महंगाई साल दर साल बढ़ रही है। महंगाई बढ़ने का असर खाने-पीने से लेकर तमाम जरूरी सामान पर पड़ रहा है। बढ़ती महंगाई आपके घर का बजट भी हर साल बढ़ा रहा है। ऐसे में मान लेते हैं कि अभी आपके घर का खर्च हर महीने 10 हजार रुपये में चलता है तो 10 साल वह बढ़कर कितना हो जाएगा? क्या आपने इस सवाल का जवाब कभी जानना चाहा है। अगर नहीं तो हम आपको बताते हैं। महंगाई के असर से बढ़ने वाले खर्च की गणना करने के लिए हम महंगाई की सालाना औसत वृद्धि दर 6% लेंगे। बता दें कि महंगाई की यह दर घर या बढ़ सकती है।
महंगाई क्या है?
महंगाई वह दर है जिस पर वस्तुओं और सेवाओं की कीमतें बढ़ती हैं। यह मुख्य रूप से उपभोक्ता की खरीदने की क्षमता (क्रय शक्ति) को प्रभावित करती है। महंगाई से दैनिक उपयोग की चीजों जैसे भोजन, कपड़े, परिवहन और उपभोक्ता सामान आदि के दामों में बढ़ोतरी होती है।महंगाई का आकलन समय के साथ वस्तुओं और सेवाओं की औसत कीमतों में होने वाले बदलावों को देखकर किया जाता है। इसके लिए एक खास वर्ष को 'आधार वर्ष' (बेस ईयर) माना जाता है, जो कीमतों में प्रतिशत वृद्धि की गणना के लिए एक संदर्भ (रेफरेंस) के रूप में काम करता है। वस्तुओं के संदर्भ में इसी प्रतिशत को आमतौर पर 'महंगाई दर' (रेट ऑफ इन्फ्लेशन) कहा जाता है।
10 हजार का खर्च 10 साल बाद कितना बढ़ेगा?
मान लेते हैं कि औसतन महंगाई दर 6% की दर से बढ़ती है। ऐसे में महंगाई के असर से अभी अगर आपका घर खर्च का बजट ₹10,000 है तो 10 साल बाद बढ़कर करीब ₹17,908 प्रति माह हो जाएगा। यानी अभी 10 हजार रुपये में आप जितनी राशन का सामान खरीद रहे हैं, उतना सामान 10 साल बाद खरीदने के लिए ज्यादा पैसे चाहिए होंगे।
अलग-अलग महंगाई दर पर कितना बढ़ सकता है खर्च
| औसत सालाना महंगाई | 10 साल बाद ₹10,000 की जरूरत |
|---|---|
| 4% | करीब ₹14,802 |
| 5% | करीब ₹16,289 |
| 6% | करीब ₹17,908 |
| 7% | करीब ₹19,672 |
| 8% | करीब ₹21,589 |
महंगाई की मार सिर्फ थाली तक नहीं
यह समझना बहुत जरूरी है कि सालाना बढ़ती महंगाई का असर सिर्फ राशन पर नहीं होगा। यह आपके हर खर्च को बढ़ाने का काम करेगा। बच्चों की पढ़ाई का खर्च, इलाज का खर्च, रूम रेंट का खर्च, कपड़ों का खर्च आदि पर भी बोझ बढ़ेगा। अगर आज आपका मेडिकल या बच्चों की फीस का खर्च 10,000 रुपये है तो तो 8% की महंगाई दर से 10 साल बाद यही खर्च बढ़कर सीधे ₹21,589 प्रति महीना हो जाएगा।महंगाई कैसे है 'साइलेंट किलर'?
महंगाई का असर तुरंत भले ही नजर न आए, लेकिन लंबे समय में इसका प्रभाव काफी बड़ा होता है। राशन, बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजमर्रा की जरूरतों का खर्च अगर लगातार 6% से 8% की दर से बढ़े तो लंबी अवधि में यह आपके खर्च को कई गुना बढ़ा देता है। यही वजह है कि रिटायरमेंट, बच्चों की पढ़ाई या घर खरीदने जैसे बड़े वित्तीय लक्ष्यों की प्लानिंग करते समय सिर्फ महंगाई को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। साथ ही, ऐसे निवेश विकल्पों पर विचार करना चाहिए जिनमें लंबे समय में महंगाई को मात देने की क्षमता हो। SIP के जरिए इक्विटी म्यूचुअल फंड में निवेश इसका एक विकल्प हो सकता है, हालांकि इसमें बाजार जोखिम भी जुड़ा रहता है।
महंगाई की मार
महंगाई का असर आप पर कैसे होता है?
- खरीदने की क्षमता में कमी: सामान और सेवाएं महंगी होने से आपकी जीवनशैली का खर्च बढ़ जाता है। इससे आपके खरीदने की क्षमता घट जाती है।
- बचत में गिरावट: आय सीमित रहने और खर्च बढ़ने के कारण बचत में गिरावट होती है।
- ब्याज दरों में बढ़ोतरी: महंगाई को नियंत्रित करने के लिए बैंक ब्याज दरें बढ़ा देते हैं, जिससे EMI बढ़ जाती है।
- आर्थिक असमानता में वृद्धि: गरीब और मध्यम वर्ग पर दैनिक जरूरतों का बोझ बढ़ता है, जबकि अमीर वर्ग के एसेट्स (संपत्ति) की वैल्यू बढ़कर उन्हें फायदा पहुंचाती है।
- संपत्तियों के दाम में उछाल: महंगाई से बचने के लिए लोग सोना, रियल एस्टेट और शेयर बाजार में निवेश करते हैं, जिससे इन संपत्तियों की कीमतें भी काफी बढ़ जाती हैं।
महंगाई के असर से कैसे बचें?
अगर आपको महंगाई से मुकाबला करना है तो उसी अनुपात से आपको कमाई बढ़ानी होगी। आप नौकरी करते हैं या बिजनेस, सालाना महंगाई दर से अधिक इनकम बढ़नी चाहिए। आपको यह देखना होगा कि आपकी कमाई, बचत और निवेश की दर महंगाई से आगे निकल रही है या नहीं। उदाहरण के लिए, अगर महंगाई औसतन 6% है लेकिन आपकी बचत पर टैक्स और अन्य प्रभावों के बाद वास्तविक रिटर्न इससे कम है, तो लंबे समय में आपकी खरीदने की क्षमता घट सकती है। इसलिए कमाई बढ़ाने पर जोर देना होगा।
