चण्डीगढ़

न तो बुलडॉग पाल सकेंगे और न ही पिटबुल! चंडीगढ़ में 6 कुत्तों पर नगर निगम ने लगाया बैन, देख लीजिए लिस्ट

Chandigarh: चंडीगढ़ नगर निगम ने सार्वजनिक सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए आक्रामक कुत्तों की 6 नस्लों पर प्रतिबंध लगाया गया है। अब इन नस्लों के कुत्तों को कोई पाल नहीं सकता है। नगर निगम ने बताया कि इस नियम का उल्लंघन करने वाले लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

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चंडीगढ़ में अब नहीं पाल सकेंगे ये 6 आक्रामक कुत्ते (Photo- Canva)

Chandigarh News: चंडीगढ़ नगर निगम ने सार्वजनिक सुरक्षा को सुनिश्चित करने के लिए एक बड़ा और सख्त कदम उठाया। नगर निगम ने शहर में आक्रामक कुत्तों की 6 नस्लों को पालने पर प्रतिबंध लगाया गया है। इसमें अमेरिकन बुलडॉग, अमेरिकन पिटबुल और बुल टेरियर नस्ल शामिल है। इन छह आक्रामक कुत्तों की नस्लों के पालने पर तत्काल प्रभाव से प्रतिबंध लगा दिया गया है।

निगम के अधिकारियों ने इस निर्णय की पुष्टि की और बताया कि यह फैसला कुत्तों के बढ़ते हमलों की घटनाओं को देखते हुए और लोगों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए लिया गया है। यह प्रतिबंध इसलिए महत्वपूर्ण है ताकि इन नस्लों से जुड़ी संभावित जोखिमों को नियंत्रित किया जा सके। नगर निगम का मानना है कि भले ही कुत्तों को पालतू जानवर के रूप में रखा जाए, लेकिन उनकी आक्रामक प्रवृत्ति के कारण सार्वजनिक स्थानों पर वह खतरा बन सकते हैं। इन सभी बातों को ध्यान में रखते हुए इन 6 नस्लों पर प्रतिबंध किया गया।

कुत्तों की इन 6 नस्लों पर लगाया गया प्रतिबंध

1. अमेरिकन बुलडॉग (American Bulldog)

2. अमेरिकन पिटबुल (American Pitbull)

3. बुल टेरियर (Bull Terrier)

4. केन कॉर्सो (Cane Corso)

5. डोगो अर्जेंटिनो (Dogo Argentino)

6. रॉटवीलर (Rottweiler)

इन नस्लों को उनकी आक्रामकता और संभावित खतरनाक हमलों की प्रवृत्ति के आधार पर प्रतिबंधित किया गया है। निगम ने स्पष्ट किया कि इन नस्लों को अब चंडीगढ़ शहर में पालतू जानवर के रूप में नहीं रखा जा सकेगा।

नियम उल्लंघन पर होगी सख्त कार्रवाई

नगर निगम के अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि यह प्रतिबंध सार्वजनिक सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देने के लिए लागू किया गया है। इस संबंध में जल्द ही विस्तृत दिशानिर्देश भी जारी किए जाएंगे। निगम इन नियमों को सख्ती से लागू करने की योजना बना रहा है। निगम ने बताया कि जिनके पास पहले से ये नस्ल है, उन पर यह नियम लागू नहीं होगा। लेकिन इस दौरान उन्हें 45 दिन की बफर अवधि के बीच अपने कुत्तों को पंजीकृत कराना होगा।

इस अवधि के बाद जो लोग प्रतिबंधित नस्लों को का प्रजनन, रखने और आश्रय देते पाये गए तो उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। इन्हें लोगों को उप-नियमों के आधार पर दण्ड दिया जाएगा। इस प्रतिबंध का उद्देश्य लोगों के बीच जागरूकता बढ़ाना भी है कि पालतू जानवरों का चुनाव करते समय सार्वजनिक सुरक्षा का ध्यान रखना भी उतना ही आवश्यक है, जितना पशु प्रेम का है।

Varsha Kushwaha
वर्षा कुशवाहाauthor

वर्षा कुशवाहा टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल की एजुकेशन डेस्क पर बतौर कॉपी एडिटर कार्यरत हैं और पिछले 5 वर्षों से मीडिया में सक्रिय हैं। जर्नलिज़्म में पोस्ट ग्रेजुएशन डिप्लोमा पूरा करने के बाद उन्होंने न्यूज रूम में तेजी, सटीकता और गहराई के साथ काम करते हुए अपनी मजबूत संपादकीय पहचान बनाई है। वर्षा की विशेषज्ञता हाइपर-लोकल खबरों, इवेंट कवरेज और स्टेट पॉलिटिक्स से जुड़ी रिपोर्टिंग में भी है। अब तक वर्षा कुशवाहा 8,000 से अधिक खबरें लिख चुकी हैं, जिनमें कई अहम लोकल रिपोर्ट्स, एजुकेशन और करियर की खबरें तथा फीचर-आधारित स्टोरीज शामिल हैं।

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