देश की सबसे बड़ी और महत्वकांक्षी सड़क परियोजना दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे (Delhi Mumbai Expressway) का काम अब अपने अंतिम चरण में है। दिल्ली और मुंबई के अलावा बीच में आने वाले कई शहरों के लोगों को इस एक्सप्रेसवे का काम पूरा होने का लंबे समय से इंतजार है। कहा जा रहा है कि यह एक्सप्रेसवे इस साल के अंत तक पूरा हो जाएगा। हालांकि, गुजरात में सूरत के पास लगभग 90 किलोमीटर का एक छोटा सा हिस्सा अब भी अधूरा है। इस एक्सप्रेसवे के बनकर आम जनता के लिए खुल जाने से दिल्ली और मुंबई के बीच लगने वाला मौजूदा टाइम 24 घंटे से कम होकर 12 घंटे रह जाएगा।
दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे का काम इस साल हो जाएगा पूरा
सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय के अनुसार दिल्ली और वडोदरा के बीच दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे का 650 किमी का हिस्सा पहले ही चालू हो चुका है। दिल्ली और वडोदरा के बीच इस एक्सप्रेसवे पर 122 किमी के हिस्से पर काम 90 फीसद तक पूरा हो चुका है, जिसके इस साल के अंत तक पूरा हो जाने की उम्मीद है।
बता दें कि 1386 किमी लंबे दिल्ली मुंबई एक्सप्रेसवे को दो भागों में तैयार किया जा रहा है। इसका पहला हिस्सा दिल्ली और वडोदरा के बीच 845 किमी का है, जबकि दूसरा हिस्सी वडोदरा से मुंबई के बीच 450 किमी है। अप्रैल 2025 तक इस एक्सप्रेसवे का 756 किमी हिस्से पर ट्रैफिक चल रहा था, जबकि अब 774 किमी हिस्से को ट्रैफिक के लिए खोल दिया गया है।
न्यूज18 की रिपोर्ट के अनुसार सूरत और गुजरात-महाराष्ट्र बॉर्डर के बीच दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे के 140 किमी हिस्से पर काम देरी से हो रहा है। इस बीच एक्सप्रेसवे के निर्माण कार्य में सुस्ती के चलते एक्सप्रेसवे की डेडलाइन भी आगे बढ़ानी पड़ी है। इस सेक्शन के तीन पैकेजों जो 25, 27 और 35 किमी लंबे हैं उन पर 50 फीसद से कम काम हुआ है। अगर इस सेक्शन पर काम में तेजी नहीं आई तो पूरे एक्सप्रेसवे को बनकर तैयार होने में 2026 भी बीत जाएगा।
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दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे की कुल लागत ₹1 लाख करोड़ आंकी गई है। इस एक्सप्रेसवे को 8 लेन का बनाया जा रहा है, भविष्य में इसे 12 लेन तक बढ़ाया जा सकता है। एक्सप्रेसवे को 120 किमी/घंटा की रफ्तार से चलने के लिए बनाया जा रहा है। यह एक्सप्रेसवे हरियाणा, राजस्थान, मध्यप्रदेश, गुजरात और महाराष्ट्र के कई शहरों को जोड़ते हुए बन रहा है। इससे दिल्ली और मुंबई के बीच की दूरी लगभग 1440 किमी (NH-48) से घटकर महज 1,386 किमी तक रह जाएगी।
एक्सप्रेसवे के ज्यादातर हिस्से अब तेजी से तैयार होते जा रहे हैं। ऐसे में अब सारा ध्यान गुजरात में सूरत से गुजरात-महाराष्ट्र बॉर्डर तक के सेक्शन के निर्माण पर होगा।
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