दिन
आज लगातार चौथे दिन भी हजारों बसें दिल्ली की सड़कों से गायब हैं। दिल्ली के लाखों लोग जो रोज इन DTC बसों में सफर करते हैं, उन्हें घंटों इंतजार करना पड़ रहा है। DTC बस में जहां उनका सफर मात्र 20 रुपये में हो जाता था, उसी सफर के लिए इस हड़ताल के चलते उन्हें ऑटो, E-रिक्शा आदि दूसरे साधनों में 100 रुपये या इससे ज्यादा भी खर्च करने पड़ रहे हैं।
3000 से ज्यादा बसें सड़कों से गायब
हड़ताल में शामिल DTC कर्मचारी यूनियनों की मानें तो दिल्ली में कुल 6000 से ज्यादा बसें हैं, जिनमें से 3000 से ज्यादा सड़कों पर नहीं उतरी हैं। DTC कर्मचारी एकता यूनियन का दावा है कि DTC के बेड़े में 6500 से ज्यादा बसें हैं और 5000 से ज्यादा बस सेवाएं इस हड़ताल से प्रभावित हैं।
बस स्टैंडों पर लगी लंबी कतारें
DTC की बसें दिल्ली के अलग-अलग डिपो में खड़ी हैं। अपने दफ्तर आने-जाने या दिल्ली में कहीं भी सफर करने के लिए यात्रियों को मेट्रो, ऑटो या ई-रिक्शा का सहारा लेना पड़ रहा है। जबकि जो कुछ बसें सड़कों पर उतर भी रही हैं, उनके लिए दिल्ली के अलग-अलग इलाकों में बस-स्टैड पर लंबी-लंबी कतारें लगी हुई हैं।
जानें क्या हैं हड़ताली ड्राइवरों की मांगें?
हड़ताल कर रहे संविदा ड्राइवरों (Contractual Drivers) को अभी 862 रुपये प्रति दिन की मजदूरी मिलती है। उनकी मांग है कि दैनिक मजदूरी बढ़ाकर 2000 रुपये की जाए या पर्मानेंट स्टाफ की तरह कम से कम 60000 रुपये सैलरी दी जाए।
इंश्योरेंस का भी फायदा मिले
अगर संविदा ड्राइवर बीमार पड़ जाते हैं या चोटिल हो जाते हैं तो उन्हें किसी तरह की मेडिकल सुविधा नहीं मिलती और उन्हें इस दौरान मजदूरी से भी हाथ धोना पड़ता है। हड़ताल कर रहे ड्राइवरों की मांग है कि उन्हें मेडिकल इंश्योरेंस और अन्य हेल्थ बेनिफिट दिए जाएं।
छुट्टियों की मांग कर रहे ड्राइवर
हड़ताल कर रहे संविदा कर्मचारी गारंटीड पेड लीव (PL), पब्लिक हॉलीडे पर काम करने के बदले अतिरिक्त मजदूरी, वार्षिक बोनस भी दिया जाए, जो अभी संविदा कर्मियों को नहीं दिया जाता।
ओवरटाइम भुगतान की भी डिमांड है
हड़ताल कर रहे संविदा कर्मचारियों की मांग है कि उन्हें ओवरटाइम काम करने पर उसका अतिरिक्त भुगतान किया जाए। इसके अलावा अनुचित दंड या बस को एक्सीडेंट से नुकसान होने पर काटे जाने वाले भुगतान पर भी रोक लगाई जानी चाहिए।
समान काम के लिए समान वेतन
हड़ताली कर्मचारियों की मांग है कि उन्हें स्थायी (Permanent) डीटीसी (DTC) कर्मचारियों से अच्छा वेतन और बेहतर कामकाजी परिस्थितियां उपलब्ध कराई जाएं, जबकि उन्हें अधिक मासिक तनख्वाह मिलती है।
मान ली गई हैं हड़ताली ड्राइवरों की ज्यादातर मांगें!
दिल्ली के परिवहन मंत्री पंकज सिंह ने कल यानी गुरुवार 17 सितंबर को हड़ताली कर्मचारियों से हड़ताल खत्म कर काम पर लौटने की अपील की थी। परिवहन मंत्री ने कहा कि उनकी ज्यादातर मांगें मान ली गई हैं। उन्होंने कहा सैलरी बढ़ाने के मुद्दे पर भी श्रम मंत्रालय से परामर्श के बाद बात कर ली जाएगी। जबकि हड़ताली ड्राइवरों का कहना है कि जब तक उनकी मांगों को पूरी तरह से नहीं मान लिया जाता, तब तक हड़ताल जारी रहेगी।
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मंत्री ने बताया कि संविदा ड्राइवरों की मेडिकल इंश्योरेंस की मांग को मान लिया गया है। परिवार के सदस्यों के लिए कवरेज को भी माना गया है। उनका कहना है कि संविदा ड्राइवरों को महीने में चार दिन की छुट्टी भी दी जाएगी।
