दिल्ली

क्या बदल जाएगा शकूर बस्ती का नाम, क्या होगा नया नाम? इस विधायक ने चलाया अभियान

भाजपा विधायक कर्नल सिंह ने शकूर बस्ती का नाम बदलकर श्री रामपुरम करने के लिए एक हस्ताक्षर अभियान की शुरुआत की है। उन्होंने अब तक 60,000 से अधिक लोगों के हस्ताक्षर जुटा लिए हैं और एक लाख हस्ताक्षरों का लक्ष्य रखा है।

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सीएम रेखा गुप्ता (फाइल फोटो) (इमजे क्रेडिट-ANI)

Photo : Times Now Digital

दिल्ली : शकूर बस्ती विधानसभा क्षेत्र का नाम बदलने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। भाजपा विधायक करनैल सिंह ने क्षेत्र का नाम बदलकर श्री रामपुरम करने के लिए हस्ताक्षर अभियान चलाया है। उन्होंने अब तक 60,000 से अधिक हस्ताक्षर एकत्र किए हैं और एक लाख हस्ताक्षरों का लक्ष्य रखा है। करनैल सिंह का कहना है कि यह मांग राजनीतिक नहीं, बल्कि स्थानीय निवासियों की है। विधायक ने बताया कि एक लाख हस्ताक्षर एकत्र करने के बाद, नाम बदलने का प्रस्ताव दिल्ली विधानसभा के अगले सत्र में पेश किया जाएगा।

क्या होगा शकूर बस्ती का नाम?

फरवरी में हुए विधानसभा चुनाव में करनैल सिंह ने आम आदमी पार्टी के पूर्व स्वास्थ्य मंत्री सत्येंद्र जैन को हराया था। चुनाव के दौरान, कई निवासियों ने नाम परिवर्तन की इच्छा व्यक्त की थी। शकूर बस्ती अब एक विकसित क्षेत्र बन चुका है, जिसमें ऊंची इमारतें हैं। क्षेत्र के बुजुर्गों ने सुझाव दिया है कि इसका नाम श्री रामपुरम रखा जाए, जो भगवान श्री राम के प्रति लोगों की भावनाओं को दर्शाता है।

करनैल सिंह ने कहा कि क्षेत्र में लगभग 1.5 लाख मतदाता हैं, जिनमें से लगभग 99,000 ने हाल के विधानसभा चुनाव में मतदान किया था। इससे पहले, मुस्तफाबाद का नाम बदलने की मांग भी उठाई गई थी, जहां भाजपा विधायक मोहन सिंह बिष्ट ने नाम बदलकर शिव विहार या शिव पुरी करने का सुझाव दिया था। यह प्रस्ताव विधानसभा में प्रक्रियाधीन है।

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Pushpendra kumar
पुष्पेंद्र कुमारauthor

पुष्पेंद्र कुमार टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में चीफ कॉपी एडिटर के रूप में सिटी डेस्क पर कार्यरत हैं। जर्नलिज्म में मास्टर्स डिग्री हासिल करने के बाद से वे पिछले 7 वर्षों से सक्रिय पत्रकारिता में जुड़े हैं। इस दौरान उन्होंने 10,000 से अधिक खबरें लिखी हैं। पुष्पेंद्र हाइपर-लोकल मुद्दों, रेलवे, रोड, इंफ्रास्ट्रक्चर, डेवलपमेंट, कृषि और मौसम से जुड़ी खबरों पर गहरी पकड़ रखते हैं। शहर से लेकर गांव-देहात तक की संवेदनशीलताओं को समझते हुए वे लोकल खबरों को ऐसा रूप देते हैं जो न केवल तथ्यपूर्ण होता है, बल्कि पाठकों से भावनात्मक रूप से भी जुड़ता है।

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