कनाडा में पड़ी ठंड और भारत में सूख गया मानसून: वैज्ञानिकों को छत्तीसगढ़ की झील में छिपा मिला 8200 साल पुराना 'ग्लोबल कनेक्शन'

बीरबल साहनी पुराविज्ञान संस्थान (BSIP) के वैज्ञानिकों ने छत्तीसगढ़ की तुमान झील के पराग कणों (Pollen grains) से पता लगाया है कि कैसे 8,200 साल पहले ग्रीनलैंड की ठंडक ने भारतीय मानसून को प्रभावित किया था। आइए जानते हैं इसके बारे में।

क्या आप कल्पना कर सकते हैं कि दुनिया के एक कोने यानी कनाडा और ग्रीनलैंड में होने वाला बदलाव हजारों मील दूर भारत के मानसून को पूरी तरह बदल सकता है? भारतीय वैज्ञानिकों ने हाल ही में एक ऐसी खोज की है जो यह साबित करती है कि प्रकृति के धागे आपस में बहुत मजबूती से जुड़े हुए हैं। करीब 8,200 साल पहले उत्तरी अटलांटिक में आई एक 'बर्फानी आफत' ने भारत में मानसून की रफ्तार को धीमा कर दिया था।

Indian Summer Monsoon History study

झील की मिट्टी और पराग कणों ने खोला राज

क्या था वह '8.2 ka कूलिंग इवेंट'?

वैज्ञानिकों के अनुसार, लगभग 8,200 साल पहले कनाडा की 'लेक अगासिज' (Lake Agassiz) से मीठे पानी का एक विशाल सैलाब हडसन की खाड़ी के रास्ते उत्तरी अटलांटिक महासागर में जा मिला। इस घटना के कारण ग्रीनलैंड का तापमान 3 डिग्री सेल्सियस तक गिर गया और वातावरण में मीथेन की मात्रा में भारी कमी आई। इसे विज्ञान की दुनिया में '8.2 ka कूलिंग इवेंट' कहा जाता है, जिसने दुनिया के जल चक्र (Hydrologic Cycle) को हिलाकर रख दिया था।

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