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Explained: भारत में क्यों आउट ऑफ कंट्रोल हो रही है गर्मी? वैज्ञानिक रिपोर्ट का खुलासा, क्लाइमेट चेंज के कारण जानलेवा हुई हीटवेव

Heatwave Explained: भारत में गर्मी क्यों आउट ऑफ कंट्रोल हो रही है? जानिए 'ClimaMeter' की उस वैज्ञानिक रिपोर्ट का पूरा सच, जो बताती है कि कैसे मानव-जनित जलवायु परिवर्तन के कारण भारत की Heatwave 2 डिग्री तक अधिक जानलेवा हो चुकी है और 'गर्म रातें' कैसे कहर ढा रही हैं।

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Photo : Times Now Digital
क्यों भट्टी की तरह दहक रही है देश की हवा
Authored by: Nishant Tiwari
Updated May 23, 2026, 14:33 IST

Heatwave Reason in India: क्या आपने कभी सोचा है कि हमारे दादा-दादी के जमाने में जो लू सिर्फ दोपहर के समय डराती थी, वह आज रात के अंधेरे में भी हमारा दम क्यों घोट रही है? क्यों उत्तर प्रदेश का बांदा जिला 47.6 डिग्री सेल्सियस पर उबलने लगा है और दिल्ली-अहमदाबाद जैसे महानगर भट्टी बन चुके हैं? जलवायु वैज्ञानिकों की अंतरराष्ट्रीय संस्था 'ClimaMeter' की ताजा रिपोर्ट ने इस तपिश के पीछे छिपे एक ऐसे राज को उजागर किया है, जिसे हम विकास की अंधी दौड़ में अनदेखा कर रहे हैं। यह रिपोर्ट बताती है कि भारत में पड़ रही यह भीषण गर्मी कोई सामान्य मौसमी बदलाव नहीं है, बल्कि यह सीधे तौर पर मानव-जनित जलवायु परिवर्तन (Human-driven Climate Change) का नतीजा है।

क्या कहती है 'ClimaMeter' की रिपोर्ट?

वैज्ञानिकों ने इस शोध में भारत के मौसम के 1950-1987 और 1988-2025 तक के दो कालखंडों की तुलना की है। जांच में सामने आया कि हवा का जो चक्रवात (Circulation Pattern) पहले सामान्य गर्मी लाता था, वही पैटर्न जब आज के दौर में सक्रिय होता है, तो तापमान को 1.5 से 2 डिग्री सेल्सियस तक अधिक गर्म बना देता है। इसका मतलब यह है कि हमारी आबोहवा का बैकग्राउंड ही पहले के मुकाबले 2 डिग्री ज्यादा गर्म हो चुका है। इस अतिरिक्त हीटिंग के लिए अल-नीनो जैसी प्राकृतिक वजहें जिम्मेदार नहीं हैं, बल्कि यह पूरी तरह इंसानों द्वारा फैलाए गए प्रदूषण और कार्बन उत्सर्जन का पाप है।

सिर्फ हीटवेव नहीं, 'गर्म रातें' हैं असली साइलेंट किलर

वैज्ञानिकों के मुताबिक, अब भारत की गर्मी का मिजाज पूरी तरह बदल चुका है। अब यह संकट सिर्फ दोपहर के तापमान तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसके पीछे तीन बड़े कारण काम कर रहे हैं:

रात का न्यूनतम तापमान 30 डिग्री सेल्सियस के पार: विदर्भ के चंद्रपुर और यवतमाल जैसे शहरों में रात का तापमान भी 30 डिग्री सेल्सियस से नीचे नहीं उतरा। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, दिल की सेहत और अच्छी नींद के लिए रात का तापमान 24 डिग्री सेल्सियस से कम होना चाहिए। जब रातें ठंडी नहीं होतीं, तो इंसानी शरीर को दिन भर की तपन से उबरने का मौका नहीं मिलता, जिससे हीटस्ट्रोक (लू लगना) और हार्ट अटैक का खतरा कई गुना बढ़ जाता है।

सूखी मिट्टी और पहाड़ों में कम बर्फबारी: हिमालयी क्षेत्रों में कम बर्फबारी के कारण धरती सूरज की किरणों को वापस रिफलेक्ट नहीं कर पा रही है। वहीं, मैदानी इलाकों की मिट्टी सूखी होने के कारण वाष्पीकरण से होने वाली प्राकृतिक ठंडक (Evaporative Cooling) गायब हो गई है, जिससे सीधे हवा गर्म हो रही है।

अर्बन हीट आइलैंड (Urban Heat Island): दिल्ली, लखनऊ और अहमदाबाद जैसे घनी आबादी वाले शहरों में कंक्रीट के मकान, डामर की सड़कें और एसी (AC) से निकलने वाली गैसें दिनभर गर्मी को सोखती हैं और रात में उसे बाहर उगलती हैं। नतीजा यह कि शहर रात में भी कंक्रीट के तंदूर बन रहे हैं।

आर्थिक तबाही और 14.6 करोड़ लोग सीधे निशाने पर

यह रिपोर्ट सिर्फ मौसम की चेतावनी नहीं देती, बल्कि यह हमारे समाज और अर्थव्यवस्था पर पड़ने वाले सीधे असर का डरावना खाका भी खींचती है। रिपोर्ट के अनुसार इस क्लाइमेट चेंज जनित हीटवेव के कारण भारत के 14.65 करोड़ लोग सीधे तौर पर अत्यधिक थर्मल स्ट्रेस (Heat Stress) के दायरे में आए हैं। देश की 1,343.60 बिलियन अमेरिकी डॉलर मूल्य की आर्थिक गतिविधियां इस जानलेवा गर्मी के कारण प्रभावित हो रही हैं। सबसे खतरनाक और भीषण श्रेणी में 4.39 करोड़ लोग और 341.13 बिलियन डॉलर की इकॉनमी फंसी हुई है। इसके कारण खेतों में खड़ी फसलें समय से पहले बर्बाद हो रही हैं, बिजली ग्रिड फेल हो रहे हैं और बाहर काम करने वाले दिहाड़ी मजदूरों की कार्यक्षमता (Labour Capacity) दम तोड़ रही है।

अब सुधरने का आखिरी मौका

आईपीसीसी (IPCC) की छठी मूल्यांकन रिपोर्ट भी साफ चेतावनी दे चुकी है कि दक्षिण एशिया (विशेषकर भारत) दुनिया के उन हिस्सों में शामिल है, जो जलवायु संकट से सबसे बुरी तरह तबाह होने वाले हैं। हवा की रफ्तार कम होने के कारण शहरों के भीतर वेंटिलेशन बंद हो गया है, जिससे उमस और तपन का 'डबल टॉर्चर' पैदा हो रहा है। यदि हमने अब भी कंक्रीट के जंगलों को बेतरतीब बढ़ाने पर रोक नहीं लगाई, जल स्रोतों को पुनर्जीवित नहीं किया और हरियाली को वापस नहीं लाए, तो भारत के ये समृद्ध शहर आने वाले समय में इंसानों के रहने लायक नहीं बचेंगे।

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