देश में साल 1975 में आपातकाल लगाया गया था। आज 50 साल बाद दिल्ली सरकार आपातकाल के दौरान लोकतंत्र की खातिर जेल जाने वाले लोगों को पेंशन देने की योजना बना रही है। दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने एक कार्यक्रम के दौरान लोकतंत्र सेनानियों को आर्थिक सहयोग देने की योजना के संकेत दिए हैं।
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने मंगलवार को 1984 के सिख विरोधी दंगों में मारे गए लोगों के आश्रितों को सरकारी नौकरी के नियुक्ति पत्र दिए। इसी कार्यक्रम में दौरान उन्होंने लोकतंत्र सेनानियों को आर्थिक सहयोग देने की योजना के संकेत दिए। उन्होंने कहा कि पूर्व की सरकारों ने आपातकाल के दौरान जेल जाने वाले सेनानियों को कोई सम्मान नहीं दिया, जबकि उनकी सरकार ने अन्य राज्यों की तरह दिल्ली में भी इन्हें सम्मान देने का संकल्प लिया है।
भाजपा शासित राज्यों में लोकतंत्र सेनानियों को सम्मान निधि दी जाती है, जैसे कि ओडिशा में 20,000 रुपये प्रति माह, राजस्थान और छत्तीसगढ़ में भी मीसा बंदियों को पेंशन देने का विधेयक पारित किया गया है। हरियाणा ने इस साल पेंशन राशि बढ़ाकर 20 हजार रुपये प्रति माह कर दी है।
उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और बिहार में भी लोकतंत्र सेनानियों को पेंशन मिलती है। बता दें कि 2014 में लोकतंत्र सेनानी संघ का गठन किया गया था और भाजपा नेताओं ने दिल्ली विधानसभा चुनाव के दौरान इन्हें सम्मान देने का वादा किया था। अब जब दिल्ली में भाजपा की सरकार है, तो उम्मीद की जा रही है कि शीघ्र ही यहां के लोकतंत्र सेनानियों को भी सम्मान राशि देने की घोषणा की जाएगी।
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लोकतंत्र सेनानी संघ के महामंत्री राजकुमार सपरा ने कहा कि आपातकाल के दौरान जेल जाने वाले सेनानियों को 12 राज्यों में सम्मान निधि मिलती है और दिल्ली में भी इसे लागू किया जाना चाहिए।
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